शुगर में नीम के फायदे क्या हैं? – Sugar me Neem ke Fayde

Reviewed By Dietitian Dt. SEEMA GOEL (Senior Dietitian, 25 Years of Experience) फ़रवरी 28, 2024

दुनिया भर में लाखों लोग डायबिटीज से परेशान हैं, ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं, लेकिन शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। शुगर कंट्रोल के लिए कई लोग डॉक्टर की सलाह लेने के अलावा पारंपरिक तरीकों को भी अपनाते हैं। ऐसा ही पारंपरिक तरीकों में नीम का भी काफी इस्तेमाल होता है। नीम शुगर के मेटाबॉलिज्म को सही रखता है, अग्न्याशय को बेहतर बनाता है, और शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। इसलिए, ये डायबिटीज कंट्रोल में मददकरता है। आज हम जानेंगे कि नीम कैसे काम करता है? शुगर में नीम के फायदे क्या हैं और इसका इस्तेमाल कैसे करें?

नीम क्या है और इसका इतिहास? – Neem Kya Hai

नीम (नीम का पेड़) प्राकृतिक इलाज की दुनिया में बहुत बड़ा नाम है। सदियों से औषधीय गुणों के लिए जानी जाने वाली नीम, आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों में अहम भूमिका निभाती है। नीम का वैज्ञानिक नाम अज़ादिरच्टा इंडिका है। ये पेड़ मूल रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। सदियों से अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध, नीम का आयुर्वेद, यूनानी और पारंपरिक चीनी चिकित्सा जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में एक विशेष स्थान है।

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नीम के फायदे क्या हैं? – Neem Khane ke Fayde

नीम के फायदे क्या हैं? - Neem Khane ke Fayde

नीम के पेड़ का लगभग हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें इसकी पत्तियां, छाल, बीज और तेल शामिल हैं। इसे कई तरह की बीमारियों के लिए एक सटीक इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। नीम के कुछ प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

सूजन कम करने के गुण:

नीम में निंबिडिन और निंबिन जैसे तत्व होते हैं जिनमें सूजन कम करने के गुण होते हैं। ये तत्व सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जिससे नीम गठिया, त्वचा संबंधी रोगों और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसी विभिन्न सूजनकारी स्थितियों के लिए एक प्रभावी उपाय बन जाता है।

कीटाणुओं का दुश्मन:

नीम को इसकी रोगाणुरोधी (antimicrobial) खूबियों के लिए जाना जाता है। इसका मतलब है कि नीम कई तरह के कीटाणुओं को मारने या रोकने में मदद करता है। ये खूबियां गेडुनिन और अज़ादिरैक्टिन जैसे तत्वों की वजह से होती हैं। ये तत्व बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी, इन चारों तरह के कीटाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं। यही कारण है कि नीम को संक्रमण से लड़ने और पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए एक प्राकृतिक और बेहद कारगर इलाज माना जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट गुण:

नीम में कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, जैसे क्वेरसेटिन, कैटेचिन और फ्लेवोनॉयड्स। ये एंटीऑक्सिडेंट हमारे शरीर में “फ्री रेडिकल्स” और “ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस” को कम करने में मदद करते हैं। आसान शब्दों में समझें तो फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर में ऐसे नुकसानदेह तत्व होते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस इन फ्री रेडिकल्स की वजह से शरीर में होने वाली परेशानी है। नीम इन दोनों को कम करके हमारी कोशिकाओं और शरीर के टिश्यू को सुरक्षित रखता है। इससे कैंसर, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

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त्वचा का स्वास्थ्य:

नीम का इस्तेमाल सिर्फ बीमारियों को दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। नीम के अर्क वाले कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स बाजार में मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि नीम में कई खास गुण होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और खूबसूरत बनाते हैं। नीम में रोगाणुरोधी (antimicrobial) गुण होते हैं, यानी यह त्वचा पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है, जिससे मुंहासे (acne) की समस्या दूर होती है। साथ ही, नीम में सूजन कम करने वाले गुण (anti-inflammatory) भी होते हैं, जो त्वचा की लालिमा और सूजन को कम करते हैं। इसके अलावा, नीम घाव भरने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा पर घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं।

