बिना खून के शुगर टेस्ट करने वाली मशीन (नॉन इनवेसिव ग्लूकोज मीटर)- Sugar Testing Machine without Blood

Medically Reviewed By DR. MOHAMMAD SULEMAN, Consultant Diabetologist, MBBS दिसम्बर 6, 2023

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के इस समय में शुगर मैनेजमेंट ने एक लंबा सफर तय किया है। इस क्षेत्र में एक और नई शुरुआत हुयी है ब्लड का इस्तेमाल किये बिना शुगर टेस्टिंग मशीन के रूप में।  इन डिवाइस ने शुगर के मरीजों के ब्लड शुगर लेवल की जांच करने के तरीके को बदल दिया है,जो पुराने तरीकों की अपेक्षा ज्यादा आसान हैं।

इस ब्लॉग में हम बिना खून का इस्तेमाल किये ब्लड शुगर लेवल की जांच करने के तरीकों और डिवाइस के बारे में बात करेंगे। उनके लाभ, वे कैसे काम करते हैं और भी काफी जरुरी बातों के बारे में चर्चा करेंगें।

बिना खून वाली शुगर टेस्ट मशीन क्या है और हमें इसकी जरूरत क्यों है?

पुराने तरीकों में जांच के लिए ब्लड की जरुरत होती थी जिसके लिए हमारी त्वचा से पिन के माध्यम से ब्लड निकाला जाता था। यह विधि प्रभावी है लेकिन काफी  दर्दनाक और असुविधाजनक हो सकती है। बिना खून के शुगर टेस्टिंग मशीन का लक्ष्य इन सभी समस्याओं को दूर करके इस प्रक्रिया को आसान बनाना है।

और पढ़े : शुगर मशीन का उपयोग कैसे करें?

नियमित ब्लड शुगर निगरानी का महत्व

इससे पहले कि हम ब्लड के बिना शुगर टेस्ट मशीनों के बारे में जाने हमें शुगर मैनेजमेंट में नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानना जरुरी है। निगरानी से शुगर के मरीजों को मदद मिलती है।

  • जरूरत के हिसाब से उनकी दवा या इंसुलिन की खुराक को एडजस्ट करें।
  • सोच-समझकर डाइट प्लान करें।
  • उनके ब्लड शुगर लेवल के पैटर्न और ट्रेंड को पहचानें।
  • शुगर से जुडी परेशानियों के जोखिम को कम करने का प्रयास करें।
  • बिना ब्लड के शुगर टेस्टिंग मशीन कैसे काम करती हैं।

बिना खून की शुगर टेस्टिंग मशीनें जिन्हें नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मीटर के रूप में भी जाना जाता है, ब्लड सैंपल के बिना ब्लड शुगर लेवल को मापने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करती हैं।

इन उपकरणों(डिवाइस) में उपयोग की जाने वाली कुछ सामान्य विधियाँ इस प्रकार हैं-

इन्फ्रारेड टेक्नोलॉजी

बिना ब्लड के कुछ शुगर टेस्टिंग मशीनें त्वचा के माध्यम से ग्लूकोज लेवल को मापने के लिए इन्फ्रारेड तकनीक का उपयोग करती हैं। यह तकनीक बिना ब्लड के लाइट एब्जॉर्ब करने और रिफ़्लेक्शन पैटर्न के माध्यम से ब्लड शुगर लेवल का अनुमान लगा सकती है।

यह कैसे काम करता है इसकी स्टेप-बाई-स्टेप व्याख्या यहां दी गई है-

  • डिवाइस त्वचा पर(उंगलियों या अन्य सुविधाजनक जगह पर) इन्फ्रारेड लाइट डालता है।
  • प्रकाश का कुछ भाग त्वचा द्वारा एब्जॉर्ब कर लिया जाता है जबकि कुछ वापस रिफ्लेक्ट कर दिया जाता है।
  • डिवाइस का सेंसर ग्लूकोज लेवल को कम करने के लिए लाइट एब्जॉर्ब करने के पैटर्न का एनालिसिस करता है।

इन्फ्रारेड तकनीक जल्दी परिणाम प्रदान कर सकती है और इसे खतरनाक नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें त्वचा को छेदने या ब्लड कलेक्ट करने की जरूरत नहीं होती है।

