प्री-डायबिटीज क्या है? कारण, लक्षण और इलाज | Prediabetes in Hindi

दुनिया के बदलते परिवेश में महामारी की तरह बढ़ रही डायबिटीज से पहले, “प्रीडायबिटीज” शब्द एक वार्निंग सिग्नल के रूप में उभर कर सामने आया है। प्रीडायबिटीज एक अवसर और चुनौती दोनों रूप में जाना जाता है। इस ब्लॉग में इससे जुड़ी जटिल समस्याओं को सरल भाषा में समझाया गया है। साथ ही इसमें प्रीडायबिटीज से होने वाले बदलावों और उन जरूरी उपायों के बारे में बताता गया है, जिन्हें कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से टाइप 2 डायबिटीज का शिकार होने से बचने के लिए अपना सकता है। इसके अलावा प्रीडायबिटीज को विस्तृत रूप से जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह कैसे हो सकता है और इसके लक्षण क्या हो सकते हैं। फिर हम इसका पता लगाने के लिए, किए जाने वाले जांचों के बारे में बताएंगे और अंत में इसे रोकने के तरीके और प्रीडायबिटीज होने पर खुद की देखभाल कैसे करें, इसके बारे में बताएंगे।

Table of Contents

प्रीडायबिटीज क्या होती है?

प्रीडायबिटीज का मतलब है कि आपके ब्लड में ग्लूकोज (जिसे ब्लड शुगर भी कहा जाता है) का लेवल नॉर्मल रेंज से अधिक है। हालांकि यह इतना भी अधिक नहीं होता है कि इसे टाइप-2 डायबिटीज के रूप में वर्गीकृत किया जाए। ब्लड शुगर का लेवल टाइप-2 डायबिटीज के लिए निर्धारित रेंज यानी सीमा से ठीक नीचे होता है। प्रीडायबिटीज एक वार्निंग सिग्नल के रूप में कार्य करता है, ताकि किसी भी व्यक्ति को टाइप 2 डायबिटीज होने में देरी हो सके या इससे बचा जा सके।

टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों को आमतौर पर शुरुआत में प्रीडायबिटीज होती थी, लेकिन अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होने के कारण यह टाइप-2 डायबिटीज में बदल गई। इंसुलिन प्रतिरोध के कारण व्यक्ति में प्रीडायबिटीज हो जाती है। यदि आपका प्रीडायबिटीज HbA1c लेवल, या पिछले दो से तीन महीनों में औसत ब्लड शुगर 5.7% और 6.4% के बीच है, तो आपको प्रीडायबिटीज है। 5.7% से कम HbA1c का लेवल सामान्य माना जाता है, जबकि 6.4% से अधिक का लेवल टाइप 2 डायबिटीज का संकेत देता है। प्रीडायबिटीज फास्टिंग ग्लूकोज लेवल प्रीडायबिटीज का एक और संकेत है। यदि आपकी फास्टिंग प्रीडायबिटीज शुगर लेवल 100 mg/dL और 125 mg/dL के बीच है, तो आपको प्रीडायबिटीज हो सकता है।

एक डायबिटीज के मरीज की फास्टिंग शुगर 126 mg/dL या उससे ऊपर होती है, जबकि एक सामान्य व्यक्ति की फास्टिंग शुगर लेवल 100 mg/dL से कम होती है। ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT) प्रीडायबिटीज का निर्धारण करने का एक अलग तरीका है। प्रीडायबिटीज वाले मरीज में GTT ब्लड शुगर लेवल 140 mg/dL और 199 mg/dL के बीच होगी।

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प्रीडायबिटीज होने के क्या कारण हैं?

किसी भी व्यक्ति में प्रीडायबिटीज तब विकसित होती है, जब उसके शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता है। इंसुलिन मुख्य रूप से रक्त कोशिकाओं को रक्तप्रवाह (Bloodstream) से ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद करता है। जब आपका शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में असमर्थ होता है, तो आपके ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है। ब्लड शुगर का सामान्य से अधिक लेवल  होना प्रीडायबिटीज का संकेत देता है। 

प्रीडायबिटीज में शुगर का लेवल सामान्य लेवल से अधिक होता है लेकिन डायबिटीज के शुगर लेवल से कम होता है। यदि आप प्रीडायबिटीज को कंट्रोल नहीं करते हैं, तो आपमें डायबिटीज टाइप-2 में विकसित हो सकता है। आपके ब्लड में ग्लूकोज का हाई लेवल, आपकी नसों और रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

और पढ़े : प्रीडायबिटीज को प्राकृतिक रूप से कैसे रिवर्स करें?

