इन बीजों के साथ करें अपने ब्लड शुगर को कण्ट्रोल-Best Seeds for Diabetes Patients

डाईबिटीज़ के बढ़ते मरीजों की संख्या के साथ यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। डाईबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए एक व्यक्ति को अपनी डाइट यानि खाने पर बहुत ध्यान देने की ज़रूरत है। ऐसे कई प्रकार के खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप अपने शुगर लेवल्स को कंट्रोल कर सकते हैं। उन्हीं में से एक है बीज या सीड्स। ऐसे कई प्रकार के बीज है जो पोषण के साथ-साथ आपके ब्लड ग्लुकोज़ लेवल को सामान्य बनाए रख सकते हैं।

टाइप-2 डाईबिटीज़ आजकल एक बड़ी समस्या बनती जा रही है जो ज़्यादातर युवाओं व बच्चों को प्रभावित कर रही है। इसका प्रमुख कारण है ग़लत लाइफस्टाइल। फास्ट फूड और सीमित शारीरिक गतिविधि के कारण शरीर इंसुलिन का बेहतर ढंग से उपयोग करने में अक्षम हो जाता है जो बाद में जा कर टाइप-2 डाईबिटीज़ का कारण बनती है।

ऐसे कई बीज हैं जो इस बढ़ते शुगर लेवल्स पर लगाम लगाने में सहायता कर सकते हैं। ये बीज शुगर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। आइए इस ब्लॉग में जाने ऐसे ही कुछ पोषक से भरपूर बीजों के बारे में।

Table of Contents

शुगर कंट्रोल के लिए आप निम्नलिखित बीजों को अपनी डाइबीटिक डाइट में शामिल कर सकते हैं:

  1. सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seeds)
  2. अलसी के बीज या फ्लैक्स सीड्स (Flax Seeds)
  3. चिया सीड्स (Chia Seeds)
  4. कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स (Pumpkin Seeds)

सबसे पहले बात करते है सनफ्लावर बीज या सूरजमुखी के बीजों के बारे में

सूरजमुखी के बीज या सनफ्लावर सीड्स क्या है?(What is Sunflower Seeds)

सूरजमुखी का बीज (सनफ्लावर सीड्स) सूरजमुखी (हेलियनथस एनुअस) का बीज है। आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले सूरजमुखी के बीज तीन प्रकार के होते हैं: लिनोलिक (सबसे आम), उच्च या हाई ओलिक और सूरजमुखी के तेल के बीज।

सूरजमुखी की फसलें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं। एक जो खाने के लिए उगाया जाता है और दूसरा जिसकी खेती मुख्यतया तेल के लिए की जाती है।

सूरजमुखी के बीजों का स्वाद हल्का व पौष्टिक होता है। साथ ही इसकी बनावट कठोर लेकिन कोमल होती है। स्वाद बढ़ाने के लिए उन्हें अक्सर भून के खाया जाता है। हालाँकि आप उन्हें कच्चा भी खरीद सकते हैं।

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सूरजमुखी के बीज और मधुमेह (Sunflower and Diabetes)

सूरजमुखी कागलीकेमिक इंडेक्स

सूरजमुखी के बीज घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर का एक अच्छा स्रोत हैं, जो डाईबिटीज़ वाले लोगों में शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। इनमें प्लांट प्रोटीन व हेल्दी फैट भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इन बीजों को एक हेल्दी नाश्ते के रूप में लिया जा सकता है।

सूरजमुखी के बीजों में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (पीयूएफए) होते हैं इसलिए उन्हें टाइप-2 डाईबिटीज़ के इलाज के लिए एक प्रभावी उपाय के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यह बीज इंसुलिन संवेदनशीलता या इंसुलिन सेन्सिटिविटी को बढ़ाते हैं जो ब्लड शुगर को काफी कम कर देते हैं।

डाईबिटीज़ के लिए अनुकूल यह बीज विशेष रूप से लोहा, जस्ता, मैंगनीज, तांबा, सेलेनियम और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण मिनरल्स के साथ-साथ सूरजमुखी के बीजों में बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन की उच्च मात्रा होती है जिनमें शामिल है नियासिन, फोलिक एसिड, थियामिन (विटामिन बी1), पाइरिडोक्सिन (विटामिन बी6), पैंटोथेनिक एसिड और राइबोफ्लेविन। इस प्रकार यह सभी पोषक तत्व डाईबिटीज़ पेशेंट में शुगर कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

सूरजमुखी के बीज एक लोकप्रिय हेल्दी स्नैक हैं क्योंकि वे स्वादिष्ट और कुरकुरे होते हैं। हालांकि वे हाई-कैलोरी होते हैं, लेकिन वे पोषक तत्वों, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट का भी एक समृद्ध स्रोत हैं जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। फैटी एसिड सूरजमुखी के बीजों या सनफ्लावर सीड्स में कैलोरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

