क्या शुगर रोगी मक्के का सेवन कर सकते हैं? शुगर में मक्के की रोटी

Last updated on दिसम्बर 15th, 2023

सर्दियों में मक्के की रोटी व सरसों का साग किसे पसंद नहीं है? लेकिन क्या वह आपके लिए हेल्दी है? खासकर, क्या शुगर रोगी मक्के का सेवन कर सकते हैं? इसका जवाब है, हाँ, मधुमेह वाले व्यक्ति के लिए मक्के का सेवन बिल्कुल सुरक्षित है लेकिन इसकी कुछ शर्तें हैं। मकई या मक्का व्यक्ति के शरीर को ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करता है। साथ ही इसमें सोडियम और फैट बहुत कम होता है। लेकिन डायबिटिक लोगों के लिए अपने रोज़ के कार्ब काउन्ट को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है और इसी के अनुसार आप अपना डाइट प्लान बनाएं। साथ ही, कार्ब्स का नियमित ट्रैक रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह जानने के लिए इस ब्लॉग को पढ़ें “क्या मक्का शुगर रोगियों के लिए सुरक्षित व अच्छा है?

अगर हम स्वीट कॉर्न की बात करें तो इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है लेकिन मक्के खासकर उसके आटे में फाइबर कम व कार्ब ज़्यादा होता है। साथ ही स्वीट कॉर्न मेंअघुलनशील से घुलनशील फाइबर का अच्छा अनुपात होता है। अध्ययनों में यह पाया गया है कि मक्का आंतों में बैक्टीरिया को पनपने देता है जो कोलन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसलिए जहां स्वीट कॉर्न आपके लिए अच्छा होता है, मक्का आपके ब्लड शुगर को थोड़ा बढ़ा सकता है। मक्के में अन्य स्रोतों की तरह ज्यादा फाइबर नहीं होता है। हालांकि, यह आंत के लिए फायदेमंद हो सकता है। फाइबर हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है।

शुगर में मक्का की रोटी खा सकते हैं?

शुगर के मरीजों को अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए अपनी डाइट का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। जहां तक शुगर में मक्के की रोटी खाने का सवाल है, तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों से हम आसानी से समझ सकते हैं कि इसे शुगर के मरीजों को खाना चाहिए नहीं। मक्के में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे- विटामिन A, B, E, आयरन, कॉपर, जिंक, पोटेशिमय आदि। साथ ही मक्के की रोटी में फ्लेवोनोइड्स, फाइबर और स्टार्च भी पाया जाता है, जो शुगर और इंसुलिन की मात्रा को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वहीं सर्दियों में शुगर के मरीजों के लिए मक्के की रोटी इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती है। इन लाभों के अलावा मक्के की रोटी खाने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है। जो शुगर के मरीजों में सबसे आम समस्या होती है।
हालांकि मक्के की रोटी में इन पोषक तत्वों के अलावा कार्बोहाइड्रेट भी होता है, इसलिए शुगर के मरीजों को मक्के की रोटी को संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए।

मक्के की न्यूट्रीशनल वेल्यू

पीले, पके हुए औसत आकार के स्वीट कॉर्न में मौजूद पोषक तत्व निम्नलिखित है:

  • कार्ब्स: 17.1 ग्राम
  • कैलोरी: 77
  • प्रोटीन: 2.9 ग्राम
  • चीनी: 2.9 ग्राम
  • आहार फाइबर: 2.4 ग्राम
  • फाइबर: 2.5 ग्राम
  • वसा: 1.1 ग्राम
  • विटामिन ए
  • विटामिन बी3, बी5, बी6, बी9, बी12
  • विटामिन सी
  • लोहा
  • जस्ता
  • पोटैशियम
  • मैग्नीशियम

मकई दुनिया भर में लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय है। यह किसी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सहायक पोषक तत्वों से भरपूर है। स्वीट कॉर्न या मक्के में मध्यम मात्रा में फाइबर होते हैं। इसमें इनसॉल्यूबल या अघुलनशील फाइबर पाए जाते हैं जिसमें शामिल है लिग्निन, सेल्युलोज, या हेमिसेलुलोज।