प्रीडायबिटीज के लक्षण

प्रीडायबिटीज के लक्षण

आमतौर पर प्रीडायबिटीज के लक्षण पहचान में नहीं आते हैं। अधिकतर लोगों को प्रीडायबिटीज का निदान संयोग से हो जाता है। ऐसा मेडिकल स्क्रीनिंग या रेगुलर ब्लड टेस्ट के दौरान हो सकता है। इसलिए यदि आप प्रीडायबिटिक होने के हाई रिस्क कारक वाले लोगों की श्रेणी में आते हैं, तो अपने ब्लड शुगर की जांच समय के अनुसार नियमित रूप से करते रहना जरूरी है। जब किसी व्यक्ति में प्रीडायबिटीज विकसित होता है, तो उनमें कुछ इस प्रकार के वार्निंग सिग्नल होते हैं:

भूख और प्यास का बढ़ना

प्रीडायबिटीज के लक्षणों में प्यास और भूख का बढ़ना टॉप सिग्नल में से एक है। आपके शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ना इंसुलिन या इंसुलिन प्रतिरोध की कमी का परिणाम होता है। इसका मतलब है कि आपका शरीर भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने में सक्षम नहीं है। यही वजह है कि शरीर में ऊर्जा की कमी से आपको अधिक भूख और प्यास लगने लगती है।

अप्रत्याशित तरीके से वजन घटना

इंसुलिन या इंसुलिन प्रतिरोध की कमी आपके शरीर को रक्तप्रवाह से ग्लूकोज प्राप्त करने से रोकती है। इसीलिए यह शरीर में ऊर्जा की कमी का कारण बनता है। इसके बाद आपका शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए फैट और मांसपेशियों को जलाना शुरू कर देता है। इससे शरीर का संपूर्ण वजन अप्रत्याशित रूप से कम हो जाता है। यह प्रीडायबिटीज के टॉप सिग्नलों या लक्षणों में से एक है।

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बार-बार पेशाब आना

प्रीडायबिटीज के अन्य लक्षणों में से एक लक्षण है, बार-बार पेशाब का आना या वृद्धि होना। आपके रक्तप्रवाह में अतिरिक्त ब्लड शुगर, आपके शरीर से अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए अधिक मूत्र का उत्पादन करता है, जिससे प्रीडायबिटीज शख्स को बार-बार पेशाब आता है।

थकान होना

जब इंसुलिन की कमी के कारण आपके शरीर को काम करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती है, तो आप हर समय थकान महसूस कर सकते हैं। शरीर में कम ऊर्जा लेवल प्रीडायबिटीज के लक्षणों में से एक है।

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प्रीडायबिटीज होने के जोखिम कारक

प्रीडायबिटीज होने के जोखिम कारक

प्रीडायबिटीज होने के कुछ जोखिम कारकों में शामिल हैं:

  • हीमोग्लोबिन A1C का लेवल 5.7%-6.4% के बीच होना
  • प्रीडायबिटीज या डायबिटीज टाइप-2 की फैमिली हिस्ट्री का होना
  • अधिक वजन होना या शारीरिक रूप से मेहनत ना करना
  • जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज (Gestational diabetes) या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम था
  • बहुत अधिक प्रोसेड फूड, चीनी और सोडे का सेवन करना
  • अत्यधिक तनाव में रहना
  • धूम्रपान

ऊपर दिए गए ये सभी कारक आपके प्रीडायबिटिक बनने के जोखिम को बढ़ाते हैं। यदि आप ऊपर दिए गए किसी भी कारक के अंतर्गत खुद को पाते हैं, तो आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है।

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प्रीडायबिटीज का निदान और उपचार

प्रीडायबिटीज का निदान और उपचार

यदि आपमें प्रीडायबिटीज के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर प्रीडायबिटीज का निदान करने के लिए आपको नीचे दिए गए टेस्टों में से कोई टेस्ट सुझाएगा। प्रीडायबिटीज उपचार में ये टेस्ट प्रीडायबिटीज चार्ट में टॉप पर होंगे।

