शुगर पेशेंट लेग इन्फेक्शन, डायबिटिक फुट के लक्षण, कारण और उपचार – Diabetic Foot in Hindi

Medically Reviewed By DR. HARDIK BAMBHANIA, MBBS, MD , 8 Years of Experience जनवरी 23, 2024

देश और दुनिया में डायबिटीज के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, भारत को डायबिटीज का हब कहा जाता है। डायबिटीज की बीमारी एक क्रॉनिक डिजीज है, जो खराब डाइट, बेकार लाइफस्टाइल (जीवन-शैली), हार्मोन्स में असंतुलन, दिल की बीमारी, स्मोकिंग, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और मोटापे के कारण होती है। इस बीमारी में ब्लड शुगर लेवल घटता-बढ़ता रहता है, जिस कारण हार्ट अटैक, मल्टीपल ऑर्गन फेलियर और ब्रेन स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटिक फुट भी एक ऐसी समस्या जिसका शुगर के मरीजों को सामना करना पड़ता है।

डायबिटिक फुट (लेग) क्या है।

शुगर (मधुमेह) में पैर में दर्द होना एक आम समस्‍या है ज‍िसका इलाज जरूरी है, नहीं तो ये समस्‍या गंभीर रूप ले सकती है। ब्‍लड शुगर कंट्रोल न रहने से नसों तक ब्‍लड पहुंचाने वाली कैपेलरी डैमेज हो जाती हैं ज‍िस कारण पैर में दर्द की समस्‍या हो सकती है। शुगर के मरीजों को पैर में दर्द होने पर मसल्‍स में कमजोरी, जलन का अहसास, यूटीआई के साथ पैर में दर्द आद‍ि लक्षण देखने को म‍िल सकते हैं।

डायबिटीज की बीमारी को लेकर अक्सर एक बात कही जाती है कि यह इंसान को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है, आज हम इस ब्लॉग में बात करेंगे डायबिटिक फुट लेग या डायबिटिक फुट इंफेक्शन के बारे में। अक्सर इस बीमारी के मरीज की नसों में दिक्कतें रहती हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है उसके शरीर में शुगर लेवल बढ़ता है जिसकी वजह से नसों की समस्या शुरू होती है।

मधुमेह के मरीज की नसों में समस्या होती है और इसमें कई नसें वक्त के साथ खराब हो जाती है इसका सीधा असर पैरों पर पड़ता है जिसकी वजह से चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है और पैरों में तेज दर्द होने लगता है।

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शुगर के मरीजों को पैरों में दर्द क्‍यों होता है?

शुगर के कारण ब्लड में बढ़ने वाले ग्लूकोज़ लेवल और ट्राईग्लिसराइड जैसे फैट के हाई लेवल आपकी नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ब्लड में ग्लूकोज़ लेवल बढ़ जाने से उन नसों को भी नुकसान होता है जो हमारे शरीर में ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन की सप्लाई करती हैं। ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन की कमी की वजह हमारे पूरे शरीर की नसों में कमजोरी आ सकती है।

शुगर के मरीज के शरीर में ग्लूकोज का लेवल काफी बढ़ जाता है जिसके कारण तंत्रिकाओं और शरीर में ब्लड ले जाने वाली नसों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता है। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण पैरों में खून और ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है। डायबिटीज के कारण तंत्रिका को हुए नुकसान की वजह से मरीज को पैरों में कुछ भी महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है। इस कारण पैरों में चोट, जख्म या घाव होने पर उन्हें इस बात का एहसास नहीं हो पाता है। नतीजतन, इस चोट, जख्म, कट या घाव के कारण पैरों में इंफेक्शन और अल्सर की समस्या पैदा हो जाती है इसे फुट अल्सर कहा जाता है। डायबिटिक फुट अल्सर अपनी शुरूआती स्टेज में बहुत ही छोटा और सामान्य घाव की तरह होता है लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले सकता है।

शुगर के मरीजों में पैर दर्द का कारण-

  • व‍िटाम‍िन की कमी के कारण शुगर के मरीजों को पैरों में दर्द की श‍िकायत हो सकती है।
  • इंफेक्‍शन के कारण भी डायब‍िटीज में मरीजों को पैरों में दर्द की श‍िकायत हो सकती है।
  • ब्‍लड शुगर लेवल सही न होने के कारण मधुमेह के मरीजों को पैरों में दर्द की श‍िकायत हो सकती है।
  • नसों में सही तरीके से ब्लड फ्लो न होने के कारण शुगर के मरीजों को लेग क्रैम्प की शिकायत हो सकती है।
  • नर्वस डैमेज होने से भी शुगर के मरीजों को लेग क्रैम्प की शिकायत हो सकती है।

