कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम): CGM in Hindi

Medically Reviewed By DR. MOHAMMAD SULEMAN, Consultant Diabetologist, MBBS नवम्बर 8, 2023

डायबिटीज एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। 77 मिलियन से अधिक डायबिटीज के मरीजों को लेकर, भारत को अक्सर “विश्व की डायबिटीज राजधानी” कहा जाता है। डायबिटीज को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता होती है, क्योंकि ब्लड शुगर के लेवल में उतार-चढ़ाव के चलते स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से असर पड़ सकता है। ब्लड ग्लूकोज की मॉनिटरिंग के पारंपरिक तरीके, जैसे फिंगरस्टिक टेस्ट, किसी के ग्लाइसेमिक स्थिति में केवल थोड़ी बहुत जानकारी प्रदान करते हैं।

वैसे भी कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग जिसे कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग भी कहा जाता है। इसके डिवाइसों ने डायबिटीज को मैनेज करने की दिशा में क्रांति ला दी है, यह वास्तविक समय का डेटा प्रदान करता है। जो व्यक्तियों की डाइट, दवा और उनकी लाइफस्टाइल के बारे में निर्णय या बदलाव लाने में मदद कर सकता है।

नीचे दी गई जानकारी से आपको निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग, इससे मिलने वाले लाभ, यह कैसे काम करता है, भारत में इसकी उपलब्धता और भी बहुत कुछ के बारे में जानने में मदद मिलेगी।

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग क्या है?(CGM Kya Hai)

निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग जिसे अक्सर शॉर्ट फॉर्म में सीजीएम (CGM) के रूप में जाना जाता है, वास्तविक समय में ब्लड शुगर के लेवल को ट्रैक करने के लिए एक शानदार तरीका होता है। पारंपरिक ग्लूकोज मीटरों के विपरीत, जिन्हें समय-समय पर फिंगर स्टिक टेस्ट की आवश्यकता होती है, वो निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस से डेटा प्राप्त कर सकते हैं। जो आमतौर पर हर कुछ मिनटों में अपडेट की जाती है। इस निरंतर मॉनिटरिंग डायबिटीज डिवाइस से मधुमेह रोगियों को उनके ग्लूकोज के उतार-चढ़ाव के बारे में गहरी जानकारी प्राप्त होती है, जिससे उन्हें अपना ट्रीटमेंट कराने में मदद मिलती है।

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कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग कैसे काम करता है?

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस में तीन मुख्य घटक होते हैं: इसमें त्वचा के नीचे डाला गया एक छोटा सेंसर, सेंसर के साथ संचार करने वाला एक ट्रांसमीटर, और ग्लूकोज डेटा दिखाने वाला एक रिसीवर या स्मार्टफोन ऐप होता है। सेंसर ब्लड के बजाय इंटेस्टल फ्लूड (कोशिकाओं के आसपास का तरल पदार्थ) में ग्लूकोज के लेवल को मापता है। यह डेटा वायरलेस तरीके से रिसीवर को भेजा जाता है, जिससे उपयोगकर्ता को उनके ग्लाइसेमिक उतार-चढ़ाव की डिटेल में जानकारी मिलती है।

निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) एक ऐसी टेक्निक है, जिससे डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति दिन हो या रात, किसी भी समय वास्तविक समय में अपने ब्लड शुगर के लेवल को ट्रैक कर सकते हैं। साथ ही CGM कैसे काम करता है, इसकी स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी यहां दी गई है:

स्टेप 1: सेंसर प्लेसमेंट

यह प्रक्रिया इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की त्वचा के ठीक नीचे, एक छोटा सा डिस्पोजेबल सेंसर लगाने से शुरू होती है। इस सेंसर में एक छोटा इलेक्ट्रोड होता है, जो शरीर की कोशिकाओं को कवर वाले इंटेस्टल फ्लूड में ग्लूकोज के लेवल को मापता है। सेंसर आमतौर पर ऊपरी बांह के पेट क्षेत्र या पीठ में लगाया जाता है।

