डायबिटीज न्यूरोपैथी- शुगर के कारण होने वाली एक गंभीर समस्या

Medically Reviewed By DR. SOUJANYA MANTHRIPRAGADA, MBBS, DNB(Family medicine) दिसम्बर 11, 2023

एक बार जब आपको शुगर हो जाता है तो कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। कुछ बीमारियाँ हल्की होती हैं और आसानी से ठीक हो जाती हैं जबकि कुछ काफी गंभीर होती हैं। ये मरीज के जीवन के लिए घातक भी साबित हो सकते हैं। शुगर के मरीजों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें हार्ट, लीवर और किडनी की बीमारियाँ आम हैं। शुगर टाइप-1 और टाइप-2 वाले लोगों में सबसे आम समस्या का एक और प्रकार डायबिटीज न्यूरोपैथी है। यह हाई-ब्लड शुगर लेवल के कारण होने वाली बीमारी है।

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी क्या है?

शुगर की वजह से नर्व को नुकसान हो सकता है। यह आपके पूरे शरीर की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। तंत्रिकाओं के नुकसान को न्यूरोपैथी कहा जाता है। डायबिटीज न्यूरोपैथी काफी दर्दनाक है और यह कई तरीकों से हो सकती है। यह हर तरह से आपके शरीर में हाई- ब्लड शुगर की वजह से होता है। डायबिटीज न्यूरोपैथी आपके शरीर की किसी भी तंत्रिका को प्रभावित कर सकती है और इसके कई लक्षण नजर आ सकते हैं।

और पढ़े : डायबिटीज और यीस्ट इन्फेक्शन – लक्षण, कारण, उपचार आदि

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के कारण

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के कारण

लंबे समय तक हाई-ब्लड शुगर लेवल की वजह से निश्चित रूप से आपके शरीर की नसों को नुकसान पहुंचता है और यह डायबिटीज न्यूरोपैथी (Diabetes Nueropathy) का कारण भी बनता है। ऐसे अध्ययन हैं जो बताते हैं कि न्यूरोपैथी का शुगर से गहरा संबंध है और उम्र के साथ घटनाएँ बढ़ती हैं। तंत्रिका तंत्र पर ब्लड शुगर का सटीक प्रभाव अभी भी पूरी तरह नहीं पता है। डायबिटीज न्यूरोपैथी के कुछ अन्य कारण भी हैं जिनमें शामिल हैं-

  • हाई-कोलेस्ट्रॉल लेवल के कारण ब्लड वाहिकाओं(वेसल्स) को नुकसान होता है।
  • हाई ब्लड शुगर और लंबे समय से शुगर का होना।
  • ब्लड में फैट का असामान्य लेवल।
  • स्मोकिंग(धूम्रपान) और शराब पीना।
  • मैकेनिकल इंजुरी जैसे कार्पल टनल सिंड्रोम से जुड़ी इंजुरी।

और पढ़े : जानिए मधुमेह प्रबंधन में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का क्या महत्व है?

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के लक्षण

डायबिटीज न्यूरोपैथी में कई लक्षण होते हैं। लक्षण पूरी तरह से न्यूरोपैथी के रूप और प्रभावित होने वाली तंत्रिका के प्रकार पर निर्भर करते हैं।

डायबिटीज न्यूरोपैथी के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं-

  • सुन्न होना
  • दर्द।
  • झुनझुनी।
  • पैरों में जलन होना।
  • जी मिचलाना।
  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन।
  • चलते समय कठिनाई होना।
  • बहुत ज्यादा या बहुत कम पसीना आना।
  • हार्ट रेट बढ़ना।
  • ब्लर विजन।

ज्यादातर मामलों में सबसे पहले पैरों में दिक्कत होती है। इससे आपके पैरों में अत्यधिक तेज दर्द हो सकता है और यह सबसे आम लक्षण है।

और पढ़े : गर्भावस्था में शुगर (गर्भावधि डायबिटीज) के लक्षण, कारण और इलाज

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के प्रकार

डायबिटीज न्यूरोपैथी (Diabetes Nueropathy) चार प्रकार की होती है जो आपके शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है।