मक्के में ल्यूटिन, ज़ेक्सैंथिन और फेरुलिक एसिड जैसे कई एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं। मक्के में प्रमुखतया स्टार्च पाया जाता है। वहीं अगर हम स्वीट कॉर्न की बात करें तो उसमें कम स्टार्च और उच्च चीनी (मुख्य रूप से सुक्रोज) होती है।

मकई में उच्च मात्रा में स्टार्च होता है। यह कार्ब का एक रूप है जो व्यक्ति के ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को तुरंत बढ़ा देता है। मधुमेह रोगियों को मक्की का सेवन मध्यम व सीमित मात्रा में करना चाहिए। प्रोटीन या वसा जैसे अन्य खाद्य पदार्थों के साथ मक्का खाने की सलाह दी जाती है। साथ ही स्वीट कॉर्न में पर्याप्त मात्रा में डायटरी फाइबर होते हैं जो आसानी से शरीर में ग्लुकोज़ लेवल को बढ़ने नहीं देता व शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है। लेकिन मक्के के आटे में यह फाइबर खत्म हो जाता है इसलिए यह इतना सुरक्षित नहीं है।

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क्या मधुमेह वाले लोग मक्का खा सकते हैं?

हां, मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति मक्का खा सकते हैं लेकिन सीमित व एक निर्धारित मात्रा में। अपने दैनिक कार्ब की आवश्यकता के अनुसार आप मक्के को अपने खाने में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने दैनिक कार्ब्स इनटेक का ट्रैक ज़रूर रखें। इसके अतिरिक्त मक्के के आटे से बनी रोटी या दलिया खाते समय भरपूर मात्रा में रेशेदार या फाइबरयुक्त खाने को शामिल करें।

डायबिटीज़ के लिए मक्का थोड़ा विवाद का विषय है। लाभकारी पोषक तत्व प्रदान करने के अलावा, यह ग्लूकोज के स्तर को एक विशेष सीमा तक बढ़ाता है। हालांकि, मकई शरीर को विटामिन, खनिज, फाइबर और ऊर्जा प्रदान करता है। इसलिए अगर मक्के का लाभ प्राप्त करना है तो अपने दैनिक कार्ब पर नजर रखें। इससे यह आपके शुगर लेवल्स को ज़्यादा प्रभावित नहीं करेगा।

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मक्का का ग्लाइसेमिक इंडेक्स

मकई या मक्के का जीआई 52 है जो निम्न जीआई श्रेणी में आता है। मक्के को कई अन्य रूप से भी खाया जाता है तो आइए जाने इसके अलग-अलग रूपों का जीआई क्या है:

पॉपकॉर्न: 65

कॉर्नफ्लेक्स: 81

मकई टॉर्टिला: 46

डायबिटिक व्यक्ति का प्रमुख ध्यान कम जीआई वाले खाद्य पदार्थों पर होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता तो उसके शरीर में शुगर लेवल बढ़ने लगते हैं। ऐसे में अगर आप उच्च जीआई वाले खाने को अपनी डाइट में शामिल करेंगें तो वह तेज़ी से आपके शरीर में शुगर रीलीज़ करेगा जिससे आपकी शुगर लो हो सकती है।

कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे चीनी रिलीज करते हैं इसलिए डायबिटिक लोगों को ऐसे खाने को अपनी डायबीक डाइट में शामिल करना चाहिए। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में उपयोगी है।

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मकई या मक्के का ग्लाइसेमिक लोड

एक मीडियम कॉर्न का ग्लाइसेमिक लोड 15 होता है।

मक्का निम्न जीआई खाद्य उत्पाद के अंतर्गत आता है। मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है क्योंकि यह प्रोटीन, फाइबर, खनिज प्रदान करता है। इसके अलावा इसमें सोडियम और वसा कम होता है। ध्यान रखने योग्य बात है की इसे आप एक सीमित मात्र में, अपनी रोज़ की कार्ब की ज़रूरत के अनुसार शामिल करें। इसमें निम्न से मध्यम कार्ब्स होते हैं जो रक्त शर्करा को बढ़ा सकते हैं।