हीमोग्लोबिन A1c टेस्ट

प्रीडायबिटीज HbA1c ब्लड टेस्ट, पिछले 2-3 महीनों में आपके औसत ब्लड शुगर लेवल को काउंट करने में मदद करता है। यह टेस्ट ब्लड शुगर से जुड़े हीमोग्लोबिन के प्रतिशत को काउंट करता है। प्रीडायबिटीज HbA1c का लेवल 5.7% से 6.4% के बीच होता है।

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ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस यानी आपके शरीर की खपत किए गए ग्लूकोज को सहन करने की क्षमता होती है। यह टेस्ट मापता है कि शुगर युक्त घोल का सेवन करने के बाद आपका शरीर, अपने ब्लड शुगर के लेवल को कैसे बनाए रखता है। इस टेस्ट में शुगर घोल पीने से पहले और बाद में प्रीडायबिटीज ब्लड शुगर के लेवल की तुलना की जाती है। गैस्टोनियल डायबिटीज (gestational diabetes) के निदान के लिए यह टेस्ट बहुत ही आम बात है। यदि आपको प्रीडायबिटीज है, तो आपका प्रीडायबिटीज ग्लूकोज लेवल या ब्लड शुगर लेवल 140-199 mg/dl की रेंज के बीच में होगा।

फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट

फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज एक प्रकार का ब्लड टेस्ट होता है। इसके लिए व्यक्ति को 8 घंटे से अधिक या रात भर की फास्टिंग करनी पड़ती है। यह टेस्ट फास्टिंग अवस्था में आपके ब्लड में ग्लूकोज के लेवल को मापता है। इस टेस्ट का उद्देश्य यह निर्धारित करना होता है कि आपका शरीर ब्लड शुगर के लेवल को कैसे बनाए रख सकता है। प्रीडायबिटीज फास्टिंग ग्लूकोज की नॉर्मल रेंज 100-125 mg/dL के बीच होता है। एक सामान्य व्यक्ति का फास्टिंग ब्लड शुगर 70-99 mg/dL के बीच होगा। ठीक इसके उलट एक डायबिटीक मरीज का फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज 140+ mg/dL होता है।

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प्रीडायबिटीज का इलाज

प्रीडायबिटीज का सबसे अच्छा और सरल इलाज प्राकृतिक इलाज है। इसमें आपको स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाने के साथ-साथ ताकत और वजन बढ़ाने वाली एक्सरसाइज शुरू करनी होती है। लाइफ स्टाइल में इन बदलावों को अपनाना सबसे अच्छी प्रीडायबिटीज की दवा है, जिसे आप आसानी से कर सकते हैं। प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट के लिए डॉक्टर कुछ इस तरह के जरूरी सलाह देते हैं:

वजन को मैनेज करना: प्रीडायबिटीज के पूर्ण रूप से इलाज के लिए BMI के अनुसार शरीर का वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए अधिक वजन वाले और मोटे प्रीडायबिटीज के मरीजों को कुछ किलो वजन कम करना चाहिए। शरीर के वजन का लगभग 5 -7 % भी कम करने पर आप अपने शरीर में सकारात्मक रूप से स्वास्थ्य परिवर्तन का अनुभव करना शुरू कर देंगे। ठीक इसके विपरीत कम वजन वाले प्रीडायबिटीज के मरीजों को, एक्सरसाइज व लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करके अपने वजन और मांसपेशियों को बढ़ाना चाहिए।

संतुलित डाइट लेना: प्रीडायबिटीज के इलाज के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण कारक पौष्टिक डाइट पर स्विच करना होता है। अपने डाइट में बिना स्टार्च वाली सब्जियां, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करके आप अपनी डाइट को संतुलित कर सकते हैं। प्रीडायबिटीज से निदान के लिए साधारण कार्ब खाद्य स्रोतों, शुगर युक्त खाद्य पदार्थों और पशु और डेयरी उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।

प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट के लिए फॉलो किए जाने वाले कुछ अन्य जरूरी स्टेप्स हैं, जैसे:

  • धूम्रपान छोड़ें।
  • शराब का सेवन कम से कम करना या बेहतर होगा कि इससे बचें।
  • मांसपेशियों का निर्माण करें व मजबूत बनाएं।
  • स्ट्रेस को मैनेज करें।
  • ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे संबंधित विकारों पर कंट्रोल रखें।
  • कम से कम 7 से 8 घंटे की उचित नींद लें।
  • प्रीडायबिटीज से जुझ रहे लोगों का ग्रुप जॉइन करें और उनके साथ बताए गए जरूरी स्टेप्स को फॉलो करें।

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क्या प्रीडायबिटीज ठीक हो सकती है?

