क्या डायबिटीज में केला खा सकते है?

मधुमेह रोगियों या डाइबीटिक्स को अपनी डाइट पर बहुत ध्यान देने की ज़रूरत है। जहां कुछ फल और सब्जियां आपके लिए बहुत पौष्टिक होती हैं, वहीं कुछ ऐसे फल व सब्जियाँ भी होती है जो आपके शुगर लेवल्स को बढ़ा सकती है। ऐसा ही एक लोकप्रिय फल है “केला”। लेकिन सवाल यह उठता है कि “क्या केला मधुमेह या डाईबिटीज़ के लिए अच्छा है?” यही जानने के लिए हम इस ब्लॉग को आगे पढ़ेंगें।

मध्यम मात्रा या लिमिटेड मात्रा में केले का सेवन मधुमेह वाले व्यक्तियों के लिए सुरक्षित माना जाता है। केला एक बहुतायत से उगाया जाने वाला फल है। यह गुच्छे में उगता है जिनकी संख्या प्रति गुच्छा 50 से 150 तक होती है। यह कई आकार यानि छोटे से लेकर एक्स्ट्रा बिग में आते हैं। यह हाई पोटेशियम फल क्या हाई शुगर के मरीजों के लिए सुरक्षित है? आइए पढ़ें।

केले में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो रक्त शर्करा को बढ़ाते हैं

मधुमेह वाले व्यक्ति को अपनी रोज़ की डाइट में कार्ब की मात्रा के बारे में पता होना चाहिए। कार्ब्स अन्य पोषक तत्वों की तुलना में किसी व्यक्ति के ग्लूकोज स्तर को अधिक बढ़ाते हैं। इस प्रकार वो आपके शुगर मेनेजमेंट को बहुत ज़्यादा प्रभावित करते हैं।

जब गैर-मधुमेह वाले लोगों में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है, तो उनके शरीर में हार्मोन, इंसुलिन बनता है। यह ग्लूकोज को ब्लडस्ट्रीम से बाहर निकाल कर शरीर की कोशिकाओं में ले जाने में सहायता करता है। वहां इसे स्टोर और उपयोग किया जाता है। लेकिन डाइबीटिक्स में यह एक्स्ट्रा शुगर ठीक से प्रोसेस नहीं हो पाती और रक्त प्रवाह में बनी रहती है। इसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन बनाने में विफल रहता है या कोशिकाएं इंसुलिन प्रतिरोधी या इंसुलिन रेज़िस्टेंट बन जाती हैं। ऐसे में डाईबिटीज़ मेनेजमेंट नहीं करने पर हाई कार्ब वाला खाना ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसे कंट्रोल नहीं करने पर पूरे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

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केला और मधुमेह (केला और डाईबिटीज़)

क्या डायबिटीज में केला खा सकते है?

मधुमेह के रोगी कम मात्रा या सीमित मात्रा में केला खा सकते हैं। डाइबीटिक अपनी डाइट में कार्ब की मात्रा के अनुसार नियंत्रित मात्रा में केले को शामिल कर सकता है। इस फल में अच्छी मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल मौजूद होते है जो मधुमेह के लोगों को पोषण दे सकते हैं लेकिन मात्रा का ज़रूर ध्यान रखें।

एडीए के अनुसार डाइबीटिक व्यक्ति को केले के फ़ायदे प्राप्त करने के लिए एक छोटा टुकड़ा या ½ बड़े केले का सेवन सही रहता है। डाईबिटीज़ में फलों को अपनी डाइट में शामिल करना बहुत ज़रूरी है लेकिन हर फल की मात्रा का ध्यान रखें।

सारांश

कम जीआई वाले खाद्य पदार्थ जिनका जीआई मान 55 या उससे कम हो वो डाईबिटीज़ के लिए अच्छा माना जाता है।  है। डाइबीटिक लोग फलों का आनंद ले सकते हैं बशर्ते उन्हें इसकी सही मात्रा का ज्ञान हो। किसी फल का आपके ब्लड शुगर पर प्रभाव जानने के लिए उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) का उपयोग कर सकते हैं। यह बताता है कि कोई फल कितनी तेज़ी या धीमे आपकी रक्त शर्करा को बढ़ाता है। केले का जीआई कम होता है। अध्ययनों के अनुसार, पके केले में 51 का जीआई मान होता है।