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मक्का का मधुमेह रोगियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आमतौर पर मधुमेह रोगियों के लिए उच्च फाइबर और कम कार्ब आहार की सलाह दी जाती है। कार्ब युक्त खाद्य पदार्थों का पाचन आसान होता है जो शुगर लेवल को आसानी से बढ़ाता है। वहीं रेशेदार या फाइबर युक्त भोजन का पाचन थोड़ा धीमा होता है। इस प्रकार फाइबरयुक्त खाना खाने से वह कार्ब्स के घुलने में देरी करता है जिससे ग्लूकोज के स्तर में धीरे वृद्धि होती है।

अगर हम भुट्टे की बात करें तो इसमें माध्यम मात्रा में कार्ब्स होते हैं। इस कारण भुट्टे का जीएल मध्यम श्रेणी का है। इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है इसलिए आपकी भूख ज़्यादा देर तक शांत रहती है और इसे खाने से आपका पेट जल्दी भरता है। इस प्रकार आपको कम भूख लगने से आप अपना वैट भी मेनेज कर सकते हैं।

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डायबिटीज़ व मक्का

मक्के का ग्लिसेमिक इंडेक्स

नवीनतम अध्ययनों के अनुसार, मकई या मक्के के नियमित सेवन से शरीर में ग्लूकोज़ के स्तर को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

यह पाया जाता है कि स्वीट कॉर्न और मकई का तेल:

  • इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करता है
  • शरीर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है

और, इस प्रकार मक्का शुगर रोगियों और कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प है।

स्वीट कॉर्न व मक्के में स्टार्च होता है। और, यह घटक पाचन की प्रक्रिया में देरी करता है और इस प्रकार ऊर्जा पैदा करता है। मकई में कुछ फाइटोकेमिकल्स होते हैं। वे शरीर में इंसुलिन के अवशोषण को कम करने में मदद करते हैं। नतीजतन, यह ग्लूकोज स्तर में अचानक वृद्धि और गिरावट को नियंत्रित करता है।

भुट्टे या मक्के का सेवन करने से कई तरह के फायदे मिलते हैं। साथ ही यह हाई-कार्ब होने से शुगर लेवल भी बढ़ सकता है इसलिए इसको अपनी डाइट में शामिल करते समय ध्यान रखें। हर डायबिटिक व्यक्ति एक ही खाने पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है इसलिए आपके लिए व खाना अच्छा है या नहीं इस पर ध्यान दें।

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टाइप 2 डायबिटीज़ के लिए मक्का

मक्का में पॉलीफेनोल्स की उच्चतम मात्रा होती है। यह फलों और सब्जियों में एक एंटीऑक्सिडेंट है जो टाइप 2 डायबिटीज़ के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। मक्के की एक मध्यम मात्रा का सेवन ग्लूकोज और इंसुलिन प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करता है। मकई नियमित रूप से लेने से पाचन में सुधार करने में सहायता मिल सकती है और टाइप 2 डायबिटीज़ के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

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क्या मक्का खाना फायदेमंद है?

एक नवीनतम अध्ययन के अनुसार, फ्लेवोनोइड्स के अधिक सेवन से डायबिटीज़ जैसी पुरानी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, इसके कई अन्य लाभ है:

मक्के में मौजूद स्टार्च की मदद से इंसुलिन और ग्लूकोज प्रतिक्रिया को कम करने में मदद मिलती है।

रोजाना साबुत अनाज मक्के का सेवन करने से पाचन में मदद मिलती है। साथ ही, यह मोटापा और टाइप 2 मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों के विकास के जोखिम को कम कर सकता है।

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डायबिटीज़ में मक्के के सेवन की उचित मात्रा

मक्का एक कटोरी रखा हुआ

डायबिटीज़ वाले लोग एक सीमित मात्रा में मक्के का सेवन कर सकते हैं। यह आपके शुगर लेवल व कार्ब की ज़रूरत के अनुसार निर्धारित की जाती है। हर व्यक्ति में यह मात्रा अलग होती है इसलिए डॉक्टर से परामर्श करके ही मक्के को अपनी डेली डाइट में शामिल करें।

चूंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा और कई खनिज और पोषक तत्व होते हैं इसलिए आप इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसमें एंथोसायनिन होता है, जो गुर्दे की क्षति या लिवर डेमेज के जोखिम को कम कर सकता है। गुर्दे की क्षति आमतौर पर मधुमेह के लोगों में होती है।

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मधुमेह आहार में मकई को शामिल करने के कुछ तरीके

जैसे भारतीय खाने में मक्के की रोटी, मक्के का दलिया, ग्रिल्ड या स्टीम्ड कॉर्न आदि हैं। लोग मक्के के दानों का उपयोग स्टू, सलाद या सूप में भी कर सकते हैं। ये सभी बेहतरीन स्वाद और बनावट जोड़ते हैं। लोग टमाटर और काली बीन्स का उपयोग करके गर्मियों में ग्रिल्ड कॉर्न सलाद भी बना सकते हैं।

इस प्रकार किसी भी शुगर रोगी को मक्के की एक सीमित मात्रा दी जा सकती है। यह इंसुलिन स्तर को नियंत्रित करने के साथ ही कई और हेल्थ बेनेफिट्स देता है। मकई शुगर रोगियों के बीच सबसे प्रचलित स्नैक्स में से एक है। हालांकि इसे अपने खाने में शामिल करने से पहले किसी डायबिटीज़ एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें।

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सामान्यतया पूछे जाने वाले प्रश्न:

क्या स्वीट कॉर्न या मकई का ग्लूकोज स्तर पर कोई प्रभाव पड़ता है?

स्वीट कॉर्न में भारी मात्रा में कार्ब्स होते हैं और प्राकृतिक शर्करा से भरपूर होते हैं। इसके अलावा, मकई में उच्च जीआई और मध्यम जीएल होता है। उच्च कार्ब सामग्री और प्राकृतिक शर्करा के बावजूद, स्वीट कॉर्न का रक्त शर्करा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।

क्या मधुमेह रोगी मक्के के आटे का सेवन कर सकता है?

अधिक वजन और मधुमेह रोगियों के लिए मकई के आटे का बहुत अधिक सेवन करना सही नहीं है। इसमें फाइबर कम व कार्ब ज़्यादा होता है जो आपके शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। लेकिन अगर आप इसका सेवन करना चाहते हैं तो इसके साथ हाई फाइबर व लो कार्ब खाने को शामिल करें जो आपकी डाइट को बेलेन्स कर दे।

स्वीट कॉर्न खाने के क्या फायदे हैं?

स्वीट कॉर्न के प्रमुख पोषण लाभों में से एक यह है कि यह फाइबर से भरपूर होता है। फाइबर डायबिटीज़ में बहुत हेल्दी घटक है। यह शरीर में ग्लुकोज़ के अवशोषण को धीमा करता है जिससे ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ते। इसके अतिरिक्त फाइबर कई अन्य रूपों में महत्वपूर्ण है जैसे:

● फाइबर पाचन में मदद करता है
● यह हृदय की समस्याओं, स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है
● इसके अलावा, फाइबर टाइप 2 डाईबिटीज़ और आंत्र कैंसर के खतरे को कम करता है
● इसके अलावा फाइबर एक व्यक्ति को लंबे समय तक तृप्त रखता है जिससे उसे जल्दी व ज़्यादा भूख नहीं लगती।

एक दिन में कितना मक्का खाना सुरक्षित है?

मकई या मक्के का उपयोग एक सही सीमा में स्वस्थ, संतुलित आहार के हिस्से के रूप में करना महत्वपूर्ण है। 2,000-कैलोरी डाइट प्लान में 2 ½ कप सब्जियों के सेवन का सुझाव दिया जाता है। साथ ही रोज़ की फाइबर की मात्रा पर अगर ध्यान दें तो एक कप मक्के में डेली लिमिट का 10% फाइबर मिलता है। पर चूंकि किसी खाने का असर अलग-अलग लोगों पर भिन्न होता है इसलिए अपने डॉक्टर से परामर्श कर के ही इसे अपनी डाइट में शामिल करें।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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