मेटफोर्मिन के साइड इफेक्ट्स

डाईबिटीज़ की सबसे लोकप्रिय दवा मेटफोर्मिन के बारे में सभी डाइबीटिक लोगों को जानकारी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे सेफ समझी जाने वाली इस एंटी-डाइबीटिक दवा के भी कई साइड-इफ़ेक्ट्स हैं? इस ब्लॉग में हम इन्हीं कॉमन साइड-इफेक्ट के बारे में पढ़ेंगें।

मेटफोर्मिन टाइप-2 मधुमेह के इलाज और मेनेज करने के लिए एक बहुत ही लोकप्रिय और आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवा है। टाइप-2 डाईबिटीज़ के उपचार का मुख्य उद्देश्य रक्त शर्करा के स्तर का मेनेज करना है। शरीर में इंसुलिन रेज़िस्टेंस और इंसुलिन के उत्पादन में कमी के कारण शरीर के रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। इस प्रकार मेटफोर्मिन का काम है इन बढ़ते घटते शुगर लेवल्स को नियंत्रित करना। हालांकि यह दवा सबसे कॉमन हैं लेकिन इसके भी अनेक साइड-इफ़ेक्ट्स देखे जा सकते हैं।

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मेटफोर्मिन की आवश्यकता- टाइप 2 मधुमेह और लीवर की भूमिका

लीवर और अग्न्याशय रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। जब भोजन के पाचन से ग्लूकोज ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करता है तब अग्न्याशय (pancreas) द्वारा इंसुलिन स्रावित किया जाता है। इस इंसुलिन की मदद से शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा और मेटाबोलिक क्रियाओं के लिए ग्लूकोज को अवशोषित करती हैं। लेकिन आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज लिवर में ग्लाइकोजन के रूप में जमा हो जाता है।

ज़रूरत के समय यह ग्लाइकोजन ग्लूकोज में टूट कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन डाईबिटीज़ में शरीर इंसुलिन रेज़िस्टेट हो जाता है जिससे कोशिकाएं शुगर या ग्लुकोज़ का अवशोषण कम कर देती है। लेकिन चूंकि कोशिकाओं को ऊर्जा की आवश्यकता होती है ऐसे में लिवर में स्टोर ग्लाइकोजन ग्लूकोज में परिवर्तित होना शुरू हो जाता है जिससे ब्लड में शुगर लेवल बढ़ जाते हैं।

इस प्रकार, टाइप -2 मधुमेह में, लिवर से ग्लूकोज का उत्पादन अधिक होता है जिसके परिणामस्वरूप शुगर लेवल बढ़ जाते हैं जिन्हें नियंत्रित करने की ज़रूरत होती है। इसी क्रम में मेटफोर्मिन एक ऐसी दवा है जो लिवर द्वारा लिवर  ग्लूकोज उत्पादन को कम करती है।

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मेटफोर्मिन के उपयोग

मेटफोर्मिन की दवा

मेटफॉर्मिन किसके लिए प्रयोग की जाती है?

  • लीवर ग्लूकोज उत्पादन को नियंत्रित करके टाइप-2 मधुमेह का प्रबंधन करता है: मेटफोर्मिन यकृत की श्वसन श्रृंखला में अवरोधक के रूप में कार्य करता है। इस अवरोध के परिणामस्वरूप लिवर ग्लूकोज उत्पादन में कमी आती है। इस प्रकार, मेटफोर्मिन लिवर में ग्लूकोज उत्पादन को मेनेज  करता है।
  • इंसुलिन संवेदनशीलता या इंसुलिन सेन्सिटिविटी: यह कोशिकाओं की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में भी मदद करता है। यह शरीर के ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • बढ़े हुए ग्लूकोज का उपयोग: मेटफोर्मिन आंत में शरीर के ग्लूकोज के उपयोग को बढ़ाने में मदद करता है। यह बदले में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
  • वजन प्रबंधन या वेट मेनेजमेंट: मेटफोर्मिन शरीर में जमा वसा के उपयोग को प्रभावित करता है। यह आपकी भूख को भी कम करता है जिससे आपका वज़न नहीं बढ़ता।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम: मेटफोर्मिन ओव्यूलेशन को स्टीम्यूलेट करता है और इस प्रकार पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के इलाज में मदद करता है।