स्टेप 2: सेंसर कैलिब्रेशन

सेंसर प्लेसमेंट के बाद, निर्देशों के अनुसार CGM डिवाइस को कैलिब्रेट करना आवश्यक होता है। कैलिब्रेशन में पारंपरिक ब्लड ग्लूकोज मीटर का उपयोग करके, कुछ फिंगर स्टिक ग्लूकोज माप लेना और इन मूल्यों को CGM डिवाइस में दर्ज करना होता है। कैलिब्रेशन CGM रीडिंग की सटीकता को सुनिश्चित करने में मदद करता है।

स्टेप 3: ग्लूकोज माप

एक बार जब सेंसर अपनी जगह पर स्थापित हो जाता है और कैलिब्रेट हो जाता है, तो यह इंटेस्टल फ्लूड में ग्लूकोज के लेवल को निरंतर मापना शुरू कर देता है। सेंसर तरल पदार्थ में ग्लूकोज कंसंट्रेशन का पता लगाता है, और यह जानकारी CGM डिवाइस को भेजता है।

स्टेप 4: डेटा ट्रांसमिशन

सेंसर एक ट्रांसमीटर से जुड़ा होता है, जो वायरलेस तरीके से ग्लूकोज डेटा को एक रिसीवर या एक स्मार्टफोन ऐप तक भेजता है। कुछ सीजीएम सिस्टम ग्लूकोज डेटा को भेजने के लिए ब्लूटूथ टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे CGM डिवाइस का इस्तेमाल करने वाला शख्स अपने ग्लूकोज डेटा को अपने स्मार्टफोन पर आसानी से देख सकते हैं।

स्टेप 5: डेटा डिस्प्ले और अलर्ट

रिसीवर या स्मार्टफोन ऐप वास्तविक समय में ग्लूकोज डेटा, आमतौर पर रेगुलर ग्लूकोज ग्राफ या चार्ट के रूप में प्रदर्शित करता है। जिसकी मदद से उपयोगकर्ता अपने वर्तमान ग्लूकोज लेवल को देख सकते हैं और कई घंटों तक उतार-चढ़ाव को ट्रैक कर सकते हैं। CGM डिवाइस उच्च और निम्न ग्लूकोज लेवल, दोनों के लिए अलर्ट और अलार्म की तरह काम करता है। गंभीर रूप से ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए तुरंत ट्रीटमेंट लेने के लिए ये अलर्ट काफी महत्वपूर्ण होता है।

स्टेप 6: डेटा विश्लेषण और व्याख्या

इस डिवाइस का इस्तेमाल करके हेल्थ एक्सपर्ट के साथ अपने ग्लूकोज पैटर्न की जानकारी प्राप्त करने के लिए CGM डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट डाइट, एक्सरसाइज, दवा और ब्लड शुगर को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों से संबंधित उतार-चढ़ाव की पहचान कर सकते हैं। यह विश्लेषण बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल को बनाए रखने के लिए इंसुलिन खुराक, डाइट ऑप्शन और लाइफस्टाइल में समय रहते जरूरी बदलाव करने में मदद करता है।

स्टेप 7: सेंसर रिप्लेसमेंट

सीजीएम सेंसर की एक्सपायरी आमतौर पर लिमिटेड होती है, जो ब्रांड और मॉडल के आधार पर आमतौर पर 7 से 14 दिनों तक रहता है। इस अवधि के बाद ग्लूकोज के लेवल की निरंतर मॉनिटरिंग के लिए सेंसर को एक नए सेंसर से बदलने की आवश्यकता होती है।

स्टेप 8: डेटा इकट्ठा करना

कई सीजीएम सिस्टम हिस्टोरिकल ग्लूकोज डेटा इकट्ठा करते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं और हेल्थ एक्सपर्ट को उस निश्चित समय के डेटा की समीक्षा करने में मदद मिलती है। इस हिस्टोरिकल डेटा ट्रीटमेंट प्लान की प्रभावशीलता का आकलन करने और जरूरी बदलाव करने में सहायक हो सकता है।

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कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग के लाभ

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पारंपरिक ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग के बजाय कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग क्यों चुनें?