नीम के ये सारे गुण मिलकर एक्जिमा (eczema), सोरायसिस (psoriasis) जैसी त्वचा की कई समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। साथ ही, नीम की जीवाणुरोधी क्रिया त्वचा पर अतिरिक्त तेल बनने को रोकती है, जिससे मुंहासे होने का खतरा कम हो जाता है। कुल मिलाकर, नीम त्वचा को साफ, स्वस्थ और चमकदार बनाने में काफी मददगार होता है।

दांतों का इलाज:

नीम का इस्तेमाल सदियों से दांतों और मसूड़ों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। ये दांतों को मजबूत रखने और मुंह की बदबू दूर करने में भी मदद करता है। पारंपरिक रूप से लोग नीम की टहनियों को दातुन के रूप में इस्तेमाल करते थे। आजकल बाजार में नीम के अर्क वाला टूथपेस्ट भी मिलता है। ये दोनों ही चीजें मुंह में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती हैं, जिससे दांतों में प्लाक जमने की समस्या कम होती है और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना:

नीम पूरे शरीर की रक्षा करता है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण (immunomodulatory) होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो नीम शरीर की रक्षा करने वाली कोशिकाओं, जिन्हें मैक्रोफेज और लिम्फोसाइट कहते हैं, उन्हें मजबूत बनाता है। इससे शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है और वो जल्दी बीमार नहीं पड़ता।

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डायबिटीज कंट्रोल:

नीम डायबिटीज को मैनेज करने में भी मदद कर सकता है। हाल की स्टडी में पाया गया है कि नीम के पत्तों और छाल से निकाले गए अर्क ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, ये शरीर को इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने में भी मदद करते हैं, जिससे डायबिटीज को कंट्रोल करना आसान हो जाता है। नीम में सूजन कम करने और एंटीऑक्सिडेंट के गुण भी होते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

पाचन में सुधार:

नीम सिर्फ डायबिटीज का ही नहीं, बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है। इसका सेवन करने से खाना सही से पचता है, पेट की जलन कम होती है और पेट दर्द जैसी दिक्कतें भी दूर होती हैं। नीम में हल्के रेचक (laxative) गुण भी होते हैं, जो कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं।

बालों के स्वास्थ्य में फायदा:

अगर आप बालों की समस्याओं से परेशान हैं, तो नीम का तेल आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। ये बालों को पोषण देता है, उनकी जड़ों को मजबूत बनाता है, रूखेपन को कम करता है और बालों को तेजी से बढ़ने में भी मदद करता है। साथ ही, नीम के तेल में एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो स्कैल्प इंफेक्शन को दूर रखने और स्कैल्प को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं।

इस तरह, नीम अपने ढेर सारे औषधीय गुणों के कारण स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसका इस्तेमाल आप कई तरह से कर सकते हैं, चाहे वो त्वचा की समस्या हो, बालों की देखभाल हो या फिर पाचन संबंधी दिक्कतें, नीम हर तरह से आपकी मदद कर सकता है।

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शुगर में नीम के फायदे क्या हैं? – Neem ke Fayde Kya Hai

शुगर में नीम के फायदे क्या हैं? - Neem ke Fayde Kya Hai

नीम अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, और डायबिटीज से जुड़ी कई समस्याओं में ये फायदेमंद साबित हो सकता है।

शुगर लेवल को कंट्रोल करना:

नीम में फ्लेवोनॉयड्स, ट्राइटरपेनॉयड्स और ग्लाइकोसाइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ये तत्व शरीर की इंसुलिन का इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाते हैं, कोशिकाओं द्वारा शुगर को सोखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं, और आंतों में शुगर के अवशोषण को कम करते हैं, जिससे कुल मिलाकर शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार:

शोध बताते हैं कि नीम का अर्क शरीर की इंसुलिन का इस्तेमाल करने की क्षमता को बढ़ा सकता है, जिससे कोशिकाएं शुगर का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं। इससे शरीर को ज्यादा इंसुलिन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध और टाइप 2 डायबिटीज की जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा:

नीम में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर में “फ्री रेडिकल्स” नामक हानिकारक तत्वों को खत्म करते हैं और “ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस” को कम करते हैं। ये दोनों ही चीजें डायबिटीज की जटिलताओं को बढ़ा सकती हैं। नीम इनसे होने वाले नुकसान से कोशिकाओं की रक्षा करता है, जिससे डायबिटीज की जटिलताओं जैसे नसों में कमजोरी (neuropathy), किडनी खराब होना (nephropathy), और आंखों की समस्या (retinopathy) का खतरा कम हो सकता है।