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केले की पोषण संबंधी जानकारी या न्यूट्रीशनल वेल्यू

केले में मौजूदा पोषण

कुल मिलाकर, केले में कम संतृप्त वसा और सोडियम होता है। यह फल पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर होता है। इसके अलावा, उनमें उच्च मात्रा में पोटेशियम होता है, जो एक ऐसा मिनरल है जो रक्त में सोडियम के स्तर को संतुलित करने में सहायता करता है।

इसके अलावा, केले में अन्य पोषक तत्वों का अच्छा मिश्रण होता है, जैसे:

  • विटामिन सी
  • विटामिन बी6
  • मैग्नीशियम
  • मैंगनीज

हरे केले में मौजूद स्टार्च रेसिस्टेंस

प्रत्येक फल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा उसके कच्चे व पके हुए प्रकार में भिन्न होती है। हरे या कच्चे केले में पीले केले की तुलना में उच्च प्रतिरोधी स्टार्च और कम चीनी होती है। प्रतिरोधी स्टार्च ऊपरी आंत में पाचन से प्रभावित नहीं होता है। और, इसका मतलब है कि यह फाइबर की तरह ही काम करता है। नतीजतन, यह रक्तप्रवाह या ब्लडस्ट्रीम में ग्लूकोज के स्तर को नहीं बढ़ाता है। हरे केले का जीआई वैल्यू 30 से 50 के बीच होता है।

इसके अलावा, हरे केले आंत के बैक्टीरिया के लिए भी फ़ायदेमंद होते हैं और डाईबिटीज़ मेनेजमेंट में एक व्यक्ति की सहायता करते हैं। अध्ययनों के अनुसार, प्रतिरोधी स्टार्च टाइप 2 डाईबिटीज़ में ज़्यादा सहायता करते हैं। यह सूजन या ईनफ्लेमेशन को कम करके और इंसुलिन सेन्सिटिविटी  में सुधार करके टाइप 2 डाइबीटिक के शुगर लेवल को नियंत्रित करते हैं।

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केले में उच्च विटामिन बी 6 होता है

क्या आप जानते हैं कि डाईबिटीज़ से संबंधित जटिलताओं को रोकने के लिए विटामिन बी 6 महत्वपूर्ण है। केले में अच्छी मात्रा में विटामिन बी 6 होता है जो डाईबिटीज़ से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं को कम करता है जैसे:

  • कम ग्लूकोज टोलेरेन्स
  • न्युरोपेथी
  • जेस्टेशनल मधुमेह या गर्भावधि मधुमेह

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केला एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है

अध्ययनों के अनुसार, एंटीऑक्सिडेंट टाइप 2 मधुमेह या टाइप 2 डाईबिटीज़ के विकास को कम करते है और उसमें देरी करते हैं। साथ ही यह फ्री रेडिकल्स के बनने को भी रोकते हैं जिससे कई गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। हालांकि एंटीऑक्सिडेंट टाइप 2 डाईबिटीज़ को मेनेज करने में कितने प्रभावी होते हैं उस पर और अध्ययन की आवश्यकता है इसलिए बहुत अधिक एंटीऑक्सिडेंट लेने की सलाह नहीं दी जाती है।

सारांश

लगभग सभी फलों में फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो हृदय रोगों के जोखिम, कैंसर और स्ट्रोक को कम करते हैं। यह सभी स्थितियाँ मधुमेह, हृदय की समस्याओं या अन्य पुरानी बीमारियों के होने के रिस्क से जुड़ा है। अतः मधुमेह रोगियों को केले का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए जिससे इसके लाभ प्राप्त किये जा सकें।

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केले को पकाने और बनाने की विधि