पेरीफेरल न्यूरोपैथी-

शुगर संबंधी पेरीफेरल न्यूरोपैथी, न्यूरोपैथी का सबसे आम प्रकार है जो पैरों और टांगों में नर्व खराब होने का कारण बनता है। कभी-कभी इसका असर हाथों और बाहों पर भी पड़ता है, कुछ मामलों में शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि दक्षिण भारतीयों में पेरीफेरल न्यूरोपैथी का खतरा ज्यादा होता है। दक्षिण भारतीय शुगर के 19% से ज्यादा मरीजों में पेरीफेरल न्यूरोपैथी है।

पेरीफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण

  • मांसपेशियों में कमजोरी।
  • रिफ्लेक्स में कमी।
  • झुनझुनी और जलन।
  • को-ऑर्डिनेशन (समन्वय) की कमी।
  • क्रैंप (ऐंठन)।
  • पैर के जोड़ों में अल्सर, संक्रमण और तेज दर्द।
  • दर्द या सुन्नता महसूस होना।

प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी-

यह आपके पैरों जांघों और कूल्हों की नसों को प्रभावित करती है। यह स्थिति टाइप-2 शुगर वाले लोगों और अधिक उम्र के वयस्कों में ज्यादा होती है। इस न्यूरोपैथी के लक्षण शरीर के एक तरफ होते हैं। प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी के बहुत से मरीजों में समय के साथ सुधार होता है। पूरी तरह से ठीक होने से पहले उनके लक्षण बहुत खराब स्थिति में चले जाते हैं।

प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी के लक्षण

  • कूल्हों और जांघों में अचानक तेज दर्द होना।
  • वजन घटना।
  • जांघ की कमजोर मांसपेशियाँ।
  • पेट में सूजन।
  • बैठ कर खड़े होने में कठिनाई होना।

ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी-

ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी उन नसों को नुकसान पहुंचाती है जो आपके शरीर के अंदर के अंगों को जोड़ती हैं। इस कारण आपके पाचन तंत्र, हेल्दी हार्ट, ब्लडप्रेशर, यौन अंगों, यूरिन ब्लैडर, आंखों और हाई-ब्लड शुगर लेवल (हाइपरग्लेसेमिया) में समस्याएं हो सकती हैं। ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी बहुत खतरनाक है और इसके कारण 25% से 50% शुगर के मरीजों की मृत्यु हो जाती है। ऐसा ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी के पता चलने के 5 से 10 वर्षों के अंदर होता है।

ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी के लक्षण

  • ब्लैडर की समस्या।
  • पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन।
  • खाने में समस्या।
  • अनियमित शरीर का तापमान।
  • महिलाओं में वैजनल ड्राइनेस (योनि का सूखापन)।
  • कब्ज, दस्त या दोनों होना।
  • ब्लडप्रेशर में तेजी से कमी आना।

फोकल न्यूरोपैथी-

मोनोन्यूरोपैथी फोकल न्यूरोपैथी का दूसरा नाम है। फोकल न्यूरोपैथी में केवल एक नर्व(तंत्रिका) खराब होती है। आपके सिर, पैर, हाथ या धड़ की नस खराब हो सकती है। फोकल न्यूरोपैथी बहुत दर्दनाक होती है। फोकल न्यूरोपैथी एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाती है और कोई लंबे समय का नुकसान नहीं करती।

फोकल न्यूरोपैथी के लक्षण

  • आंखों की समस्या।
  • पेट में दर्द।
  • डबल विजन।
  • पेल्विस या पीठ के निचले हिस्से में दर्द।
  • पैर में दर्द।
  • फेस पैरालिसिस।

और पढ़े : हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण, कारण और उपचार

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के रिस्क फैक्टर (जोखिम कारक)