इसके अलावा, वे विटामिन ई से भरपूर होते हैं, जो एक एंटीऑक्सिडेंट है जो आपके हृदय स्वास्थ्य की रक्षा करता है। चूंकि डाईबिटीज़ में हार्ट प्रॉब्लमस का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए अपनी डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना महत्वपूर्ण है जो इन सभी नुकसान से आपकी सुरक्षा करें।

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सूरजमुखी के बीजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index of Sunflower) 

सनफ्लावर सीड्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 20 यानि कम होता है। इसमें चीनी की मात्रा बहुत कम या नहीं होती है। खाने के साथ लेने पर इसका ग्लाइसेमिक लोड शून्य होता है जिसके परिणामस्वरूप उस भोजन को खाने के बाद ब्लड शुगर में धीमी वृद्धि होती है।

सनफ्लावर सीड्स की न्यूट्रीशनल वेल्यू (Nutritional Value of Sunflower)

सनफ्लावर सीड्स फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल व अन्य प्लांट कम्पाउन्ड से भरपूर होते है। यह डाईबिटीज़ के लिए एक अच्छी डाइट के रूप में शामिल किया जा सकता है। आइए जाने सनफ्लावर सीड्स की न्यूट्रीशनल वेल्यू:

  • कैलोरी: 163
  • कुल वसा: 14 ग्राम (जिसमें शामिल है)
  • संतृप्त वसा: 1.5 ग्राम
  • बहुअसंतृप्त वसा: 9.2 ग्राम
  • मोनोअनसैचुरेटेड फैट: 2.7 ग्राम
  • प्रोटीन: 5.5 ग्राम
  • कार्ब्स: 6.5 ग्राम
  • फाइबर: 3 ग्राम
  • विटामिन ई: RDI का 37%
  • नियासिन: RDI का 10%
  • विटामिन बी6: RDI का 11%
  • फोलेट: RDI का 17%
  • पैंटोथेनिक एसिड: RDI का 20%
  • आयरन: RDI का 6%
  • मैग्नीशियम: RDI का 9%
  • जिंक: RDI का 10%
  • कॉपर: RDI का 26%
  • मैंगनीज: RDI का 30%
  • सेलेनियम: RDI का 32%

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सूरजमुखी बीजों के स्वास्थ लाभ (Health Benefits of Sunflower)

  • इम्यूनिटी बूस्टर
  • कोलेस्ट्रॉल कम करता है
  • सूजन या इनफ्लेमेशन कम करता है
  • त्वचा के लिए अच्छा है
  • दिल की सेहत के लिए अच्छा है
  • ब्रेन फंक्शन को बूस्ट करता है
  • कैंसर के खतरे को कम करता है
  • वजन घटाने में मदद करता है
  • ऊर्जा देता है
  • एनीमिया का इलाज करता है
  • आपके शरीर को डिटॉक्स करता है

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सूरजमुखी बीजों को अपने आहार में शामिल करने के तरीके (Ways to Include Sunflower Seeds in your Diet)

सूरजमुखी के बीज या तो खोल में या छिलके वाली गुठली के रूप में बेचे जाते हैं।

जो शेल के साथ होते हैं उन्हें फोड़कर खाया जाता हैं। इसके शेल को नहीं खाना चाहिए।

छिलके वाले सूरजमुखी के बीज कई तरह से अपनी डाइट में शामिल किये जा सकते हैं। यहाँ विभिन्न तरीके हैं जिनसे आप उन्हें खा सकते हैं:

  • ट्रेल मिक्स में मिलाए।
  • घर में बनी ग्रेनोला बार में मिलाएँ।
  • हरी पत्तेदार सलाद के साथ खाएं।
  • गर्म या ठंडे अनाज के साथ लें।
  • फल या दही के साथ लें।
  • फ्राइज़ में लें।
  • टूना या चिकन सलाद के साथ।
  • भुनी हुई सब्जियों के ऊपर छिड़कें।
  • वेजी बर्गर में डालें।
  • पेस्टो में पाइन नट्स के स्थान पर प्रयोग करें।
  • पुलाव में मिलाएं।
  • बीज को पीसकर मछली के लेप के रूप में उपयोग करें।
  • बेक किए गए सामान, जैसे ब्रेड और मफिन में उपयोग करें।
  • सूरजमुखी के बीज के मक्खन या सनफ्लावर सीड्स बटर में सेब या केला डिप करके खाएं।

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सूरजमुखी के बीजों से होने वाले नुक्सान (Side Effects of Sunflower Seeds)

सूरजमुखी के दुष्प्रभाव

वैसे तो सूरजमुखी के बीज डाइबीटिक लोगों के लिए पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत हैं, लेकिन उनके कुछ साइड-इफ़ेक्ट्स भी हैं। यह साइड-इफ़ेक्ट्स हैं:

अगर अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो सूरजमुखी के बीज उल्टी, पेट दर्द और कब्ज पैदा कर सकते हैं।

सूरजमुखी के बीजों में फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण काई डाइबीटिक पेशेंट इन्हें अच्छे से नहीं पचा पाते।

कुछ लोगों को इससे एलर्जी होती है जिसके वजह से कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे मतली, खुजली, सांस लेने में परेशानी, सूजन और मुंह के आसपास खुजली।

सूरजमुखी के बीज हाई-कैलोरी सीड्स ​​होते हैं, नतीजतन, अधिक खाने से यह मोटापा बढ़ा सकते है।

नमकीन सनफ्लावर सीड्स के ज़्यादा सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता हैं।

सनफ्लावर सीड्स के अलावा एक और बीज हैं जो डाईबिटीज़ के लिए अच्छा माना जाता है। वो बीज हैं अलसी के बीज या फ्लेक्स सीड्स। आइए जानते हैं कैसे फ्लेक्स सीड आपके डाईबिटीज़ को मेनेज करने में मदद करते हैं|

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अलसी के बीज क्या होते हैं ? (What is Flax Seeds?)