मधुमेह में केले को processed करके बनाई हुई खाद्य सामग्री से बचना चाहिए जैसे की सूखे केले के चिप्स जिन्हें एक हेल्दी स्नैक के नाम पर बेचा जाता है।

इस स्वस्थ कहे जाने वाले स्नैक्स में स्वाद बढ़ाने के लिए अतिरिक्त शक्कर या सिरप शामिल हो सकते हैं। केले के चिप्स की एक सर्विंग के सेवन से एक छोटे, ताजे केले की तुलना में ग्लूकोज स्पाइक लाने की अधिक संभावना रहती है। इसलिए किसी भी खाने के प्रोडक्ट के पोषण लेबल को ध्यान से पढ़ें। इसके अलावा, लोगों को अतिरिक्त चीनी वाले सूखे मेवों से भी बचना चाहिए या सीमित मात्रा में खाना चाहिए।

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डाइट और सेफ़्टी टिप्स

कुछ ऐसे तरीके हैं जिन्हें अपना कर मधुमेह व्यक्ति अपने खाने में केले को स्वस्थ रूप से शामिल कर सकते हैं।

प्रोटीन या स्वस्थ वसा स्रोत के साथ केले लें

असंतृप्त वसा के स्रोत के साथ केले का सेवन करें जिनमें शामिल है:

  • अखरोट
  • बादाम मक्खन (almond butter)
  • पिसता
  • मूंगफली का मक्खन (पीनट बटर)
  • सनफ़्लावर के बीज

यह कॉमबीनेशन रक्त शर्करा के स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और इसके स्वाद में सुधार करते हैं। मधुमेह के रोगियों के लिए एक और स्वस्थ विकल्प केले को ग्रीक योगर्ट जैसे प्रोटीन के साथ मिलाना है। यह एक व्यक्ति को लंबी अवधि तक पेट भर हुआ महसूस करने में मदद करेगा। इसके अलावा, यह दिन के दौरान नाश्ता करने की इच्छा को कम करता है, जिससे उन्हें ग्लूकोज नियंत्रण में सहायता मिलती है साथ ही वज़न भी कंट्रोल रहता है।

कोशिश करें कि केले के अधपके रूप का सेवन ज़्यादा करें।  कच्चे केले शरीर में ग्लुकोज़ को धीमी गति से रीलीज़ करते हैं जिससे शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। साथ ही, कच्चे केले में पके हुए केले की तुलना में अधिक मात्रा में स्टार्च होता है। एक व्यक्ति का शरीर कम मिश्रित ग्लूकोज के रूप में आसानी से स्टार्च को नहीं तोड़ पाता और रक्त शर्करा के स्तर में धीमी वृद्धि करता है।

सारांश

एक केले में मौजूद ग्लुकोज़ उसके पोर्शन पर निर्भर होता है। केले विभिन्न आकारों में आते हैं। यदि कोई व्यक्ति छोटे फल का चुनाव करता है तो वह कम संख्या में कार्ब्स का सेवन करेगा। एक छोटा केला (छह से सात इंच लंबा) में प्रति सर्विंग 23.07 ग्राम कार्ब्स होता है। जबकि, एक बड़े केले में 35 ग्राम से अधिक कार्ब्स होते हैं।

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कार्बोहाइड्रेट पर नियंत्रण रखें

7 से 8 इंच के केले में लगभग 26 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। किसी व्यक्ति के लिए ज़रूरी कार्ब खपत को निर्धारित करने के बाद ही केले की मात्रा निश्चित करें और इसके लिए अपने डाइटीशीयन की मदद लें।

एक डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट आपको आपके शरीर के लिए ज़रूरी फाइबर, वसा, कार्ब्स, प्रोटीन की मात्रा के बारे में अच्छे से बता पाता है। यदि आपको डाईबिटीज़ है तो यह और ज़रूरी हो जाता है कि आप अपनी डाइट का खास ख्याल रखें और एक डाइबीटिक डाइट लें। याद रखें कि एक कार्ब स्रोत जैसे टोस्ट या अनाज के साथ केले का सेवन करना आपके टोटल कार्ब कन्सम्शन को बढ़ाता है।

चिकित्सक के पोषण संबंधी सुझाव के आधार पर, कम कार्ब्स युक्त भोजन करने के बाद, एक व्यक्ति एक छोटे केले को अपने बचे हुए कार्ब्स की मात्रा के अनुसार एक स्नैक के रूप में अपने खाने में शामिल कर सकता है।

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मधुमेह रोगी एक दिन में कितने केले खा सकते हैं?