  1. कंटीन्यूअस समय पर जानकारी: कंटीन्यूअस ग्लूकोज की मॉनिटरिंग दिन और रात के दौरान ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव के बारे में अधिक व्यापक जानकारी प्रदान करता है, जिससे व्यक्तियों को उन पैटर्न का भी पता लगाने में मदद मिलती है, जो पारंपरिक टेस्ट करने पर किसी का ध्यान नहीं जा सकता है।
  2. हाइपो और हाइपरग्लेसेमिया अलर्ट: कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस लो और हाई ब्लड शुगर के लेवल के बारे में वास्तविक समय में अलर्ट कर सकता है, जिससे तुरंत ट्रीटमेंट संबंधी एक्शन लेने में मदद मिल सकती है।
  3. बेहतर A1c लेवल: CGM का इस्तेमाल क्लिनिकल ​​रिसर्च में A1c लेवल में कमी के साथ जुड़ा हुआ है। A1c का लो लेवल बेहतर तरीके से लंबे समय तक ग्लूकोज कंट्रोल का संकेत देता है और डायबिटीज से संबंधित जटिल समस्याओं के कम जोखिम से जुड़ा हुआ है। बेहतर A1c लेवल डायबिटीज वाले व्यक्तियों के लिए एक हेल्दी, अधिक आरामदायक जीवन जीने में योगदान देता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा जीवन जीने में मददगार

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस, बार-बार किए जाने वाले फिंगरस्टिक टेस्ट को कम करके गंभीर हाइपोग्लाइसेमिक घटनाओं के जोखिम को कम कर सकता है। साथ ही डायबिटीज मैनेजमेंट के बोझ को कम करके डायबिटीज वाले लोगों के लिए अच्छा जीवन जीने में मददगार साबित होता है।

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) डिवाइस अपनाने से डायबिटीज वाले व्यक्तियों के जीवन जीने की क्वालिटी में शानदार तरीके से सुधार हुआ है। यहां कुछ प्रमुख तरीके बताए गए हैं, जिनसे सीजीएम डिवाइस ने सकारात्मक प्रभाव डाला है:

  1. चिंता और भय में कमी: सीजीएम डिवाइस ब्लड शुगर के लेवल के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे व्यक्तियों को अपने ग्लाइसेमिक पैटर्न को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। यह जानकारी अचानक से ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से जुड़ी चिंता और भय को कम करता है, खासकर रात के दौरान काफी मददगार होता है। क्योंकि इस डिवाइस से अचानक से ग्लूकोज लेवल के बढ़ने-घटने पर अलर्ट मिलेगा, जिसके चलते खुद में सुरक्षा की भावना बनी रहती है।
  2. फिंगर स्टिक टेस्ट का कम होना: पारंपरिक डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए अक्सर बार-बार फिंगर स्टिक टेस्ट की आवश्यकता होती है, जो दर्दनाक और असुविधाजनक हो सकता है। CGM डिवाइस फिंगर स्टिक टेस्ट की आवश्यकता को काफी कम कर देते हैं क्योंकि वे ग्लूकोज के लेवल की निरंतर मॉनिटरिंग करते हैं। दर्द भरे चुभन से छुटकारा मिलने पर इस डिवाइस से टेस्ट करने में आराम मिलता है और डायबिटीज मैनेजमेंट के शारीरिक नुकसान को कम करता है।
  3. ट्रीटमेंट में बेहतर बदलाव में मददगार: सीजीएम डेटा व्यक्तियों और हेल्थ एक्सपर्ट को इंसुलिन थेरेपी, डाइट प्लान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करने के लिए सटीक जानकारी प्रदान करता है। जिसके चलते जरूरी बदलाव करने में मदद मिलती है और हाइपरग्लाइसीमिया का खतरा कम हो जाता है। ग्लूकोज के घटने-बढ़ने पर तुरंत ट्रीटमेंट करने से ओवरऑल डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  4. बेहतर नींद लेने में मददगार: सीजीएम डिवाइसों के सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है, नींद के दौरान ब्लड शुगर के लेवल को 24/7 मॉनिटर करने की क्षमता, जिससे स्वास्थ्य से जुड़े कई फैसले तुरंत लेने में मदद मिलती है। कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग के चलते व्यक्ति अधिक गहरी नींद लेता है, क्योंकि उसे मालूम है कि जब भी उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक रूप से कम या अधिक होगा, तो उन्हें अलर्ट प्राप्त होगा।
  5. अधिक लचीलापन: सीजीएम डिवाइस डायबिटीज के मैनेजमेंट में अधिक लचीलापन प्रदान करते हैं। उपयोगकर्ता वास्तविक समय के डेटा के आधार पर इंसुलिन खुराक या डाइट ऑप्शन के बारे में मौके पर ही निर्णय ले सकते हैं। यह लचीलापन बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलना और बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल को बनाए रखने को आसान बनाता है।
  6. ओवरऑल हेल्थ के लिए मददगार: CGM के उपयोग से मिलने वाली मन की शांति को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कहा जा सकता। CGM उपयोगकर्ता अपने ब्लड शुगर के लेवल के बारे में निरंतर चिंता करने के बजाय अपने जीवन जीने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इससे ओवरऑल हेल्थ को बनाए रखने में बेहतर महसूस होता है और डायबिटीज मैनेजमेंट से संबंधित तनाव कम होता है।
  7. सशक्त बनाना और टेंशन मुक्त जीवन जीना: सीजीएम डिवाइस डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों को अपने स्वास्थ्य पर कंट्रोल रखने के लिए सशक्त बनाते हैं। जिसके बाद उन्हें ग्लूकोज की मॉनिटरिंग और इंसुलिन में बदलाव के लिए केवल हेल्थ एक्सपर्ट पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही बिना टेंशन वाली जिंदगी के चलते आत्मविश्वास बढ़ता है और मेंटल हेल्थ में सुधार होता है।