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डायबिटिक फुट के लक्षण

डायबिटिक फुट के लक्षण , diabetic foot in hindi ,

डायबिटिक फुट का दर्द शुगर के मरीजों में शुरुआत में धीरे-धीरे शुरू होता है और लापरवाही करने पर यह बढ़ता ही जाता है। शुगर के मरीजों में डायबिटिक फुट के लक्षण का प्रभाव अलग अलग हो सकता है। किसी मरीज में यह ज्यादा होता है और किसी मरीज में कम होता है।

डायबिटिक फुट अल्सर के लक्षणों में आपके

  • पैरों के स्किन के रंग का बदलना।
  • पैरों में सूनापन(सुन्नता) और सनसनाहट होना।
  • पैरों में सेंसटिविटी कम होना।
  • घाव होना।
  • घाव का धीरे धीरे ठीक होना।
  • चलने में पैर दर्द।
  • ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव।
  • पेट से जुडी समस्याएं।
  • पैरों में जलन जैसा महसूस होना।
  • पैरों में सूजन।

आदि शामिल है। अगर आप शुगर पेशेंट(मरीज) हैं और आप में इन सब में से किसी भी तरह के लक्षण है तो इस पर गंभीरता से ध्यान दें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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डायबिटिक फुट अल्सर ट्रीटमेंट (इलाज) – Diabetic Foot Treatment in Hindi

डायबिटिक फुट इंफेक्शन सभी शुगर पेशेंट (मरीजों) में एक जैसा नहीं होता, इसलिए इसका इलाज भी हर मरीज के लिए अलग होता है। डायबिटिक फुट इंफेक्शन कई तरह के होते हैं और इसका इलाज करना बहुत ही जरुरी होता है। दर्द कैसा भी हो उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए किसी भी तरह की लापरवाही आगे गंभीर समस्या बन सकती है।

अपनी डाइट का ध्यान रखें-

अगर आपके पैरों में दर्द हो रहा है तो इसका एक कारण डायब‍िटीज कंट्रोल में न रहना भी हो सकता है, शुगर कंट्रोल करने के तरीके अपनाने के साथ आपके पैरों का दर्द भी दूर हो जाएगा। डायब‍िटीज कंट्रोल करने के ल‍िए आप होल ग्रेन्‍स को अपने डाइट में शाम‍िल करें, आपको फल और सब्‍ज‍ियों को भी डाइट में शाम‍िल करना चाह‍िए इसके अलावा आपको डेयरी प्रोडक्‍ट्स का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाह‍िए।

एक्‍सरसाइज-

शुगर में पैर दर्द की समस्‍या है तो आपको स्‍ट्रेच‍िंग एक्‍सरसाइज करना चाह‍िए। इसके अलावा आप पैरों की मसाज कर सकते हैं इससे भी ब्‍लड फ्लो में सुधार होगा। मसाज करने के ल‍िए आप आराम से बैठ जाएं और पैर की माल‍िश करें। आप क‍िसी भी तेल की मदद से मसाज कर सकते हैं।

विटामिन बी 12 और विटामिन डी का उपयोग-

अगर आपको डायबिटिक फुट की समस्या है तो आपको व‍िटाम‍िन डी और व‍िटाम‍िन बी12 खाना चाह‍िए। नसों को डैमेज होने से बचाने के ल‍िए व‍िटाम‍िन बी12 का सेवन जरूरी है, अगर नसों में कमजोरी है तो व‍िटाम‍िन बी12 का सेवन करें इसके अलावा हड्ड‍ियों के ल‍िए आपको व‍िटाम‍िन डी का सेवन भी करना चाह‍िए। आपको दूध और धूप से व‍िटाम‍िन डी म‍िलेगा और आप डॉक्‍टर की सलाह पर सप्‍लीमेंट भी ले सकते हैं।

खूब पानी पियें-

ड‍िहाड्रेशन की समस्‍या के कारण भी पैर दर्द की समस्‍या हो सकती है। आपको रोज 8 से 10 ग‍िलास पानी पीना चाह‍िए, अगर अचानक पैर में दर्द होने लगे तो पानी के अलावा, नारियल पानी, छाछ, जूस आद‍ि पी सकते हैं। इसके अलावा आप पोटैश‍ियम, कैल्‍श‍ियम, मैग्‍न‍िश‍ियम से भरपूर डाइट लें। फ्लूड इंटेक ठीक करने से ब्‍लड फ्लो बेहतर होगा और दर्द कम हो जाएगा।