सन (Linum usitatissimum) एक फाइबरयुक्त फसल हैं।  फ्लैक्स सीड्स को हिंदी में लिनम यूसिटाटिसिमम, अलसी सीड्स या अगेसे बीजा के नाम से भी जाना जाता है। अलसी अल्फा-लिनोलेनिक एसिड सहित डाइटरी फाइबर और ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अलसी के बीजों में लिग्नान नामक फाइटोएस्ट्रोजेन भी होते हैं, जो हार्मोन एस्ट्रोजन के समान होते हैं। अलसी में फाइबर उसके सीड कोट में पाया जाता है।

प्राचीन मिस्र और चीन में लोग इसे एक फसल के रूप में उगाते थे। एशिया में, हजारों वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

आज अलसी बीज, तेल, पाउडर, गोलियां, कैप्सूल और आटे के रूप में उपलब्ध है। लोग इसे कब्ज, डाईबिटीज़, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, कैंसर और कई अन्य स्थितियों को रोकने के लिए डाइट सप्लीमेंट के रूप में उपयोग करते हैं।

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अलसी बीज और मधुमेह (Flax Seeds and Diabetes)

अलसी बीज के दुष्प्रभाव

टाइप-2 डाईबिटीज़ वाले लोगों में अलसी के बीज या फ्लैक्स सीड बहुत फ़ायदेमंद होते हैं। इनको अपने खाने में शामिल करने से यह आपके ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साबुत या पिसे हुए अलसी को कम से कम 12 सप्ताह तक उपयोग किया जाए तो इसके पूरे लाभ दिखते हैं।

अलसी बीज डाइबीटिक लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को कम करने में काम आते हैं।

डाईबिटीज़ पेशेंट के लिए, शुगर लेवल को नॉर्मल बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। और, इसे प्राप्त करने में फाइबर काफी ज़रूरी है। फ्लैक्स सीड में हाई फाइबर होता है जो इसे निम्न जीआई श्रेणी में लाता है। इसका मतलब है कि कम जीआई होने से यह शरीर में शुगर लेवल को नहीं बढ़ाता।

इसकी वजह है उसमें मौजूद घुलनशील फाइबर। वे भोजन के पाचन में देरी करते हैं और शुगर के अवशोषण को कम करते हैं।

एक अध्ययन में पाया गया कि यदि कुछ लोग प्रतिदिन 10 ग्राम अलसी के पाउडर का सेवन करते हैं टो उनमें फास्टिंग ब्लड शुगर का स्तर 20% तक कम हो जाता है। इसी तरह, एक अन्य अध्ययन में, जिन लोगों ने अपने भोजन के साथ रोजाना 5 ग्राम अलसी का गोंद लिया, उनमें, अलसी नहीं खाने वालों की तुलना में फास्टिंग शुगर में 12 की कमी देखी गई। भले ही अलसी के बीज डाईबिटीज़ के लिए अच्छे माने जाते हैं लेकिन अलसी का तेल उनके लिए स्वास्थ्यवर्धक नहीं है।

अलसी के बीज ओमेगा-3 फैट, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं। साथ ही, अलसी के कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण वह इंसुलिन संवेदनशीलता या इंसुलिन सेन्सिटिविटी में सुधार करते हैं।

इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर को इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो उसके ब्लड में ग्लुकोज़ का स्तर बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए ग्लुकोज़ को कम करने के लिए इंसुलिन की ज़रूरत होती हैं लेकिन डाइबीटिक लोगों में इंसुलिन रेजिसटेन्स हो जाने से वह अपना काम नहीं कर पाता। इस प्रकार यह टाइप-2 डाईबिटीज़ का प्रमुख कारण बनता है। इसलिए अपनी डाइट में डाइबीटिक-फ़्रेंडली फूड को जोड़ने से इंसुलिन सेन्सिटिविटी बधाई जा सकती है जिससे टाइप-2 डाईबिटीज़ के उपचार और रोकथाम में मदद मिल सकती है।

अलसी के बीज में अच्छी मात्रा में लिग्नान होता है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। एंटीऑक्सिडेंट इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने और मधुमेह की प्रगति में देरी करने में मदद करते हैं। अलसी के बीजों में मौजूद लिग्नांस में मुख्य रूप से SDG या secoisolariciresinol diglucoside होता है। अध्ययनों के अनुसार एसडीजी इंसुलिन संवेदनशीलता या इंसुलिन सेन्सिटिविटी में सुधार और टाइप 1 और 2 मधुमेह दोनों की प्रगति में देरी करने में मदद करता है।