मधुमेह में कितने केले खा सकते है?

इस प्रश्न का उत्तर हर व्यक्ति, उनके व्यायाम और रक्त शर्करा या ब्लड शुगर के स्तर पर फलों के प्रभाव पर निर्भर करता है। कुछ लोगों का ब्लड शुगर दूसरों की तुलना में केले के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। यह ज़रूर पता करें कि आपकी ब्लड शुगर पर केले का क्या प्रभाव है इससे आप अपनी दवा व इंसुलिन शॉट्स भी निर्धारित कर सकते हैं। इससे बेहतर डाईबिटीज़ मेनेजमेंट में भी सहायता मिलती है। अपनी डाइबीटिक डाइट में केले को शामिल करने के बारे में डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से चर्चा अवश्य करें।

सारांश

मधुमेह रोगियों के लिए केला एक सुरक्षित और पौष्टिक फल है। स्वस्थ और संतुलित डाइट प्लान के हिस्से के रूप में लोग इस फल को कम मात्रा में खा सकते हैं। एक मधुमेह व्यक्ति को अपने भोजन में ताजे, प्लांट फूड के विकल्प जैसे फलों और सब्जियों को शामिल करना चाहिए। केले कम कैलोरी के साथ पर्याप्त पोषण प्रदान करते हैं। एक परफेक्ट डाइट प्लान के लिए, आहार विशेषज्ञ या मधुमेह विशेषज्ञ से बात करना हमेशा बेहतर होता है।

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FAQs:

क्या डायबिटीज़ वाला व्यक्ति रोज़ाना केला खा सकता है?

मधुमेह वाले लोग केले का सेवन कर सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। एक छोटा केला सप्ताह में दो या तीन बार मधुमेह के रोगियों के लिए सुरक्षित माना जाता है। हालाँकि, एक मधुमेह व्यक्ति को इस फल का प्रतिदिन सेवन नहीं करना चाहिए।

केले के दुष्प्रभाव या साइड-इफ़ेक्ट्स क्या हैं?

इस फल के बहुत ही कम साइड इफ़ेक्ट्स यानि न क बराबर हैं। हालांकि, इसके कुछ हल्के साइड इफ़ेक्ट्स जैसे एसिडिटी, ऐंठन, सूजन, मतली, सॉफ्ट स्टूल, उल्टी आदि देखे जा सकते हैं। बहुत अधिक मात्रा में इसे खाने पर पोटेशियम का लेवल बहुत अधिक बढ़ सकता है। कुछ व्यक्ति केले के प्रति अतिसंवेदनशील भी होते हैं।

क्या रोजाना एक केला खाने से शुगर बढ़ सकती है?

केले में बहुत ज़्यादा मात्रा में शुगर नहीं होती और इसका जीआई भी कम होता है लेकिन इसकी कार्ब मात्रा ग्लुकोज़ का स्तर बढ़ा सकती है। इसलिए केले को सीमित मात्रा में अपने कार्ब काउन्ट के हिसाब से खाएं। कच्चे केले पके केले की तुलना मे कम शुगर लेवल को बढ़ाते हैं।

केला खाने का सही समय क्या है?

केला खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का समय होता है। अन्य फलों या दलिया के साथ केला खाना सबसे अच्छा है। और यह कोम्बीनेशन उन लोगों के लिए बहुत बढ़िया है जो अपने वज़न को कम करने में लगे हैं। केले का सेवन केले-ओटमील कुकीज के रूप में किया जा सकता है। यह विकल्प स्वस्थ और स्वादिष्ट है और आपको एनर्जी देने में भी मदद करता है।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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