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सूजन कम करने वाले गुण:

डायबिटीज में शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध और डायबिटीज की समस्या गंभीर हो सकती है। नीम में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करके इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बना सकते हैं और डायबिटीज की जटिलताओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

लिवर की रक्षा:

नीम लिवर की रक्षा करता है। चूंकि लिवर शरीर में शुगर के मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन के नियमन में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए डायबिटीज मैनेजमेंट में लिवर का स्वस्थ होना जरूरी है। नीम डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक बीमारियों से होने वाले लिवर के नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है।

किडनी की सेहत का ख्याल:

लंबे समय तक शुगर लेवल बढ़ा रहने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण डायबिटीज में किडनी खराब होने का खतरा (diabetic nephropathy) बढ़ जाता है। नीम के एंटीऑक्सिडेंट और सूजन कम करने वाले गुण किडनी को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं और डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में किडनी की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करना:

नीम रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का काम करता है। इससे शरीर की सूजन कम होती है और डायबिटीज और उसकी जटिलताओं से जुड़ी ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाओं को कम करने में मदद मिलती है।

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घाव भरना:

डायबिटीज होने पर खून का संचार धीमा हो जाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे घाव भरने में भी देरी होती है। नीम में एंटीबैक्टीरियल (रोगाणुरोधी) और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। ये गुण घाव को संक्रमण से बचाते हैं, सूजन कम करते हैं और ऊतकों को तेजी से ठीक होने में मदद करते हैं।

वजन कंट्रोल:

डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए वजन को सही रखना बहुत जरूरी है। नीम पाचन क्रिया को बेहतर बनाकर, भूख कम करके और शरीर में चर्बी को कम करके वजन कम करने में मदद कर सकता है। इससे शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी फायदा मिलता है।

पाचन क्रिया में सुधार:

नीम पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है। ये खाने को सही से पचाने में मदद करता है, पेट की सूजन को कम करता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ाता है। पाचन क्रिया और आंतों का सही से काम करना शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण और शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए बहुत जरूरी है।

नीम शुगर कंट्रोल करने में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। खासकर अगर आप पहले से ही कोई दवाई ले रहे हैं या आपको कोई और बीमारी है।

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डायबिटीज में नीम का सेवन कैसे करें? – Sugar me Neem Kaise Khaye

नीम को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है, जो डायबिटीज से जुड़ी समस्याओं को कम करने में फायदेमंद हो सकते हैं। जैसे-

  1. नीम की पत्तियां: ताजी नीम की पत्तियों को सीधे चबाया जा सकता है या फिर गर्म पानी में उबालकर नीम की चाय बनाई जा सकती है। चाय बनाने के लिए, मुट्ठी भर नीम की पत्तियों को 5-10 मिनट तक पानी में उबालें, फिर छानकर गुनगुना या ठंडा करके पिएं। नीम की चाय का स्वाद कड़वा होता है, इसलिए आप चाहें तो उसमें स्टीविया या शहद जैसी प्राकृतिक मिठास मिला सकते हैं।
  2. नीम का पाउडर: सूखी नीम की पत्तियों को पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है। इस पाउडर को पानी, जूस या स्मूदी में मिलाकर सेवन किया जा सकता है। शुरुआत में कम मात्रा (लगभग 1/4 से 1/2 चम्मच) से शुरू करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं, जितना शरीर सहन कर सके।
  3. नीम कैप्सूल या टेबलेट: नीम के कैप्सूल या टेबलेट हेल्थ फूड स्टोर या ऑनलाइन मिलते हैं। पैकेज पर बताए गए निर्देशों का पालन करें या खुराक और इस्तेमाल के बारे में जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
  4. नीम का तेल: नीम का तेल आमतौर पर त्वचा की समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कम मात्रा में इसका सेवन भी किया जा सकता है। हालांकि, नीम के तेल का स्वाद बहुत तेज होता है और इसके कुछ साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए और बेहतर होगा कि डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें।
  5. नीम की छाल या टहनियां: कुछ संस्कृतियों में दांतों की सफाई और पूरी हेल्थ के लिए नीम की छाल या टहनियों को चबाने की परंपरा है। लेकिन, नीम की छाल का स्वाद बहुत कड़वा होता है, जिसे हर कोई सहन नहीं कर सकता।
  6. नीम सप्लीमेंट्स: बाजार में कई तरह के नीम सप्लीमेंट्स मिलते हैं, जैसे स्टैंडर्डाइज्ड नीम एक्सट्रैक्ट या नीम के साथ अन्य जड़ी-बूटियों का मिश्रण। ये सप्लीमेंट्स इलाज के लिए नीम के सक्रिय तत्वों की अधिक मात्रा देने करने के लिए बनाए जाते हैं। किसी जानी-मानी कंपनी का अच्छा सप्लीमेंट चुनें और पैकेज पर बताई गई मात्रा का ही सेवन करें।