इसके बजाय, अलसी के तेल से प्राप्त ALA भी बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता के साथ जुड़ा हुआ है। दरअसल, अधिक वज़न वाले लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि एएलए के पूरक रूप की दैनिक खुराक मिलने के बाद उनमें इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ गई।

अलसी को सप्लीमेंट के रूप में लेने से डाइबीटिक लोगों में इंसुलिन संवेदनशीलता में काफी सुधार आया। इसका तात्पर्य है कि जितनी अधिक खुराक होगी, इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार उतना ही अधिक होगा, और इसलिए हम कह सकते हैं कि अलसी के बीज या फ्लैक्स सीड मधुमेह रोगियों के लिए अच्छे होते हैं।

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अलसी बीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index of Flax Seeds)

हाई फाइबर होने से अलसी को कम ग्लाइसेमिक भोजन माना जाता है। इसका मतलब यह है कि इनका सेवन करने से आपके रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि नहीं होगी और इसके बजाय वे रक्त शर्करा नियंत्रण को बढ़ावा देंगें।

अलसी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) 35 है, जो दर्शाता है कि यह कम जीआई वाला भोजन है।

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अलसी के बीजों में मौजूदा पोषण (Nutritional Value of Flax Seeds)

अलसी के बीज या फ्लैक्स सीड्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो डाइबीटिक लोगों के लिए खासतौर पर एक अच्छी डाइट के रूप मे प्रयोग में लिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देते हैं। फ्लैक्स सीड्स की न्यूट्रीशनल वेल्यू निम्नलिखित है।

बीजों में लगभग 45% तेल, 35% कार्बोहाइड्रेट और 20% प्रोटीन होता है और साथ ही अन्य कई विशेष पोषक तत्व होते हैं। साबुत अलसी के एक बड़े चम्मच (लगभग 10 ग्राम) में शामिल हैं:

  • कैलोरी: 55 ग्राम
  • वसा: 4 ग्राम
  • कार्बोहाइड्रेट: 3 जी
  • फाइबर: 2.8 ग्राम
  • ओमेगा -3 वसा: 2.4 ग्राम
  • प्रोटीन: 1.8 ग्राम

अलसी के बीजों में एक प्लांट बेस्ड कम्पाउन्ड होता है जिसे अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) के रूप में जाना जाता है। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड है।  चूंकि शरीर इसका उत्पादन करने में विफल रहता है इसलिए इसे खाद्य पदार्थों से प्राप्त करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, अलसी में ओमेगा-6 और ओमेगा-3, 0.3:1 के रैशीओ में पाए जाते हैं।

फ्लेक्स बीजों की में कार्ब मुख्य रूप से घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर के रूप में होते हैं। यह डाइबीटिक लोगों के लिए अच्छी फाइबरयुक्त डाइट के रूप में शामिल किया जा सकता है। यह कब्ज को रोकने में मदद करते हुए मल की मात्रा को बढ़ाकर काम करता है।

अंत में, अलसी सोयाबीन की तुलना में अच्छे से पचने वाला, बेहतर प्रोटीन और अमीनो एसिड की काफी मात्रा युक्त होता है।

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अलसी बीजों से होने वाले स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Flax Seeds) 

  • हृदय विकारों में लाभ
  • कुछ कैंसर जैसे स्तन, कोलन, प्रोस्टेट, लिवर, या फेफड़ों के जोखिम को कम करता है
  • एलर्जी में फ़ायदेमंद
  • कब्ज दूर करता है
  • रेडिएशन के खतरे को कम करता है

अलसी बीजों को अपने भोजन में शामिल करने के तरीके (Ways to Include Flax Seeds in your Diet)

अलसी के बीजों को पकाना बहुत ही आसान होता है। लोग साबुत, भूनकर, चूर्ण बनाकर या आटे या तेल के रूप में इसे ले सकते हैं। चूंकि साबुत अलसी के बीजों को पचाना मुश्किल हो सकता है इसलिए तेल के बजाय इसके चूर्ण को लेना ज्यादा सही रहता है।

इसके अलावा इन्हें कई खाद्य उत्पादों जैसे जूस, पके हुए सामान, डेयरी उत्पाद आदि के रूप में भी लिया जा सकता है। साथ ही एक व्यक्ति उन्हें लगभग हर चीज में मिला सकता है। साथ ही इन्हें सॉस या सूप को गाढ़ा करने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। अलसी के बीजों का आनंद लेने का ऐसा ही एक आसान और स्वादिष्ट तरीका है फ्लैक्स सीड क्रेकर्स।

इसे बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की ज़रूरत है:

  • साबुत अलसी का एक बड़ा चम्मच (लगभग 10 ग्राम)।
  • एक कप अलसी के बीज पिसे
  • दो चम्मच सूखी रोज़मेरी
  • दो चम्मच प्याज का पाउडर
  • एक चम्मच लहसुन पाउडर
  • आधा कप पानी
  • चुटकी भर नमक

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बनाने की विधि (How to Make):

सूखे सामानों को एक छोटे कटोरे में मिलाएं। इसके बाद इसके ऊपर पानी डालें और हाथ की सहायता से आटा गूंद कर तैयार कर लें।

आटे को पार्चमेंट पेपर के 2 टुकड़ों के बीच रखें और अच्छी मोटाई देने के लिए इसे बेल लें।

इसके बाद, पार्चमेंट पेपर के शीर्ष भाग को हटा दें। साथ ही आटे को चौकोर टुकड़ों में काट लें। इससे लगभग 30 क्रेकर्स बनते हैं।

आटे को बेकिंग शीट पर रखें। फिर इसे 350°F के तापमान पर 20 से 25 मिनट के लिए बेक करें। इसे ठंडा करके सर्व करें।

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अलसी के बीजों से होने नुक्सान (Side Effects of Flax Seeds)

चिया बीज के नुक्सान

रक्त शर्करा और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को विनियमित करने के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ दवाओं के साथ अलसी के बीज रिएक्ट कर सकते हैं। यह विशेष रूप से अलसी के तेल पर लागू होता है, क्योंकि इसमें ओमेगा -3 की मात्रा अधिक होता है। इसलिए डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें।

ओमेगा -3 में शक्तिशाली एंटीकोगुलेशन गुण होते हैं। इसलिए इन्हें वार्फरिन या एस्पिरिन जैसी थक्कारोधी दवाओं के साथ लेने पर यह इसके प्रभाव को बढ़ा सकता है।

इसके अलावा, ओमेगा -3 की खुराक रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है इसलिए एंटी-डाइबीटिक दवाओं के साथ इसको ज़्यादा लेने से हाइपोग्लाइसिमिया या निम्न रक्त शर्करा की स्थिति पैदा हो जाती है।

साथ ही अलसी को कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं के साथ लेने पर यह उनके प्रभाव को बढ़ा सकता है इसलिए डॉक्टर ज़रूर परामर्श लें।

सनफ्लावर सीड्स व फ्लैक्स सीड्स के डाइबीटिक लोगों के लिए लाभ जानने के बाद हम ऐसे ही एक और बीज के बारे में पढ़ेंगे जो डाईबिटीज़ पेशेंट में शुगर कंट्रोल करने के लिए काफी लोकप्रिय है। यह हैं चिया सीड्स।

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चिया सीड्स क्या है? (What is Chia Seeds?)

चिया के बीज साल्विया हिस्पानिका से मिलने वाले खाने योग्य बीज हैं। यह मध्य और दक्षिणी मेक्सिको के मिंट फॅमिली का एक फूल वाला पौधा है। यह दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका और मैक्सिको के साल्विया कोलम्बेरिया में भी पाया जात है। चिया के बीज काले और सफेद धब्बों के साथ अंडाकार और भूरे रंग के होते हैं, जिनका व्यास लगभग 2 मिलीमीटर होता है।

चिया सीड्स में एंटीऑक्सिडेंट, मिनरल, फाइबर और ओमेगा -3 फैटी एसिड मौजूद होते हैं। यह हार्ट हेल्थ को सुधारते हैं, शुगर लेवल को नियंत्रित करते हैं व साथ ही हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं।

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चिया बीज और मधुमेह (Chia Seeds and Diabetes)

चिया बीज का ग्लिसेमिक इंडेक्स

चिया बीज या चिया सीड्स फाइबर का एक बड़ा स्रोत हैं, जिसके कारण आपके शरीर को इन्हें पचाने के लिए ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके परिणामस्वरूप, आपके अग्न्याशय को इंसुलिन के उत्पादन में वृद्धि नहीं करनी पड़ती है। जब आप उच्च मात्रा में फाइबर वाले भोजन का सेवन करते हैं, तो यह आपके शुगर लेवल्स को स्थिर कर देता है।

यदि आप ज़्यादा कैलोरी वाले खाने के साथ अच्छी फाइबर की मात्र लेते हैं तो यह आपके टाइप-2 डाईबिटीज़ के खतरे को कम कर देता है। कई अध्ययनों के अनुसार चिया के बीज खाने वाले रोगियों में वीडब्ल्यूएफ, एचएस-सीआरपी और ब्लड प्रेशर जैसे स्वास्थ्य मार्करों में सुधार के लक्षण दिखाई देते हैं।

चिया के बीज एंटीऑक्सिडेंट, ओमेगा 3 फैटी एसिड, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं। ये सभी टाइप 2 डाईबिटीज़ और मधुमेह की जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। सूखे चिया बीज का एक औंस (28.35 ग्राम) लगभग 10 ग्राम फाइबर प्रदान करता है। फाइबर-युक्त डाइट आपके शरीर में पाचन को धीमा कर देती है। इससे आपका शरीर ग्लुकोज़ को धीरे-धीरे अवशोषित करता है जिससे ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता।  एक वयस्क को अपनी उम्र और लिंग के आधार पर हर दिन 22.4 और 33.6 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए।