सारांश

मेटफोर्मिन के उपयोग से ब्लड शुगर लेवल, वजन प्रबंधन और पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम को मेनेज व नियंत्रित किया जाता हैं।

मेटफोर्मिन दवा की जानकारी और खुराक

यह विभिन्न ब्रांड नामों के अंतर्गत आता है: ग्लूकोफेज, ग्लूकोफेज एक्सआर, फोर्टामेट, ग्लुमेट्ज़ा, और रिओमेट।

मेटफोर्मिन की ओरल टैबलेट भी अलग-अलग खुराक में उपलब्ध हैं। तत्काल रिलीज मेटफॉर्मिन टेबल मेटफॉर्मिन 500 मिलीग्राम, मेटफॉर्मिन 850 मिलीग्राम और मेटफॉर्मिन 1000 मिलीग्राम के रूप में उपलब्ध हैं। विस्तारित-रिलीज़ टैबलेट मेटफ़ॉर्मिन 500 मिलीग्राम, मेटफ़ॉर्मिन 750 मिलीग्राम और मेटफ़ॉर्मिन 1000 मिलीग्राम के रूप में उपलब्ध हैं।

मेटफोर्मिन की खुराक हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। डॉक्टर आपकी स्थिति व ज़रूरत के अनुसार आपको दवा लिखते हैं। दवा की अधिकतम खुराक 2000 मिलीग्राम प्रति दिन है।

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मेटफोर्मिन के साइड इफेक्ट

मेटफोर्मिन के साइड इफेक्ट्स

मेटफोर्मिन के आम या साधारण दुष्प्रभाव

कुछ लोगों को मेटफोर्मिन के साइड-इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं। मेटफॉर्मिन के कुछ सबसे आम दुष्प्रभाव या साइड-इफ़ेक्ट्स  इस प्रकार हैं:

  • लगातार उल्टी होने का एहसास यानि जी मिचलाना
  • दस्त की शिकायत
  • मेटफोर्मिन अपच की समस्या पैदा कर सकता है और इस प्रकार मेटफॉर्मिन दस्त का कारण बन सकता है
  • सूजन, गेस्ट्राइटीस और सीने में जलन
  • पेट दर्द होना
  • बुखार या ठंड लगना
  • नींद आना
  • असामान्य मांसपेशियों में दर्द होना
  • खाने की इच्छा में कमी
  • मुंह का स्वाद कम होना

आम तौर पर, मेटफॉर्मिन के ये आम दुष्प्रभाव कुछ दिनों तक चलते हैं। यदि वे जारी रहते हैं या बार-बार दिखे तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।

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मेटफोर्मिन के गंभीर साइड इफेक्ट

कुछ साइड-इफ़ेक्ट्स कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता हैं। ऐसी स्थिति में किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। मेटफॉर्मिन के गंभीर दुष्प्रभावों या साइड-इफ़ेक्ट्स में शामिल हैं:

लैक्टिक एसिडोसिस

  • मेटफॉर्मिन का एक गंभीर दुष्प्रभाव मेटफॉर्मिन लैक्टिक एसिडोसिस है। इस स्थिति में लैक्टिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज और किडनी की समस्या वाले रोगियों में यह बहुत आम है।
  • मेटफोर्मिन सेलुलर रेसपिरेशन को रोककर अवायवीय श्वसन को बढ़ाता है। इससे लैक्टेट का स्तर बढ़ जाता है।
  • गुर्दे की समस्या या किड्नी प्रॉब्लम्स वाले रोगी इस इकट्ठे हुए लैक्टिक एसिड को क्लियर नहीं कर पाते। इससे लैक्टिक एसिड इकट्ठा हो कर मेटफॉर्मिन प्रेरित लैक्टिक एसिडोसिस में बदल जाता है।
  • इससे मांसपेशियों में दर्द, पेट की समस्या, दस्त, सांस लेने में तकलीफ और भूख में कमी आती है। आप थका हुआ महसूस करते हैं और नींद की समस्या होती है।
  • लैक्टिक एसिडोसिस का समय पर इलाज नहीं करने से काफी समस्याएं हो जाती है। लैक्टिक एसिडोसिस के कारण हृदय की समस्याएं, सेप्सिस, लिवर डेमेज, किड्नी इमपेयरमेंट और यहां तक ​​कि मृत्यु जैसी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आए तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।

ऐलर्जी या एलर्जिक रिएक्शन

वैसे तो मेटफोर्मिन से होंए वाली एलर्जी प्रतिक्रियाएं इतनी आम नहीं हैं। फ़िर भी यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तत्काल स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें:

  • त्वचा या पित्ती पर चकत्ते
  • तेज़ और अनियमित दिल की धड़कन
  • गले या जीभ की सूजन
  • चक्कर आना
  • सिरदर्द। कुछ लोगों को मेटफोर्मिन के सेवन के बाद सिरदर्द की शिकायत हो सकती है
  • हाथ पैर हिलना और दौरे
  • सांस लेने में परेशानी और सीने में तकलीफ
  • सीने में जकड़न महसूस होना

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हाइपोग्लाइसीमिया

  • मेटफॉर्मिन हाइपोग्लाइसीमिया उन लोगों में देखा जाता है जो मेटफॉर्मिन के साथ इंसुलिन पर भी हैं।
  • जैसा की हम जानते हैं कि मेटफोर्मिन रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है। कभी-कभी इंसुलिन या इसके विकल्प के साथ मेटफॉर्मिन या मेटफोर्मिन की अधिक मात्रा को साथ लेने पर रक्त शर्करा के स्तर में बहुत कमी आ जाती है जिसके परिणामस्वरूप हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है।
  • हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षणों में शामिल है कंपकंपी और हाथ कांपना, पसीना आना, भूख लगना, भ्रम, ध्यान कम होना, नींद आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना।
  • कभी-कभी मेटफोर्मिन के साथ अनुचित आहार या ग़लत खाना हाइपोग्लाइसीमिया का कारण बन सकता है।
  • इससे बचने के लिए दवा लेने से पहले अपने रक्त शर्करा के स्तर को मापें। मेटफॉर्मिन लेने के बाद नियमित रूप से स्तरों की जाँच करें।
  • भोजन न छोड़ें।
  • हाइपोग्लाइसीमिया को दूर करने के लिए तेजी से काम करने वाले कार्बोहाइड्रेट या हाई-कार्ब डाइट लें।
  • यदि हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति बनी रहती है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

एनीमिया जैसे गंभीर लक्षण

मेटफोर्मिन विटामिन बी12 के अवशोषण को कम करता है। इससे विटामिन बी12 और आयरन की कमी हो जाती है। अगर इसका सही इलाज ना किया जाए तो इससे एनीमिया के लक्षण पैदा हो सकते है जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते है। मेटफॉर्मिन से होने वाले एनीमिया और विटामिन बी 12 की कमी के सामान्य लक्षण जिन्हें तत्काल स्वास्थ्य ध्यान की आवश्यकता होती है वह हैं:

  • त्वचा के रंग में परिवर्तन, पीलापन
  • नींद और चक्कर आना
  • एकाग्रता में कठिनाई और सजगता में कमी
  • अवसाद और जलन
  • मनोभ्रंश या स्मृति हानि (मेमोरी लॉस)