सब मिला-जुलाकर कहा जाए तो कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) डिवाइसों ने वास्तविक समय में ग्लूकोज डेटा प्रदान करके, बार-बार फिंगरस्टिक की आवश्यकता को कम किया है। साथ ही बेहतर लचीलापन और मन की शांति प्रदान करके डायबिटीज मैनेजमेंट में क्रांति ला दी है। इस टेक्निक ने न केवल ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार किया है, बल्कि डायबिटीज वाले व्यक्तियों के लिए जीवन की बेहतर क्वालिटी जीने में भी योगदान दिया है, जिससे उन्हें अपनी स्थिति को प्रभावी ढंग से मैनेज करते हुए अधिक आत्मविश्वास और आराम से रहने में मदद मिलती है।

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भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस की उपलब्धता

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस पिछले कुछ वर्षों में भारत में काफी पॉपुलर हुआ है। डेक्सकॉम, एबॉट और मेडट्रॉनिक जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने खूब निर्माण किया है। जोकि भारतीय बाजार में भी उपलब्ध हैं। कुछ घरेलू कंपनियों ने भी भारतीय डायबिटीज के मरीजों के लिए पॉकेट-फ्रेंडली दामों में उपलब्ध करा रही हैं।

भारत में लोकप्रिय कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग ब्रांड

हाल के वर्षों में कई पॉपुलर निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) ब्रांडों ने अपने डिवाइस भारतीय बाजार में उपलब्ध करा दिए हैं। इन ब्रांडों ने अपनी सटीकता, विश्वसनीयता और यूजर-फ्रेंडली सुविधाओं के लिए पहचान हासिल की है। यहां भारत में उपलब्ध कुछ लोकप्रिय सीजीएम ब्रांड हैं:

  1. डेक्सकॉम: डेक्सकॉम जी6 व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस अपनी सटीकता और यूजर-फ्रेंडली होने के लिए जाना जाता है। यह भारत में विभिन्न डिस्ट्रीब्युटर्स और फार्मेसियों के माध्यम से उपलब्ध है।
  2. एबॉट फ्रीस्टाइल लिब्रे: एबॉट का फ्रीस्टाइल लिब्रे भारत में एक और पॉपुलर CGM डिवाइस है। यह अपने फ्लैश ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ सुविधा प्रदान करता है, जो रेगुलर फिंगर स्टिक टेस्टों की आवश्यकता को समाप्त करता है।
  3. मेडट्रॉनिक गार्जियन कनेक्ट: मेडट्रॉनिक गार्जियन कनेक्ट कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम स्मार्टफोन के साथ आता है और आपकी उंगलियों पर निरंतर ग्लूकोज डेटा प्रदान करता है।
  4. एवरसेंस: एवरसेंस एक घरेलू ब्रांड है, जो भारतीय बाजार के अनुरूप सीजीएम सॉल्यूशन प्रदान करता है।  एवरसेंस के CGM डिवाइस सटीक जानकारी प्रदान करने और किफायती दामों में बेचने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
  5. शुगरबीट: शुगरबीट भारत में उपलब्ध एक और सीजीएम ऑप्शन है। यह एक नॉन-डिफेंसिव, पहनने योग्य सेंसर प्रदान करता है, जो त्वचा के माध्यम से ग्लूकोज के लेवल को माप सकता है, जिससे सेंसर डालने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
  6. ग्लूकोआरएक्स: ग्लूकोआरएक्स भारत में किफायती दाम में सीजीएम सॉल्यूशन की सुविधा देने के लिए जाना जाता है। ग्लूकोआरएक्स के डिवाइस डायबिटीज से पीड़ित उन व्यक्तियों के लिए भी काफी सरल है, जो दूर दराज इलाकों में रहते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि स्पेशल कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग ब्रांड और मॉडल की उपलब्धता भारत के क्षेत्रों के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इसके अलावा सीजीएम टेक्नोलॉजी में तेजी से सटीक जानकारी और यूजर एक्सपीरियंस में नए इनोवेशन और सुधार जारी है।

इसलिए सीजीएम में रुचि रखने वाले व्यक्तियों को इसकी लागत, मौजूदा डिवाइसों के साथ मिलने वाले फीचर्स, और सेंसर के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। इतना ही नहीं यह पहनने में कितना आरामदायक है, इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस: लागत और इसकी पहुंच

क्या भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण किफायती हैं?

भारत में निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस ब्रांड और उनके द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। आम तौर पर कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग स्टार्टर किट, जिसमें सेंसर, ट्रांसमीटर और रिसीवर शामिल होते हैं, 10,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये या अधिक तक हो सकते हैं। हालांकि हर 7 से 14 दिनों में बदलने के लिए जरूरी सेंसर के खरीदने पर भी विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि आपको एक निश्चित समय के बाद सेंसर बदलना जरूरी होता है।

भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस के लिए बीमा कवरेज

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस के लिए भारत में बीमा कवर उपलब्ध है, लेकिन इसके कुछ लिमिट हो सकते हैं। व्यक्तियों को यह निर्धारित करने के लिए अपने बीमा एजेंटों से जांच करने की सलाह दी जाती है, कि कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग खर्च उनकी पॉलिसियों के अंतर्गत कवर किए जाते हैं या नहीं।

सरकारी पहल और सब्सिडी

कुछ मामलों में सरकार द्वारा सब्सिडी या फाइनेंशियल हेल्प का ऑफर दिया जा सकता है। निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास पैसे संबंधी समस्याएं हैं। ये प्रोग्राम राज्य के अनुसार अलग-अलग होते हैं, और व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर पूछताछ करनी चाहिए।

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भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डायबिटीज को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के लिए इस परिवर्तनकारी टेक्नीक को अपनाने वाले व्यक्तियों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। साथ ही भारत में लोगों के बीच इस डिवाइस को आकर्षण भी प्राप्त हुआ है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस अपनाने के मामले में पिछले दो वर्षों में 40% से अधिक की वृद्धि हुई है। देश भर में 100,000 से अधिक उपयोगकर्ता हैं। इस वृद्धि का श्रेय सीजीएम के लाभों के बारे में बढ़ती जागरूकता को दिया जा सकता है, जैसे बेहतर ग्लाइसेमिक नियंत्रण और गंभीर हाइपोग्लाइसेमिक घटनाओं का जोखिम कम होना।

इसके अलावा भारतीय बाजार में सीजीएम ब्रांडों और मॉडलों की, एक लंबी चेन होने के चलते लोगों तक आसानी से पहुंचने में मददगार साबित हुई है, जिससे अनगिनत व्यक्तियों को वास्तविक समय में ग्लूकोज डेटा के साथ अपने शुगर को कंट्रोल में रखने में आसानी हुई है।