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चिया बीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index of Chia Seeds)

चिया के बीज का जीआई 1 यानि न के बराबर होता है इसलिए यह आपके शुगर लेवल्स पर कोई प्रभाव नहीं डालते। इसलिए यह डाइबीटिक लोगों के लिए एक सुपरफूड है जो बहुत सुरक्षित है। इसे कई प्रकार के खाने में मिला कर भी खाया जा सकता है।

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चिया बीजों में मौजूद पोषक तत्व

चिया सीड्स बहुत ही ज़्यादा पोषण से भरपुर होते हैं। यह डाइबीटिक लोगों के लिए एक सुरक्षित सुपर फूड है। चिया सीड्स में 138 कैलोरी प्रति औंस (28 ग्राम) होती है।

इसमे 6% पानी, 46% कार्बोहाइड्रेट (जिनमें से 83% फाइबर है), 34% वसा और 19% प्रोटीन होता हैं।

चिया सीड्स के 3.5 औंस (100 ग्राम) में निम्नलिखित पोषक तत्व होते हैं:

  • कैलोरी: 486
  • पानी: 6%
  • प्रोटीन: 16.5 ग्राम
  • कार्ब्स: 42.1 ग्राम
  • चीनी: 0 ग्राम
  • फाइबर: 34.4 ग्राम
  • वसा: 30.7 ग्राम
  • संतृप्त: 3.33 ग्राम
  • मोनोअनसैचुरेटेड: 2.31 ग्राम
  • पॉलीअनसेचुरेटेड: 23.67 ग्राम
  • ओमेगा-3: 17.83 ग्राम
  • ओमेगा-6: 5.84 ग्राम
  • ट्रांस: 0.14 ग्राम

चिया बीज ग्लूटेन से मुक्त या ग्लूटेन-फ्री होते हैं।

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चिया सीड्स के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Chia Seeds)

  • वजन घटाने में मदद करता है
  • हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है
  • पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है
  • फ्री रेडिकल्स को दूर करता है जिससे कई गंभीर बीमारियों से बच जा सकता है।
  • दांतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
  • दिल की सेहत के लिए अच्छा है
  • एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

चिया बीजों को अपने भोजन में शामिल करने के तरीके (Ways to include Chia Seeds in your Daily Diet)

  • इसके सभी पोषक तत्वों को पाने के लिए इन्हें भिगो कर या पीस कर खाना चाहिए।
  • इसे मफिन्स, वैफल्स, होममेड ग्रेनोला बार्स और पैनकेक में मिल सकते हैं।
  • इसे सब्जियों, मांस या मछली के साथ मिलाएं
  • इसको जेम में मिला सकते हैं
  • पुडींग में खाएं।
  • दलिया और दही में डालें

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चिया बीज से होने वाले नुक्सान (Side Effects of Chia Seeds)

चिया बीज के नुस्कान

हालांकि चिया सीड्स एक हेल्दी स्नैक हैं लेकिन इस सुपरफूड के साथ भी कुछ साइड-इफ़ेक्ट्स जुड़े हुए हैं। चिया सीड्स के सेवन के कुछ संभावित दुष्प्रभाव हैं:

कई लोगों में ज़्यादा फाइबर खाने से दर्द, कब्ज और सूजन हो सकती है।

बहुत अधिक चिया बीज खाने या सही ढंग से नहीं खाने पर कई पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इन साइड-इफ़ेक्ट्स को कम किया जा सकता है। इसके लिए अपने खाने में धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं व बहुत ज़्यादा पानी पियें।

कुछ लोगों में चिया सीड्स चोकिंग का कारण बन सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें खाना निगलने में परेशानी होती है।

चिया के बीज में अल्फा लिनोलेनिक एसिड (ALA) की अच्छी मात्रा पाई जाती है। कुछ अध्ययन कहते हैं कि अत्यधिक ALA का सेवन प्रोस्टेट कैंसर के रिस्क को बढ़ा सकता है।

हालांकि यह बहुत कम ही देखा गया है लेकिन कुछ लोगों को चिया बीजों से एलर्जी हो सकती है जिसके लक्षण में शामिल है उल्टी, दस्त और होंठ और जीभ की खुजली। इसलिए इन लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए।

डाइबीटिक लोगों में शुगर कंट्रोल करने के लिए एक और बीज का बहुतायत उपयोग किया जाता है वह है कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स। आइए जाने कैसे यह स्वास्थ्यवर्धक बीज डाईबिटीज़ पेशेंट के लिए फ़ायदेमंद है।

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कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स क्या है?( What are Pumpkin Seeds?)