सारांश

एलर्जी प्रतिक्रियाएं, लैक्टिक एसिडोसिस, हाइपोग्लाइसीमिया, एनीमिया मेटफॉर्मिन के कुछ गंभीर साइड-इफ़ेक्ट्स हैं जिनके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों व चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है।

मेटफोर्मिन के दीर्घकालिक या लंबे समय तक रहने वाले दुष्प्रभाव या साइड-इफ़ेक्ट्स

मेटफोर्मिन के कारण होने वाले अधिकांश दीर्घकालिक दुष्प्रभाव ज्यादातर ग़लत डाईबिटीज़ मेनेजमेंट के कारण होते हैं। मेटफोर्मिन के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव में शामिल हैं:

एनीमिया और विटामिन बी 12 की कमी

  • मेटफोर्मिन लेने पर कुछ लोग लोग थकान, चक्कर आना, चलने में कठिनाई, त्वचा के रंग में बदलाव आदि जैसे लक्षण महसूस कर सकते हैं।
  • ऐसा विटामिन बी12 की कमी और आयरन की कमी के कारण होता है। मेटफोर्मिन विटामिन बी12 के अवशोषण को कम करता है और इससे एनीमिया या खून की कमी होती है।
  • ऐसी स्थिति से बचने के लिए नियमित रूप से रक्त जांच करवाएं। विटामिन बी12 के स्वस्थ स्तर की निगरानी रख कर इस समस्या से बचा जा सकता है।
  • यदि विटामिन बी12 का स्तर कम है तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपको सप्लीमेंट लेने या मेटफॉर्मिन बंद करने का सुझाव दे सकते हैं।

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एनीमिया और विटामिन बी 12 की कमी के लक्षण हैं

  • त्वचा का पीलापन।
  • जीभ में दर्द होना और जीभ में सूजन होना
  • भ्रम के कारण घटी हुई सजगता
  • चिड़चिड़ापन और अवसाद
  • सूंघने की क्षमता का कम होना
  • तंत्रिका क्षति और मांसपेशियों में दर्द [4]।
  • चलने में कठिनाई
  • स्मृति या मनोभ्रंश जैसे लक्षण

मेटफॉर्मिन लेते समय आपको अपने डॉक्टर से विटामिन बी12 और आयरन सप्लीमेंट के बारे में ज़रूर पूछना चाहिए।

मेटफोर्मिन को ले कर चेतावनी

मेटफॉर्मिन लेते समय मेटफोर्मिन और उसकी अन्य दवा के साथ प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य जटिलताओं या अन्य हेल्थ प्रॉब्लमस के बारे में जानना बहुत आवश्यक है। इससे संबंधित कुछ चेतावनी निम्नलिखित हैं:

  • मेटफॉर्मिन के साथ स्टेरॉयड, मूत्रवर्धक, एस्ट्रोजन की गोलियां, मौखिक गर्भनिरोधक दवाएं लेने से बचना चाहिए। ये दवाएं मेटफॉर्मिन के प्रभाव को कम करती हैं और इस प्रकार इसके उपयोग को अप्रभावी बनाती हैं।
  • मेटफॉर्मिन लेते समय शराब के सेवन से बचें। शराब के साथ मेटफोर्मिन से लैक्टिक एसिडोसिस और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • स्तनपान के दौरान मेटफॉर्मिन से बचें। मेटफोर्मिन दूध के द्वारा स्तनपान के समय नवजात के शरीर में पहुँच सकती है इसलिए स्तनपान की अवस्था में इसे न लें।
  • किड्नी और लिवर की बीमारियों वाले लोग मेटफॉर्मिन के सेवन को सीमित करें या उससे बचें। मेटफोर्मिन को सही मात्रा में लेने से पहले किडनी और लीवर की जांच जरूर करवाएं।
  • सांस लेने में समस्या और संचार संबंधी समस्याओं (circulatory problems) वाले लोगों को मेटफॉर्मिन के उपयोग से बचना चाहिए।
  • सर्जरी या एमआरआई स्कैन या सीटी स्कैन कराने वाले लोगों को डॉक्टर को मेटफॉर्मिन के उपयोग के बारे में सूचित करना चाहिए।
  • सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया हाइपोग्लाइसीमिया का कारण बन सकता है। जबकि आयोडीन युक्त कंट्रास्ट एजेंट जो एमआरआई और सीटी स्कैन से पहले दिए जाते हैं, लैक्टिक एसिडोसिस के जोखिम पैदा कर सकते हैं।