वैसे देखा जाय तो प्रीडायबिटीज को कंट्रोल करने के कई कारगर तरीके हैं, आप आश्चर्यचकित भी हो सकते हैं कि क्या वाकई में प्रीडायबिटीज का इलाज संभव है? खैर यह खबर सुनकर आपको जरूर खुशी मिलेगी कि आप प्रीडायबिटीज को रिवर्स या ठीक कर सकते हैं। इसके लिए लाइफ स्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव लाकर आप प्रीडायबिटीज का प्राकृतिक रूप से इलाज कर सकते हैं।

हेल्दी डाइट को अपनाकर, नियमित रूप से मांसपेशियां बढ़ाने वाले वर्कआउट करके और स्वस्थ वजन बनाए रखकर, प्रीडायबिटीज से पीड़ित कई लोग अपने प्रीडायबिटीज ब्लड शुगर के लेवल को नॉर्मल रेंज के भीतर वापस ला सकते हैं। ये बदलाव टाइप 2 डायबिटीज के विकास के जोखिम को काफी कम कर सकते हैं। हालांकि इस प्राकृतिक इलाज में फायदे को बनाए रखने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए, इन आदतों को लंबे समय तक जारी रखना बहुत ही जरूरी होता है। इसमें एक अन्य महत्वपूर्ण चीज है खुद से ख्याल रखना, जिसमें आप शुगर लेवल की लगातार मॉनिटरिंग और समय-समय पर HbA1c लेवल की जांच करके प्रीडायबिटीज को ठीक कर सकते हैं।

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प्रीडायबिटीज को कैसे मैनेज करें?

यदि आप प्रीडायबिटीज को रिवर्स करना चाहते हैं तो प्रीडायबिटीज आपकी सुस्त और बिना एक्सरसाइज वाली लाइफ स्टाइल के लिए यह एक कठिन पड़ाव है। प्रीडायबिटीज फेज में लगातार हाई ब्लड शुगर होने से, आप कुछ ही समय में प्रीडायबिटीज ब्लड शुगर के लेवल को क्रॉस कर सकते हैं और डायबिटीज के शुगर लेवल के रेंज में पहुंच सकते हैं।

इसीलिए आपको प्रीडायबिटीज सेल्फ केयर करना बहुत जरूरी हो जाता है, जिसमें साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, नॉन-स्टार्च वाली सब्जियां, फल और हेल्दी फैट से भरे संतुलित डाइट पर स्विच करना शामिल है। चीनीयुक्त खाद्य पदार्थों और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के सेवन को जितना जल्दी हो सके कम करना चाहिए, यह स्टेप प्रीडायबिटीज के दौरान खुद का ख्याल रखना यानी सेल्फ केयर करना टॉप श्रेणी में आता है। 

प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट में नियमित रूप से ताकत या मांसपेशियों के निर्माण करने वाले एक्सरसाइज शामिल होते हैं, जिसका लक्ष्य कम से कम 150 मिनट का मध्यम रूप से व्यायाम करना है। या प्रति सप्ताह 75 मिनट का थोड़ी ज्यादा मेहनत के साथ मांसपेशियां निर्माण करने वाला व्यायाम शामिल है। फिनिश डायबिटीज रोकथाम (Finnish Diabetes Prevention) के अध्ययन से पता चला है कि वजन घटाने, स्वस्थ भोजन लेने और शारीरिक कसरत जैसे गुड हैबिट को फॉलो करके, चार वर्षों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 58% कम हुआ है। 

भारतीय डायबिटीज निवारण कार्यक्रम (Indian Diabetes Prevention Program) द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में लाइफ स्टाइल में जरूरी बदलाव, कम कैलोरी वाली डाइट लेना, और फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाना और दिनचर्या में बदलाव शामिल थे। इस अध्ययन के परिणाम में तीन वर्षों में टाइप 2 डायबिटीज के खतरे में 28% की गिरावट आई। नीचे कुछ जरूर प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट के लिए स्टेप्स बताए गए हैं, जिसे आप प्रीडायबिटीज से निदान पाने के लिए फॉलो कर सकते हैं:

  • किसी डाइट एक्सपर्ट या डॉक्टर के साथ मिलकर अपनी पर्सनल डाइट बनवाएं, जो आपके शरीर के लिए फिट हो।
  • मांसपेशियों के निर्माण वाले एक्सरसाइज पर ध्यान देने के साथ-साथ, एक्सपर्ट के दिशा-निर्देश में नई एक्सरसाइज करें।
  • आपकी ही तरह स्वास्थ को लेकर समान लक्ष्य और बेहतर लाइफ स्टाइल रखने वाले लोगों से जुड़ें और उनको फॉलो करें।
  • अपने स्ट्रेस के लेवल को मैनेज करें और आपको आगे बढ़ने से रोकने वाली बाधाओं का पता लगाएं और उससे बचें।
  • अधिक खाने से बचने और कैलोरी सेवन को कंट्रोल करने के लिए अपने खाने के पोर्शन साइज को लेकर सावधान रहें।
  • धूम्रपान और शराब के सेवन को कम करें या पूरी तरीके से बंद कर दें, क्योंकि इससे प्रीडायबिटीज से डायबिटीज के बढ़ने का खतरा और बढ़ जाता है।

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निष्कर्ष

ऊपर दिए गए सभी जरूरी बिंदुओं और जानकारियों से यही मालूम चलता है कि किसी भी व्यक्ति में डायबिटिज होने से पहले, प्रीडायबिटीज एक महत्वपूर्ण वॉर्निंग सिग्नल के रूप में कार्य करता है। जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जैसा कि हमने पता लगाया है, यह एक ऐसी स्थिति है जो तब होती है जब शुगर का लेवल सामान्य से ऊपर होता है लेकिन डायबिटीज की शुगर लेवल रेंज से दूर होता है।

प्रीडायबिटीज के पीछे के पहलुओं को समझना, प्रीडायबिटीज के लक्षणों को पहचानना और पता लगाने के लिए ऊपर दिए गए टेस्टों का उपयोग करना शुरूआती अवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होता है। प्रीडायबिटीज की पहचान करके और जरूरी लाइफ स्टाइल में बदलाव करके, आप प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट शुरू कर सकते हैं। प्रीडायबिटीज मैनेजमेंट में आप उचित डाइट बनाए रखने, नियमित रूप से ताकत और मांसपेशियों के निर्माण से संबंधित एक्सरसाइज में व्यस्त होने, स्ट्रेस को मैनेज करने जैसे कुछ जरूरी कदमों का पालन करते हैं।

कोई भी व्यक्ति ऊपर दिए गए प्राकृतिक इलाजों व सुझाओं को फॉलो करके, टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ने के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। प्रीडायबिटीज से डायबिटीज होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। लेकिन जागरूक होकर और जरूरी उपायों को फॉलो करके, कोई भी व्यक्ति भविष्य में डायबिटीज मुक्त खुशहाल जिंदगी जी सकता है। याद रखें, स्वास्थ से संबंधित जो कुछ भी स्वस्थ बदलाव करते हैं तो उसका भविष्य में सकारात्मक परिणाम मिलता है।

साथ ही अगर आप प्रीडायबिटीज से संबंधित किसी भी तरीके की समस्या का सामना कर रहे हैं या इसके मैनेजमेंट के बारे में आपको कोई संदेह है? तो आपके लिए ब्रीथ वेल-बीइंग (Breathe Well-Being) एक बेस्ट प्लेटफॉर्म है, जहां हमारे अनुभवी हेल्थ एक्सपर्ट आपकी सहायता के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं। हमारे पास हेल्थ एक्सपर्ट की एक टीम है, जिनके पास प्रीडायबिटीज व डायबिटीज से जुड़ी किसी भी तरीके की समस्या से निदान पाने के लिए कई वर्षों का अनुभव है। हमारी टीम के पास कई मरीजों को प्रीडायबिटीज से ठीक करने में मदद करने का विश्वसनीय व प्रूवेन रिकॉर्ड है। वे प्रीडायबिटीज को कंट्रोल करने और रिवर्स के लिए सही एवं पर्सनल स्ट्रेटजी तैयार करने में आपकी मदद कर सकते हैं। अब जब आपको इतनी सबकुछ सुविधा एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल रही है, तो फिर किस बात का इंतजार है? हमें आज ही कॉल करें और संपूर्ण निदान पाएं।

और पढ़े : जानिए डायबिटीज के मरीज के  लिए योग।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रीडायबिटीज के लिए फास्टिंग की रेंज क्या है?