कद्दू के बीज खाने योग्य अंडाकार आकार के चपटे बीज होते हैं जो स्वाद में मीठे और पौष्टिक होते हैं। कद्दू के बीज, जिसे पंपकिन सीड्स के रूप में भी जाना जाता है, कद्दू या स्क्वैश की कुछ अन्य किस्मों का खाने योग्य बीज है। बीज आम तौर पर सपाट और विषम रूप से अंडाकार होते हैं, एक सफेद बाहरी भूसी होती है, और भूसी को हटाने के बाद हल्के हरे रंग के होते हैं। कुछ किस्में भूसी रहित होती हैं, और उन्हें केवल खाने योग्य बीज के लिए उगाई जाती हैं। कद्दू के बीज पोषक तत्व और कैलोरी से भरपूर होते हैं।  विशेष रूप से इनमें वसा (विशेष रूप से लिनोलिक एसिड और ओलिक एसिड), प्रोटीन, डाइटरी फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

कद्दू के बीज और मधुमेह (Pumpkin Seeds & Diabetes)

कद्दू के बीज का ग्लिसेमिक इंडेक्स

ऐसा माना जाता है कि कद्दू के बीज डाईबिटीज़ के लिए अच्छे होते हैं।

शोध के अनुसार, कद्दू के बीज डाइबीटीज़ वाले लोगों को उनके ब्लड शुगर लेवल को मेनेज करने में भी मदद कर सकते हैं। कद्दू के बीज में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, जो आहार में आसानी से नहीं मिलती है। मैग्नीशियम रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे डाईबिटीज़ का खतरा कम होता है।

कद्दू के बीज विटामिन ई और कैरोटीनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार शरीर में इनफ्लेमेशन को कम कर सकता है जो आमतौर पर मधुमेह जैसी कई पुरानी स्थितियों से जुड़ा होता है।

कद्दू के बीज पश्चिमी आहार में मैग्नीशियम के सबसे अच्छे प्राकृतिक स्रोतों में से एक हैं। कद्दू के बीज का एक औंस मैग्नीशियम की अनुशंसित दैनिक मात्रा का 37% प्रदान करता है। शुगर कंट्रोल के लिए आवश्यक कई प्रतिक्रियाओं में मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण भाग होता है। जो लोगअधिक मैग्नीशियम का सेवन करते हैं उनमें टाइप-2 डाईबिटीज़ का रिस्क कम करते हैं।

कद्दू के बीज फाइबर का एक बड़ा स्रोत हैं। अधिक फाइबर डाईबिटीज़ के जोखिम को कम करने के साथ शुगर लेवल्स को कंट्रोल में करते हैं। यह शरीर में ग्लुकोज़ के अवशोषण को धीमा कर देते हैं जिससे शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ते।

ओमेगा -3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड से भरपूर कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स स्वस्थ वसा या हेल्दी फैट प्रदान करते हैं जो टाइप-2 डाईबिटीज़ और हृदय रोग को रोकने में मदद कर सकते हैं।

खाने में जिंक या जस्ता टाइप-2 डाईबिटीज़ के खतरे को कम करता है और ग्लुकोज़ को नियंत्रित करता है। पंपकिन सीड्स में मौजूद जिंक टाइप-2 डाईबिटीज़ को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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कद्दू के बीज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index of Pumpkin Seeds)

कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) 25 के बराबर होता है, जो इसे कम जीआई भोजन बनाता है।

कद्दू के बीजों में मौजूद पोषक तत्व (Nutritional Value of Pumpkin Seeds)

कद्दू के बीज या पंपकिन सीड्स में भरपूर पोषण होता है जो मधुमेह नियंत्रण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों में मदद करते हैं। 30 ग्राम कद्दू के बीज में मौजूद पोषक तत्व निम्नलिखित है:

  • कैलोरी: 170
  • वसा: 13.7 ग्राम
  • प्रोटीन: 7.3 ग्राम
  • फाइबर: 2.1 ग्राम
  • मैग्नीशियम: 81mg
  • पोटेशियम: 246mg
  • जिंक: 1.98mg
  • आयरन: 3.0mg

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कद्दू के स्वास्थ लाभ (Health Benefits of Pumpkin Seeds)

  • दिल के लिए अच्छा है
  • एंटीइंफ्लेमेटरी गुण जो मूत्राशय, आंत्र, यकृत और जोड़ों के बेहतर कार्य को बनाए रखता है।
  • मूत्राशय स्वास्थ्य में सुधार करता है
  • कैंसर के खतरे को कम करता है
  • बेहतर नींद लाने में मदद करता है
  • वजन घटाने में मदद करता है
  • शुक्राणु की गुणवत्ता बढ़ाता है
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
  • हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है
  • तनावमुक्त होने में मदद करता है
  • त्वचा और बालों के लिए अच्छा है
  • गर्भावस्था में अच्छा

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कद्दू बीजों को अपने खाने में शामिल करने के तरीके (Ways to Include Pumpkin Seeds in your daily diet)

कद्दू बीज को अपनी डाइट में शामिल करें

कद्दू के बीज सिर्फ पौष्टिक ही नहीं बल्कि एक लाजवाब स्नैक हैं। आप या तो इसे कद्दू से निकाल सकते हैं या इसे किराने की दुकान से खरीद सकते हैं। कोशिश करें कि इनमें नमक न मिलाएं या फ्लैवर्ड बीज खाने से बचें। यह इसके पोषण को कम कर देता है।