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भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग का महत्व

डायबिटीज को मैनेज करने के मामले में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम) के महत्व को कम करके आंका नहीं जा सकता है। सीजीएम डिवाइस बल्ड ग्लूकोज के लेवल के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करते हैं, और यह डेटा कई स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने में मदद करता है:

  1. बेहतरीन ग्लाइसेमिक कंट्रोल: सीजीएम डायबिटीज से पीड़ित लोगों को उनके ब्लड शुगर के रुझान की बारीकी से मॉनिटरिंग करने की अनुमति देता है, जिससे उन्हें अपने ट्रीटमेंट प्लान में समय पर बदलाव करने में मदद मिलती है। इससे बेहतर तरीके से ग्लाइसेमिक कंट्रोल होता है, जो अचानक से आने वाली जटिल समस्याओं (हाइपोग्लाइसीमिया और हाइपरग्लेसेमिया) और लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्याओं (जैसे हृदय रोग, किडनी की समस्याएं और न्यूरोपैथी) दोनों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
  2. उतार-चढ़ाव का तत्काल पता लगाना: सीजीएम डिवाइस लगातार डेटा प्रदान करते हैं, जिसका मतलब है कि उपयोगकर्ता अपने ग्लूकोज लेवल में होने वाले उतार-चढ़ाव का तुरंत पता लगा सकते हैं। यह सुबह उठने के समय और भोजन के बाद वाले शुगर के लेवल की जानकारी इकट्ठा करता है। जिससे व्यक्ति इंसुलिन खुराक, डाइट प्लान और फिजिकल एक्टिविटी को लेकर कोई भी बदलाव संबंधी फैसला लेने में आसानी हो।
  3. हाइपोग्लाइसीमिया और हाइपरग्लेसेमिया अलर्ट: जब ब्लड शुगर का लेवल खतरनाक लेवल तक गिर जाता है तो सीजीएम डिवाइस अलार्म या अलर्ट जारी कर सकते हैं। यह सुविधा गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए एक जीवन रक्षक है, यह सुनिश्चित करती है कि वे अपने ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ने और बेहोशी या दौरे को रोकने के लिए तुरंत स्वास्थ्य संबंधी फैसले ले सकते हैं।
  4. A1c के लेवलों में कमी: क्लिनिकल रिसर्चों से लगातार पता चला है कि CGM डिवाइसों के उपयोग से A1c लेवलों में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है। A1c का निम्न लेवल डायबिटीज-संबंधी जटिलताओं के कम जोखिम से जुड़ा है, जो CGM उपयोग के लंबे समय तक बने रहने वाले लाभों के बारे में बताता है।
  5. जीवन जीने की क्वालिटी में सुधार: सीजीएम तकनीक बार-बार फिंगरस्टिक टेस्टों की आवश्यकता को कम करती है, जिससे डायबिटीज वाले व्यक्तियों को अधिक सुविधा और कम दर्द होता है। यह अप्रत्याशित ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव से जुड़ी चिंता को भी कम करता है, जिससे आराम और चिंतामुक्त जीवन जीने में मदद मिलती है।
  6. पर्सनल डायबिटीज मैनेजमेंट: हेल्थ एक्सपर्ट सीजीएम डेटा के साथ पर्सनल जरूरतों के लिए ट्रीटमेंट प्लान को तैयार कर सकते हैं। वे सटीक इंसुलिन खुराक के सुझावों और बदलावों के लिए डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं। जिससे किसी भी व्यक्ति के डायबिटीज को मैनेज करने में हेल्थ एकस्पर्ट को मदद मिलती है।
  7. मन की शांति: सीजीएम डायबिटीज वाले व्यक्तियों और उनकी देखभाल करने वालों दोनों लोगों को मानसिक शांति प्रदान करता है। क्योंकि उन्हें पता है कि उनके पास ब्लड शुगर के लेवल के बारे में लगातार, वास्तविक समय की जानकारी मिलती रहती है। जिससे वे चिंता और भय दोनों रूप से मुक्त रहते हैं, खासकर डायबिटीज वाले बच्चों के माता-पिता के लिए यह ज्यादा मददगार साबित होता है।