इसलिए, मेटफॉर्मिन का उपयोग करने से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में चर्चा करें। उपयोग के उचित दिशानिर्देशों का पालन करें और किसी भी समस्या के मामले में तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।

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सारांश

सर्जरी, एमआरआई और सीटी स्कैन से पहले, किडनी और लीवर की बीमारी के साथ, शराब के साथ, स्टेरॉयड और मूत्रवर्धक दवाइयों के साथ मेटफॉर्मिन लेने से बचें।

मेटफॉर्मिन से संबंधित सामान्य मुद्दे और सलाह

मेटफोर्मिन और नींद की समस्या

मेटफोर्मिन और नींद की समस्या

क्या मेटफोर्मिन आपको सुलाती है या मेटफोर्मिन लेने से नींद ज़्यादा आती है?

मेटफोर्मिन का एक सामान्य दुष्प्रभाव या साइड-इफेक्ट यह है कि यह आपको नींद या चक्कर आने का एहसास करा सकती है। अगर आपको धुंधली दृष्टि, चक्कर आने के साथ एकाग्रता में कठिनाई जैसी अन्य समस्याएं हैं तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। यह हाइपोग्लाइसीमिया या आपके रक्त शर्करा के स्तर में कमी के वजह से हो सकता है।

मेटफोर्मिन अनिद्रा

कई अध्ययनों में पाया गया है कि मधुमेह वाले लोगों को नींद के पैटर्न की समस्या होती है। यह रक्त शर्करा के स्तर में भिन्नता के कारण है। लेकिन जब एक मधुमेह रोगी अवसाद या डिप्रेशन से पीड़ित हो तो यह अनिद्रा की समस्या का कारण बनता है। ऐसे मामलों में, मेटफोर्मिन अनिद्रा को और अधिक बढ़ा सकता है। इसलिए insomnia या अनिद्रा  मेटफॉर्मिन का एक अनचाहा दुष्प्रभाव या साइड-इफेक्ट है। यह दुष्प्रभाव दवा लेने के कुछ दिनों के भीतर ही पता चल जाता है।

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मेटफोर्मिन और टूथ क्षय या टूथ डिके

मधुमेह का संबंध दांतों की सड़न से है। मधुमेह के दौरान, हड्डियों के पुनर्जीवन (bone resorption) की दर बढ़ जाती है और इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। यह पेरीओडोंटाइटिस को बढ़ाने के साथ दांतों की सड़न का कारण बन सकता है। इसलिए मधुमेह रोगियों को अपने दांतों की देखभाल की बहुत ज़रूरत होती है इसलिए समय-समय पर डेन्टिस्ट से परामर्श लें।

दूसरी ओर, मेटफोर्मिन हड्डियों के पुनर्जीवन (bone resorption) की दर को कम कर के हड्डियों के क्षय को कम करने में मदद करता है। इस प्रकार यह सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल पीरियोडॉन्टल या डेंटल थेरेपी के परिणामों को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस प्रकार, मेटफोर्मिन दांतों की सड़न का कारण नहीं बनता है, बल्कि मधुमेह के वजह से दांतों की सड़न होती है।

मेटफोर्मिन और अवसाद/ मेटफोर्मिन और डिप्रेशन

क्या मेटफॉर्मिन अवसाद या डिप्रेशन का कारण बन सकता है?