शुगर टाइप-1 या टाइप-2 दोनों के मरीजों में न्यूरोपैथी होने का खतरा होता है।

कुछ रिस्क फैक्टर हैं जो न्यूरोपैथी के लिए ज्यादा जिम्मेदार होते हैं-

  1. वजन ज्यादा होना– जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 24 से ज्यादा है उन्हें डायबिटीज न्यूरोपैथी (Diabetes Nueropathy) होने का खतरा होता है।
  2. स्मोकिंग (धूम्रपान)धूम्रपान स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं का कारण बनता है। उनमें से एक है आपके पैरों(लेग) और टांगों(फीट) में ब्लड फ्लो का प्रभावित होना। धूम्रपान आपकी आर्टरीज को नैरो और हार्ड(कठोर) बना देता है। इससे आपके शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है।
  3. लंबे समय तक शुगर रहना– जब आपको लंबे समय तक शुगर होता है तो आपको डायबिटीज न्यूरोपैथी का खतरा अधिक होता है।
  4. किडनी की समस्या– शुगर के मरीज अक्सर किडनी की समस्या से परेशान होते हैं। यह आपके शरीर में टॉक्सिन लेवल को बढ़ाता है जिस कारण नर्व डैमेज होती है।
  5. खराब ब्लड ग्लूकोज लेवल– लो या हाई ब्लड ग्लूकोज लेवल नर्व डैमेज(तंत्रिका क्षति) जैसी कई स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का कारण बनता है।

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के कारण होने वाली परेशानियाँ 

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के कारण होने वाली परेशानियाँ 

यदि आपको डायबिटीज न्यूरोपैथी है तो आपमें बाद में कई गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं जिनमें शामिल हैं-

  1. हाइपोग्लाइसीमिया– डायबिटीज न्यूरोपैथी हाइपोग्लाइसीमिया(लो-ब्लड शुगर) का कारण बन सकती है। 70 मिलीग्राम/डीएल से नीचे का ब्लड शुगर लेवल कंपकंपी, दिल की तेज़ धड़कन और पसीने का कारण बन सकता है।
  2. यूरिन इंफेक्शन– ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी आपके ब्लैडर में नर्व डैमेज (तंत्रिका क्षति) का कारण बनती है। जिससे आपका ब्लैडर पूरी तरह से यूरिन-फ्री नहीं हो पाता, आपके ब्लैडर और किडनी में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जिससे यूरिन इंफेक्शन होता है।
  3. पैर की अंगुली या पैर का संक्रमण– नर्व डैमेज गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है खासकर आपके पैरों में। इस प्रकार के संक्रमण आपकी हड्डियों तक पहुंच सकता है या डेड टिश्यू का कारण बन सकता है इसलिए ऐसे मामले में पैर की अंगुली, या पैर को काटकर अलग किया जा सकता है।
  4. ब्लडप्रेशर में कमी– शुगर संबंधी न्यूरोपैथी आपके हार्ट आर्टरीज को प्रभावित करती है। यह आपके शरीर में ब्लड फ्लो को बाधित करता है। इससे ब्लड फ्लो को कंट्रोल करने वाली अन्य नसों को नुकसान हो सकता है और यह आपके शरीर की ब्लड प्रेशर एडजस्ट करने की क्षमता को प्रभावित करता है। ब्लडप्रेशर में गिरावट के कारण आपको चक्कर आ सकते हैं।
  5. पाचन की समस्याएं– डायबिटीज न्यूरोपैथी आपके पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इस प्रकार आपको दस्त या कब्ज का अनुभव हो सकता है। कभी-कभी गैस्ट्रोपेरेसिस भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपका पेट खाली नहीं होता या बहुत धीमी गति से खाली होता है। इससे अपच या सूजन हो सकती है।
  6. यौन रोग– महिलाओं को उत्तेजना और वैजिनल लुब्रिकेशन में कठिनाई महसूस हो सकती है। पुरुषों को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है। ऐसा तब होता है जब न्यूरोपैथी यौन अंगों को प्रभावित करने वाली नसों को नुकसान पहुंचाती है।
  7. पसीना बढ़ना या कम होना– नर्व डैमेज आपकी पसीने की ग्रंथियों को भी प्रभावित करती है। इससे आपके शरीर के लिए तापमान को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए मरीजों को बहुत अधिक या कम पसीना आने का अनुभव हो सकता है।