प्रीडायबिटीज फास्टिंग ग्लूकोज रेंज 100 mg/dL और 125 mg/dL के बीच होती है। एक सामान्य व्यक्ति का फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज 70 mg/dL और 99 mg/dL के बीच होता है। इसके विपरीत एक डायबिटीज मरीज का ब्लड शुगर तेजी से 140 mg/dL से ऊपर होता है।

क्या अंडे प्रीडायबिटीज के लिए अच्छे होते हैं?

अंडे पशु उत्पाद (Animal Products) के अंतर्गत आते हैं और पशु उत्पाद प्रकृति में अम्लीय होते हैं और इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं जो आपके ब्लड शुगर को बढ़ाते हैं। हालांकि अंडे में कम कैलोरी, प्रोटीन और गुड कोलेस्ट्रॉल होता है। इसलिए आपको संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में अंडे का सेवन एक निश्चित मात्रा में करना चाहिए। चूंकि आपके प्रीडायबिटीज ब्लड शुगर का लेवल सामान्य के करीब है, तो आप इनका सेवन थोड़ा बहुत बढ़ा भी सकते हैं।

क्या चलने से प्रीडायबिटीज ठीक हो सकती है?

इस सवाल का जवाब देना थोड़ा जटिल है कि चलना निश्चित रूप से लाइफ स्टाइल में बदलावों में से एक है, जिसे आपको प्रीडायबिटीज को रिवर्स करने के लिए जरूरी होता है। हालांकि चलने के साथ-साथ, आपको प्रीडायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए ऊपर दिए गए ब्लॉग में उचित डाइट को फॉलो करने और कुछ मांसपेशियों के निर्माण वाले वर्कआउट भी करने की जरूरत होती है। लाइफ स्टाइल में इन बदलावों को अपनाने और कुछ समय तक इनको नियमित रूप से फॉलो करने से, निश्चित रूप से प्रीडायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है और इसे रिवर्स भी किया जा सकता है। ध्यान रहे इसके लिए निरंतरता जरूरी होती है।

प्रीडायबिटीज डायबिटीज के कितने करीब होता है?

इस प्रश्न का सही जवाब पाने के लिए ऐसे तीन टेस्ट होते हैं, जो प्रीडायबिटीज की डायबिटीज से निकटता को दर्शाते हैं। जिसमें पहला टेस्ट है  HbA1c टेस्ट, दूसरा फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट और तीसरा ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट। प्रीडायबिटीज के मरीजों का HbA1c लेवल 5.7% और 6.4% के बीच होता है, जबकि डायबिटीज के मरीजों का HbA1c लेवल 6.4% से ऊपर होता है। प्रीडायबिटीज में फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट में, ब्लड शुगर 100 mg/dL और 125 mg/dL के बीच होता है। डायबिटीज के मरीजों का फास्टिंग ब्लड शुगर 140 mg/dL से ऊपर होता है। ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट में, प्रीडायबिटिक व्यक्ति का ब्लड शुगर 140 mg/dL और 199 mg/dL के बीच होता है। डायबिटीज के मरीज का GTT ब्लड शुगर 200 mg/dL से ऊपर होता है।

क्या प्रीडायबिटीज का मतलब यह है कि आपको डायबिटीज हो जाएगा?

इसका जवाब है नहीं, प्रीडायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि आपको डायबिटीज हो जाएगा। प्रीडायबिटीज टाइप 2 डायबिटीज के विकास से पहले की एक अवस्था होती है। जिसका उचित इलाज और खुद से देखभाल करने के साथ-साथ आप दवाओं के बिना प्रीडायबिटीज का प्राकृतिक रूप से इलाज कर सकते हैं। जिसमें बिना फिजिकल एक्टिविटी वाली लाइफ स्टाइल से बाहर निकलना, उचित डाइट प्लान को फॉलो करना और एक्सपर्ट के दिशा-निर्देश में वर्कआउट शुरू करना होता है।  
Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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