इंसुलिन प्रतिरोध या इंसुलिन रेज़िस्टेंस जो मधुमेह का कारण है वह चिंता और अवसाद से जुड़ा हुआ है। मधुमेह में, रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव से नींद संबंधी परहसानिया बढ़ जाती हैं। तनाव के साथ-साथ ये नींद संबंधी समस्याएं आगे चल कर डिप्रेशन या अवसाद का कारण बनती हैं। इस प्रकार तनाव व मधुमेह साथ जुड़ कर अवसाद का कारण बनते है।

वहीं दूसरी ओर मेटफोर्मिन डिप्रेशन के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। यह चिकित्सकीय रूप से सिद्ध है कि मेटफोर्मिन मधुमेह या डाईबिटीज़ के साथ एंटीडिप्रेसेंट की तरह काम करते हुए डिप्रेशन का भी उपचार करने में मदद करती है। यह मेंटल हेल्थ में भी सुधार करती है। इस प्रकार, मेटफॉर्मिन अवसाद का कारण नहीं बनता है बल्कि यह मधुमेह रोगियों में अवसाद के इलाज में मदद करता है।

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निष्कर्ष

मधुमेह के दौरान रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव का इलाज करने के लिए डॉक्टर मेटफॉर्मिन का उपयोग दवा के रूप में करते हैं। महिलाओं में इसका उपयोग पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के इलाज के लिए भी किया जाता है। मेटफॉर्मिन उपचार लेने से पहले आपको डॉक्टर को अपनी सभी हेल्थ डिटेल्स देनी चाहिए जिससे व आपको सही परामर्श दे सके। इसी के साथ आपको सही मात्रा में इसकी खुराक लेनी चाहिए और अधिक मात्रा लेने से बचना चाहिए। यदि आप दवा के किसी भी दुष्प्रभाव या साइड-इफेक्ट को नोटिस करते हैं, तो तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

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FAQs:

मेटफॉर्मिन के दुष्प्रभाव कितने समय तक चलते हैं?

दवा मेटफॉर्मिन के सामान्य दुष्प्रभाव आम तौर पर कम समय के लिए ही होते हैं। ये 2 सप्ताह तक चल सकते हैं। लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव महीनों और कभी-कभी वर्षों तक रह सकते हैं। लेकिन अगर सामान्य दुष्प्रभाव बार-बार दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

क्या मेटफोर्मिन से किडनी की समस्या हो सकती है?

यह काफी आमतौर पर माना जाता है कि मेटफॉर्मिन गुर्दे की समस्या या किडनी प्रॉब्लम पैदा कर सकती है। लेकिन मेटफोर्मिन से किडनी खराब नहीं होती है। किड्नी खराब होंए का प्रमुख कारण है खराब डाईबिटीज़ मेनेजमेंट। यदि किसी को पहले से ही किड्नी की बीमारी है तो मेटफोर्मिन का उपयोग इसे और बढ़ा सकता है। ऐसे में डॉक्टर ऐसे मरीजों को मेटफॉर्मिन देने से पहले ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। अन्यथा, मेटफॉर्मिन का उपयोग सीमित करें या उससे बचें।

क्‍या Metformin के कारण मधुमेह हो सकता है?

गैर-मधुमेह रोगियों में मेटफॉर्मिन के प्रभाव के संबंध में रिसर्च अभी भी जारी है। लेकिन शुरुआती शोध बताते हैं कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, बीटा-ब्लॉकर्स जैसी कुछ दवाएं मधुमेह का कारण बन सकती हैं। जहां कुछ मामलों में ऐसी दवा से होने वाली डाईबिटीज़ रीवर्स की जा सकती है, कई मामलों में यह स्थायी हो जाती है यानि रिवर्स नहीं की जा सकती।
कई शोध बताते हैं कि मेटफोर्मिन मधुमेह के अलावा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में भी असरदार है जैसे डिप्रेशन, वेट मेनेजमेंट, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, आदि। लेकिन आज तक इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मेटफॉर्मिन मधुमेह का कारण बनता है।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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