कद्दू के बीज को अपने आहार में शामिल करने के तरीके:

  • इन्हें स्मूदी के साथ मिलाएं
  • इन बीजों को फलों और सलादों पर छिड़कें
  • दलिया, अनाज, दही, या ग्रेनोला में मिलाएं।
  • इन्हें सूप, पास्ता, चिकन आदि में परोसें।
  • केक, कुकीज या ब्रेड बनाते समय इनका इस्तेमाल करें।
  • तले हुए नाश्ते के रूप में खाएं।
  • इन्हें एनर्जी बार, पैनकेक या वैफल्स में मिला सकते हैं।
  • नाश्ते में रोस्टेड पंपकिन बीज खाएं।

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कद्दू के बीजों से होने वाले नुक्सान (Side Effects of Pumpkin Seeds)

कद्दू के बीजों का अधिक सेवन आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और सूजन, पाचन संबंधी समस्याएं, पेट में दर्द, कब्ज आदि पैदा कर सकता है।

इसके अलावा, चूंकि कद्दू के बीज रक्त शर्करा को कम करने में मदद करते हैं, मधुमेह की दवा के साथ इसका अधिक सेवन हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति पैदा कर सकता है।

इसके अलावा, इसकी उच्च कैलोरी से वजन बढ़ सकता है।

हालांकि कद्दू के बीजों से कोई एलर्जी नहीं होती है, लेकिन दुर्लभ मामलों में, वे चकत्ते, सांस लेने में समस्या, खुजली, सिरदर्द आदि जैसी एलर्जी पैदा कर सकते हैं। अगर स्थिति अधिक बिगड़ती है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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निष्कर्ष (Conclusion)

इस प्रकार यह बीज शुगर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। शुगर कंट्रोल करने वाले बीजों में शामिल है सनफ्लावर सीड्स, फ्लैक्स सीड्स, चिया सीड्स व पंपकिन सीड्स। यह सभी बीज अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल व प्लांट कम्पाउन्ड का एक बेहतरीन स्त्रोत है। यह सभी बीज उच्च फाइबर व ऐसे कई पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। यह टाइप-2 डाईबिटीज़ वाले लोगों में शुगर कंट्रोल करने के अलावा कई अन्य स्वास्थ्य परेशानियों को भी कम करने में मदद करते हैं। यह हृदय स्वास्थ्य को अच्छा बनाते हैं, cholesterol को कम करते है, ब्लड प्रेशर सामान्य रखते हैं, पाचन को स्वस्थ रखते हैं व साथ ही कई अन्य लाभ देते हैं। एक सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए इन बीजों को एक सही मात्रा में ज़रूर शामिल करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें, इनके अधिक सेवन से बचें क्योंकि इन बीजों के कई नुकसान भी हो सकते हैं।

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सामान्यतया पूछे जाने वाले प्रश्न:

एक दिन में कितने सनफ्लावर सीड्स खाने चाहिए?

वैसे सही मात्रा में सनफ्लावर सीड्स खाने से बहुत से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं लेकिन यदि इसकी अधिक मात्रा खाई जाए तो यह कई परेशानियाँ पैदा कर सकते हैं और जंक फूड की तरह काम कर सकते हैं। रोज इसकी 30 ग्राम मात्रा लेने से आप इसके पोषण व फ़ायदे उठा सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति रोजाना अलसी का सेवन करता है तो क्या होता है?

अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कई प्रकार की हार्ट प्रॉब्लम के रिस्क को कम किया जा सकता है। साथ ही यह डाईबिटीज़, मोटापे व मेटाबोलिज़्म में सुधार करने में मदद करते हैं।

एक दिन में कितना चिया बीज खाना चाहिए?

एक स्वस्थ खुराक के रूप में 0.7 औंस (20 ग्राम या लगभग 1.5 बड़े चम्मच) चिया बीज प्रति दिन दो बार खाए जा सकते हैं। पाचन संबंधी किसी भी साइड-इफेक्ट से बचने के लिए खूब पानी पियें। चिया के बीज को आसानी से अपने खाने में शामिल किया जा सकता है और वेजीटेरियन लोग इसे अक्सर अंडे के विकल्प के रूप में उपयोग करते हैं। इसे आप दलिया या स्मूदी में मिला कर खा सकते हैं।

क्या कद्दू के बीज टाइप 2 मधुमेह रोगियों के लिए अच्छे हैं?

कद्दू के बीज मैग्नीशियम का एक बेहतर नेचुरल स्रोत हैं जो टाइप-2 डाईबिटीज़ रोगियों में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसमें जिंक भी होता है जो टाइप 2 मधुमेह के खिलाफ बहुत प्रभावी होता है। शोध के अनुसार, जिंक इंसुलिन रिसेप्टर्स को नियंत्रित करता है जो शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर ग्लुकोज़ के अवशोषण को कम करता है जिससे ब्लड में शुगर लेवल जल्दी से नहीं बढ़ता।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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