पानी में नमक डालकर पैरों की सिकायी करें-

आपको गरम पानी के साथ नमक म‍िलाकर घोल तैयार करना चाह‍िए और उसमें पैर डुबोकर बैठना चाहिए इससे पैरों का दर्द ठीक होगा। नमक के पानी से पैरों में सूजन की समस्‍या भी दूर होती है और दर्द भी कम होता है। पैर दर्द को कम करने के ल‍िए आप पैर में मस्‍टर्ड ऑयल भी लगा सकते हैं। इसके अलावा आप स्‍ट्रेच‍िंग एक्‍सरसाइज भी कर सकते हैं।

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डायबिटिक फुट अल्सर ट्रीटमेंट के कुछ घरेलू उपचार – diabetes foot care in hindi

अदरक के तेल से करें मालिश-

शुगर पेशेंट लेग इंफेक्शन से काफी परेशान हो सकते हैं इस कारण उनके पैरों में काफी ज्यादा जलन हो सकती है। ऐसे में आप अदरक के तेल का इस्तेमाल पैरों पर कर सकते हैं। रोजाना रात में सोने से पहले हाथों में अदरक का तेल लें और इसे अच्छे से पैरों पर मालिश करें। इससे जलन कम होगी, अदरक में एंटीइंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं जो तुरंत राहत दिलाने में मदद करते हैं।

सेब का सिरका-

सेब का सिरका काफी ज्यादा गुणों से भरा हुआ है। सिरका बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन कम करने में मदद करता है। डायबिटिक फुट या फुट अल्सर के लिए यह एकदम परफेक्ट है। सबसे पहले आप गुनगुना पानी लें और उसमें सेब का सिरका मिला लें। अब आराम से 20-25 मिनट उसमें पैर रखें, इससे आपके नसों को आराम मिलेगा और आप रात में आराम से सो सकते हैं।

डायबिटिक फुट इंफेक्शन में इन बातों का खास ध्यान रखें

डायबिटिक फुट इंफेक्शन में इन बातों का खास ध्यान रखें

अगर आप डायबिटिक फुट अल्सर से बचना चाहते हैं तो आपको नियमित रूप से अपने पैरों की खास देखभाल करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की गंभीर समस्या से बचा जा सके।

रोज पैरों की जांच करें-

अगर आप शुगर पेशेंट हैं तो आपको रोज अपने पैरों की जांच करनी चाहिए ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि आपके पैरों में डायबिटिक फुट इंफेक्शन के लक्षण जैसे पैरों में कट, छाले, सूजन या नाख़ून से जुड़ी कोई समस्या तो नहीं है। अगर आपको अपने पैरों में किसी भी प्रकार की समस्या महसूस हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह करना चाहिए।

पैरों की सफाई पर ध्यान दें-

अगर आप डायबिटिक फुट अल्सर से बचना चाहते हैं तो आपको रोज अपने पैरों को गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि पैरों को आराम-आराम से एक सूती कपड़े या स्पंज की मदद से ही साफ करें। पैरों को धोने के बाद उन्हें अच्छे से सुखाएं, पैरों में हमेशा चप्पल या जूता पहनना चाहिए, क्योंकि इससे शुगर पेशेंट लेग इंफेक्शन के खतरे को कम कर सकते हैं। नियमित रूप से अपने पैरों की सफाई करने के साथ-साथ इनकी जांच भी कराते रहें।

मॉस्चराइजर का इस्तेमाल करें-

अपने पैरों को धोने और सुखाने के बाद उनमें मॉस्चराइजर लगाना न भूलें। पैरों को मॉस्चराइज करते समय उँगलियों के बीच की जगह का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि ऐसा न करने से उस स्थान पर फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। मॉस्चराइजर का इस्तेमाल करने से पैरों की त्वचा में खुजली होने या दरारें बनने की संभावना खत्म हो जाती है।

पैरों के नाखून ध्यान से काटें-

अपने पैरों के नाखून को समय-समय पर काटते रहें और उन्हें काटते समय खास ध्यान रखें। नाखूनों को काटकर ज्यादा छोटा नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से त्वचा के नीचे नाखून बनने लगता है। अगर आपके नाखून में किसी प्रकार की कोई समस्या है तो अपने डॉक्टर से बात करें।

साफ और सूखे मोजे का उपयोग करें-

अगर आप डायबिटिक फुट इंफेक्शन से बचना चाहते हैं तो साफ और सूखे मोजों को पहने तथा रोजाना उन्हें बदलें। ऐसे मोजों का इस्तेमाल करें जो थोड़ा मोटे हों क्योंकि एक्स्ट्रा कुशन होने के कारण पैरों की त्वचा में नमी नहीं रहती। हमेशा अपने पैरों के साइज के जूते पहनें। बड़े या छोटे जूते पहनने से बचें। हमेशा जूतों को पहनने से पहले उन्हें अच्छे से साफ कर लें ताकि अगर उनमें पहले से धूल या मिट्टी है तो वह बाहर निकल जाए और आप डायबिटिक फुट अल्सर या फुट अल्सर से बचे रहें।