नीम का कोई भी रूप इस्तेमाल करें, तो इसकी मात्रा का ध्यान रखें और अपने शरीर के रिएक्शन को देखें। कुछ लोगों को नीम खाने से पेट की समस्या या एलर्जी हो सकती है, खासकर ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक सेवन करने से। अगर आपको कोई परेशानी हो या नीम के इस्तेमाल को लेकर कोई सवाल हों, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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निष्कर्ष

डायबिटीज को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन ऐसे में नीम एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आता है। नीम में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो डायबिटीज से जुड़ी कई समस्याओं में फायदेमंद हो सकते हैं। ये गुण शुगर लेवल को कंट्रोल करने से लेकर शरीर की रक्षा करने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स प्रदान करने, सूजन को कम करने और डायबिटीज की जटिलताओं को रोकने में मदद करते हैं। अगर आप डॉक्टर की बताई दवाओं के साथ नीम का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे आपकी सेहत बेहतर हो सकती है और डायबिटीज की जटिलताओं का खतरा भी कम हो सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नीम का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

नीम टाइप 1 और टाइप 2 दोनों तरह के डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, इसका असर अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग हो सकता है, जो डायबिटीज की गंभीरता, शरीर की प्रतिक्रिया और व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों या दवा लेने वालों को डॉक्टर से सलाह के बाद ही नीम का सेवन करना चाहिए। साथ ही, शरीर में शुगर लेवल की नियमित जांच करवाना जरूरी है, ताकि नीम के असर और सुरक्षा का पता चल सके।

क्या नीम के सेवन के कोई साइड-इफेक्ट्स होते हैं?

नीम कुछ डायबिटीज की दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकता है, जिससे शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है। इसलिए, डॉक्टर को बताएं कि आप कौन-सी दवाइयां और सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके। वैसे आमतौर पर नीम का सेवन सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने से कुछ लोगों को पेट खराब होना, जी मिचलाना या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर की बताई मात्रा का ही पालन करें और शरीर पर किसी भी तरह का रिएक्शन होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

डायबिटीज में नीम को किन रूपों में इस्तेमाल किया जा सकता है?

नीम को कई रूपों में लिया जा सकता है, जैसे नीम की पत्तियां, नीम का पाउडर, नीम कैप्सूल और नीम की चाय। हर रूप के अपने फायदे हो सकते हैं और इसे चुनने का तरीका आपकी पसंद और उपलब्धता पर निर्भर करता है। नीम की पत्तियों को सीधे चबाया जा सकता है, या पाउडर को खाने, पीने की चीज़ों में मिलाया जा सकता है या कैप्सूल के रूप में लिया जा सकता है। नीम की पत्तियों से बनी चाय भी एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, डायबिटीज के लिए नीम की सही मात्रा और तरीका जानने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूरी है।

डायबिटीज को कंट्रोल करने में नीम कैसे मदद करता है?

नीम में फ्लेवोनॉयड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो इसे डायबिटीज विरोधी (anti-diabetic) बनाते हैं। ये तत्व शरीर की इंसुलिन का इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाते हैं, शुगर लेवल को कम करते हैं, और डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं को कम करते हैं। हालांकि नीम डायबिटीज की दवाओं का विकल्प नहीं है, बल्कि यह सिर्फ सहायक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं के साथ नीम का सेवन किया जा सकता है।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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