 और पढ़े : अपने अग्न्याशय को स्वाभाविक रूप से उत्तेजित करें।

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी का निदान

व्यक्तियों की शारीरिक जांच और लक्षण से डायबिटीज न्यूरोपैथी का पता चलता है। शारीरिक परीक्षण में मरीजों के पैरों की जांच शामिल है। आपके डॉक्टर हार्ट बीट रेट, ब्लडप्रेशर, रिफ्लेक्स, स्ट्रेंथ और सेंसटिविटी की जांच की सिफारिश कर सकता है।

कुछ अन्य परीक्षण जो डॉक्टर शुगर संबंधी न्यूरोपैथी का पता लगाने के लिए कह सकते हैं, वे हैं-

  • नर्व कंडक्शन स्ट्डीज (तंत्रिका चालन अध्ययन)
  • क्वांटिटेटिव सेंसर टेस्टिंग(मात्रात्मक संवेदी परीक्षण)
  • एमजी (इलेक्ट्रोमोग्राफी)
  • बायोप्सी
  • अल्ट्रासाउंड

डायबिटीज न्यूरोपैथी में पैरों की देखभाल का महत्व

शुगर के मरीजों के पैर कमजोर होते हैं इसलिए पैरों की देखभाल और सामान्य त्वचा की देखभाल बहुत जरूरी है। सुन्न हो जाना डायबिटीज न्यूरोपैथी के लक्षणों में से एक है। इसलिए कई बार मरीज कटने, छाले, सूजन, फटी त्वचा और ड्राई स्किन को पहचान नहीं पाता है। इससे पैर में गंभीर संक्रमण हो सकता है जिस कारण पैर काटना पड़ सकता है। पैरों की समस्याओं से बचने के लिए आप इन दिशानिर्देशों का पालन कर सकते हैं-

  • अपने पैरों को रोजाना मॉइस्चराइज़ करें।
  • अपने पैर साफ रखें।
  • कॉर्न्स और कैलस का उपचार स्वयं न करें।
  • हमेशा सूखे और साफ मोज़े पहनें।
  • प्रतिदिन अपने पैरों की जांच स्वयं करें।
  • अपने पैरों को ज्यादा देर तक गीला न रहने दें।
  • कभी भी नंगे पैर बाहर न जाएं।

बस अपने पैरों का ध्यान रखें और नियमित रूप से अपने शुगर की निगरानी करें। ये आपके पैरों की देखभाल करने में मदद करते हैं।

और पढ़े : ट्राइग्लिसराइड्स सामान्य स्तर, उच्च स्तर के जोखिम, कारण और रोकथाम।

शुगर संबंधी न्यूरोपैथी का उपचार

डायबिटीज न्यूरोपैथी इलाज योग्य नहीं है। उपचार करने से दर्द में राहत, लक्षणों में धीमापन और जटिलताओं को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।

डायबिटीज न्यूरोपैथी के उपचार में शामिल हैं-

  1. शुगर से संबंधित तंत्रिका दर्द से राहत पाने के लिए आपके डॉक्टर एंटी-सीजर और डिप्रेशन से बचने वाली दवाएं लिख सकते हैं। एंटी-सीजर दवाएं सीजर डिजीज के इलाज में मदद करती हैं। प्रीगैबलिन और गैबापेंटिन लोकप्रिय एंटी-सीजर दवाएं हैं। ट्राइसाइक्लिक एंटी-डिप्रेसेंट और सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन रीपटेक इनहिबिटर दर्द को कम करने के लिए एंटी-डिप्रेसेंट हैं। अपने ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए व्यायाम और हेल्दी डाइट बनाए रखें। यह डायबिटीज न्यूरोपैथी जैसी जटिलताओं से बचने में मदद करता है। आपको अपने फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल को 80-130 मिलीग्राम/डीएल की सामान्य सीमा में रखने की जरूरत है।
  2. आपको अपना वजन सही बनाए रखने और अपने ब्लडप्रेशर को कंट्रोल में रखने की भी जरूरत होती है। डायबिटीज न्यूरोपैथी के इलाज के लिए आप नियमित व्यायाम या योग शुरू कर सकते हैं।

डायबिटीज न्यूरोपैथी के दर्द से राहत के लिए कुछ घरेलू उपचार

कुछ प्रभावी घरेलू उपचार डायबिटीज न्यूरोपैथी के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करते हैं। शुगर संबंधी न्यूरोपैथी के घरेलू उपचारों में शामिल हैं-