ऊपर बताए गए सभी जानकारियों से आप समझ गए होंगे कि सीजीएम डायबिटीज मैनेजमेंट में एक गेम-चेंजर है। यह व्यक्तियों को अपने स्वास्थ्य पर एक्टिव रहते हुए कंट्रोल रखने, जटिल समस्याओं के जोखिम को कम करने और बेहतरीन जीवन जीने में मददगार साबित होता है। इसका महत्व कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग की सुविधा और महत्वपूर्ण ग्लूकोज में होने वाले उतार-चढ़ाव का पता लगाने वाली डिवाइस को जाता है। जैसे-जैसे टेक्नॉलजी आगे बढ़ रही है, सीजीएम डिवाइस और भी अधिक सुलभ और सटीक रिजल्ट देने की संभावना है, जिससे डायबिटीज से पीड़ित लोगों को और अधिक लाभ होगा।

निष्कर्ष

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग ने भारत में डायबिटीज मैनेजमेंट करने का तरीका ही बदल गया है। वास्तविक समय में डेटा प्रदान करने की अपनी क्षमता के साथ, निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों को अपने स्वास्थ्य पर कंट्रोल रखने के लिए काफी मददगार साबित हुआ है। जैसे-जैसे टेक्नॉलजी आगे बढ़ रही है, सीजीएम डिवाइस में और बदलावों के साथ बेहतर परिणाम देने की संभावना भी बढ़ रही है। जिससे तय है कि समय के साथ डायबिटीज से पीड़ित लोगों को और अधिक लाभ मिलेगा।

और पढ़े : ट्राइग्लिसराइड्स सामान्य स्तर, उच्च स्तर के जोखिम, कारण और रोकथाम। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग का किसको लाभ मिल सकता है?

निरंतर ग्लूकोज की मॉनिटरिंग डायबिटीज वाले व्यक्तियों के लिए बेस्ट है, चाहे उनके डायबिटीज का प्रकार कुछ भी हो (टाइप 1, टाइप 2, जेस्टेशनल डायबिटीज)। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्हें वाकई में ग्लाइसेमिक कंट्रोल की आवश्यकता होती है, जिन्हें बार-बार हाइपोग्लाइसेमिक एपिसोड होते हैं, या जो अपने ग्लूकोज पैटर्न को बेहतर ढंग से समझना चाहते हैं।

क्या कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग दर्दनाक होता है?

सीजीएम सेंसर आमतौर पर फिंगरस्टिक टेस्ट के दर्द जैसा ही होता है, जिसमें ज्यादा दर्द नहीं होता है।

कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस कितना सटीक जानकारी देता है?

निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस अत्यधिक सटीक हैं, अधिकांश वास्तविक ब्लड शुगर के लेवल के 10-15% के भीतर रीडिंग प्रदान करते हैं। हालांकि सटीकता बनाए रखने के लिए कंपनियों के बताए गए निर्देशों और सुझावों के अनुसार डिवाइस को कैलिब्रेट करना आवश्यक होता है।

क्या सीजीएम फिंगर स्टिक टेस्ट की जगह ले सकता है?

सीजीएम बार-बार फिंगरस्टिक टेस्टों की आवश्यकता को कम करता है, हालांकि किसी भी तरीके की आशंका होने पर या परिणाम की पुष्टि करने के लिए कभी-कभी फिंगरस्टिक टेस्ट करना आवश्यक है, खासकर किसी भी तरीके का इलाज कराने से पहले जरूरी है।

मैं भारत में सीजीएम के साथ कैसे शुरुआत कर सकता हूं?

भारत में निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग शुरू करने के लिए, डायबिटीज हेल्थ एक्सपर्ट से परामर्श लें। वे सही डिवाइस का इस्तेमाल करके उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं, सेंसर की समझ को लेकर ट्रेनिंग दे सकते हैं, और आपके डायबिटीज मैनेजमेंट को सही दिशा में ले जाने के लिए सीजीएम डेटा की व्याख्या करने में मदद कर सकते हैं।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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