इन सबके अलावा मधुमेह(शुगर) का खास ख्याल रखें और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें। धूम्रपान करने से बचें, क्योंकि इससे पैरों में ब्लड फ्लो में परेशानी हो सकती है। सबसे खास बात डायबिटिक फुट अल्सर होने पर खुद ही इसका इलाज करने के बजाय डॉक्टर से मिलकर इसकी उचित जांच और इलाज कराना चाहिए।

निष्कर्ष-

डायबिटिक फुट अल्सर का सबसे अच्छा इलाज है अपने शुगर को कंट्रोल में रखना। ऐसा करने से आप खुद को इस फुट अल्सर के घाव के इंफेक्शन से दूर रख पायेंगे और अगर आप इस गंभीर समस्या के शिकार हो गए हैं तो आप जल्द ठीक हो जाएंगे। अपने शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए आप अपने डाइट पर ध्यान दे और शुगर कम करने के लिए उचित डाइट ही ले। इसके अलावा इस बीमारी के लक्षण मिलते हीं आप एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डायबिटीज से पैर क्यों प्रभावित होते हैं?

ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से आपके पैरों की सेंसटिविटी को नुकसान पहुंच सकता है। यह आपके ब्लड फ्लो को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे आपके पैरों में जरूरी ब्लड की कमी हो सकती है। सही ब्लड फ्लो के बिना आपको कटने और घावों के ठीक होने में समस्या हो सकती है और फुट अल्सर होने का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेह के मरीजों को कितनी बार पैरों की जांच करनी चाहिए?

मधुमेह के मरीजों को साल में कम से कम एक बार डॉक्टर या पीडियाट्रिस्ट से अपने पैरों की जांच करानी चाहिए। समस्याओं का जल्दी पता लगाने, फुट अल्सर और अन्य समस्याओं को रोकने के लिए यह जरूरी है।

डायबिटीज में पैरों की देखभाल कैसे करें?

नियमित मेडिकल चेकअप कराएं जिसमें कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर के साथ-साथ पैरों की पूरी जांच शामिल है।
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच के साथ-साथ नियमित रूप से व्यायाम करें और सही डाइट फॉलो करें।

कौन से विटामिन की कमी से पैर में दर्द होता है?

विटामिन बी 12 की कमी आपके मांसपेशियों के टिशूज को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और जरूरी रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पाते हैं, इस कारण मांसपेशियों में ऐंठन, लेग क्रैंप या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं और ये लक्षण पैर दर्द के रूप में आपके सामने आ जाते हैं।

डायबिटिक फुट के दर्द को कम करने के लिए क्या करना चाहिए?

पैर दर्द की समस्या से परेशान हैं तो सरसों के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है यह काफी कारगर घरेलू उपाय है, पैरों के दर्द में सेब का सिरका एप्पल साइडर विनेगर बहुत लाभ देता है। डायबिटिक फुट के दर्द से बचना है तो रोज योग करना चाहिए।

पैरों के तलवा से क्या पता चलता है?

कभी-कभी पैरों के तलवों में जलन महसूस हो सकती है, जो इस बात का संकेत हो सकता है कि हमारे पैर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कुछ गड़बड़ हो सकती है। ऐसा मधुमेह के कारण हो सकता है।

पैर का दर्द तुरंत कैसे कम करें?

पैरों में दर्द से राहत पाने के लिए आप कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते हैं जैसे शरीर को डिहाइड्रेट रखें शरीर में पानी की कमी के कारण भी पैरों में दर्द हो सकता है। अरंडी के तेल से मालिश करें, आइस पैक का उपयोग करें, सेंधा नमक और गुनगुने पानी से पैरों की सिकायी करें।

पैरों में दर्द के लिए क्या खाना चाहिए?

शरीर में आयरन, विटामिन-बी12, विटामिन-डी, इत्यादि जैसे पोषक तत्वों की कमी पैरों में दर्द का प्रमुख कारण है। इसकी कमी को दूर करने के लिए आप दूध, दही, पालक, सेब, अनार, चुकंदर का सेवन कर सकते हैं या सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

क्या शुगर की वजह से पैर में दर्द होता है?

शुगर में समय के साथ कई नसें खराब हो जाती है, जिसका सीधा असर पैरों पर पड़ता है। जिसकी वजह से चलने-फिरने में दिक्कत शुरू होने लगती है और पैरों में तेज दर्द होने लगता है और यह शुगर पेशेंट में लेग इंफेक्शन का कारण बनता है।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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