  1. व्यायाम, मसाज और स्ट्रेचिंग दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
  2. अपने डाईजेशन सिस्टम को सही रखने के लिए हाई कार्ब और ज्यादा फैट वाले खाने से बचें।
  3. ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन में सुधार के लिए इलास्टिक कंप्रेशन स्टॉकिंग पहनें।
  4. दर्द को खत्म करने के लिए गर्म या ठंडे पैच का प्रयोग करें।
  5. ऐसे तेल का उपयोग करें जिनमें दर्द निवारक प्रभाव और सूजन से लड़ने के गुण हों।
  6. मेडिटेशन तनाव को कम करता है और नर्व डैमेज (तंत्रिका क्षति) के कारण ज्यादा तेज दर्द को कम करने में मदद करता है।

और पढ़े : नॉर्मल शुगर लेवल कितना होना चाहिए ?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपचार न किए जाने पर पेरीफेरल न्यूरोपैथी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

शुगर के मरीजों को अपने पैरों की देखभाल करने की जरूरत होती है। उन्हें अपने पैरों की उचित और नियमित जांच की जरूरत है। पेरीफेरल न्यूरोपैथी से पैर सुन्न हो सकते हैं। सुन्न पैरों में चोट लगना आम बात है इसलिए शुगर के मरीजों को  दर्द महसूस नहीं हो सकता है। पैरों के उपचार की कमी से गंभीर संक्रमण हो सकता है और पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।

क्या शुगर के हर मरीज को डायबिटीज न्यूरोपैथी हो सकती है?

नहीं, डायबिटीज न्यूरोपैथी उन लोगों को होती है जो लंबे समय से शुगर के मरीज हैं। जो शुगर के मरीज अपने शुगर को प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं कर पाते हैं, उन्हें भी डायबिटीज न्यूरोपैथी होने का खतरा होता है। कंट्रोल शुगर वाले लोगों को डायबिटीज न्यूरोपैथी होने का खतरा कम होने की संभावना होती है।

शुगर आपके ब्लैडर कंट्रोल को कैसे प्रभावित करता है?

ब्लैडर की समस्या डायबिटीज न्यूरोपैथी के सामान्य लक्षणों में से एक है। शुगर आपके यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) में नर्व डैमेज का कारण बनता है इसलिए आपको अपने यूरिन को कंट्रोल करने में परेशानी का अनुभव हो सकता है। नर्व डैमेज को रोकने के लिए अपने शुगर मैनेजमेंट पर ध्यान दें जो एक्स्ट्रा यूरिन का कारण बन सकता है।

क्या डायबिटीज न्यूरोपैथी के कारण खुजली होती है?

हाँ, डायबिटीज न्यूरोपैथी के कारण खुजली हो सकती है। ब्लड शुगर के लेवल में उतार-चढ़ाव से नर्व रूट डैमेज हो सकता है। यह आपके शरीर में खराब ब्लड फ्लो के कारण होता है, यदि आपके पैरों और टाँगों में बहुत अधिक खुजली हो रही है और ब्लड शुगर का लेवल अधिक है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।

क्या पेरीफेरल न्यूरोपैथी ठीक हो सकती है?

नहीं, पेरीफेरल न्यूरोपैथी का कोई इलाज नहीं है। आप कुछ दवाओं से नर्व पेन जैसे डायबिटीज न्यूरोपैथी के लक्षणों को मैनेज कर सकते हैं। आप अपने नर्व पेन (तंत्रिका दर्द) का इलाज कुछ प्रकार के एंटीडिप्रेसेंट, कुछ एंटी-सीज़र और डुलोक्सेटिन दवाओं से कर सकते हैं।Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

Disclaimer

This site provides educational content; however, it is not a substitute for professional medical guidance. Readers should consult their healthcare professional for personalised guidance. We work hard to provide accurate and helpful information. Your well-being is important to us, and we value your feedback. To learn more, visit our editorial policy page for details on our content guidelines and the content creation process.

Leave a Reply

loading..

फ्री डायबिटीज डाइट प्लान डाउनलोड करें

डाइट प्लान डाउनलोड करें