स्पेक्ट्रोस्कोपी

स्पेक्ट्रोस्कोपी में त्वचा पर प्रकाश डालकर यह देखा जाता है की यह त्वचा की सतह के नीचे मौजूद मॉलिक्यूल्स(अणुओं) के साथ कैसे क्रिया करता है। इन क्रियाओं में बदलाव के माध्यम से ब्लड शुगर लेवल के बारे में जानकारी मिल सकती है।

यहां एक सरल तरीके से समझाया गया है-

  • डिवाइस त्वचा के माध्यम से प्रकाश की स्पेशल वेवलेंथ उत्सर्जित करता है।
  • प्रकाश त्वचा के नीचे ग्लूकोज सहित सभी अणुओं के साथ संपर्क करता है।
  • प्रकाश इन अणुओं पर जैसा प्रभाव डालता है इसके माध्यम से यह डिवाइस ग्लूकोज लेवल का अनुमान लगा सकता है।

स्पेक्ट्रोस्कोपी आसन और तेज़ ग्लूकोज रीडिंग देता है।

रिवर्स आयनोफोरेसिस

रिवर्स आयनोफोरेसिस एक ऐसी तकनीक है जो त्वचा के माध्यम से ग्लूकोज रीडिंग पता करने के लिए हल्के इलेक्ट्रिकल करंट(विद्युत प्रवाह) का उपयोग करती है। यह ब्लड के बिना शुगर टेस्टिंग मशीन में उपयोग किया जाने वाला एक और तरीका है। इस विधि में त्वचा पर हल्के इलेक्ट्रिकल करंट(विद्युत प्रवाह) का उपयोग किया जाता है, जो इंटरस्टीशियल फ्लूइड(कोशिकाओं के बीच का तरल पदार्थ) से त्वचा की सतह तक ग्लूकोज और अन्य आयनों की गति को प्रेरित करता है।

इसके काम करने का तरीका-

  • डिवाइस में एक छोटा इलेक्ट्रोड होता है जिसे त्वचा पर लगाया जाता है।
  • इलेक्ट्रोड हल्का इलेक्ट्रिकल करंट(विद्युत प्रवाहित) करता है।
  • करंट की वजह से त्वचा की सतह पर ग्लूकोज की गति बढ़ जाती है।
  • ब्लड शुगर लेवल का पता लगाने के लिए त्वचा की सतह पर स्टोर ग्लूकोज को डिवाइस द्वारा मापा जाता है।

रिवर्स आयनोफोरेसिस रियल टाइम डेटा का लाभ प्रदान करता है और इसे एक्सटेंडेट पीरियड में उपयोग किया जा सकता है,जो इसे निरंतर निगरानी के लिए सबसे सही बनाता है।

नैनोटेक्नोलॉजी

नैनोसेंसर त्वचा के माध्यम से ग्लूकोज लेवल का पता लगा सकता है और रियल टाइम डेटा प्रदान कर सकता है। उपयोग की जाने वाली स्पेशल नैनोसेंसर तकनीक के माध्यम से ग्लूकोज अणुओं का पता लगा सकते हैं और इन अणुओं को मापने लायक सिग्नल में बदल सकते हैं।

इनमें से हर एक तकनीक की अपनी स्ट्रेंथ और लिमिटेशन हैं, और ब्लड के बिना शुगर टेस्टिंग मशीनों की एक्यूरेसी अलग-अलग मॉडलों और ब्रांडों के बीच अलग हो सकती है। इसलिए एक बढ़िया और अपने शुगर मैनेजमेंट जरूरतों के हिसाब से अच्छा डिवाइस चुनने के लिए अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह लेना जरूरी है।

ब्लड के बिना शुगर टेस्टिंग मशीन पुरानी तरह की ब्लड वाली ग्लूकोज जांच वाली विधियों की जगह एक आसान और सुविधाजनक विकल्प है। ब्लड शुगर लेवल का पता लगाने के लिए नई तकनीकों जैसे इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी, रिवर्स आयनोफोरेसिस और नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। ये डिवाइस लगातार काम में आ रहे हैं जिससे शुगर के मरीजों को उनके शुगर मैनेजमेंट के लिए सुविधाजनक और यूजर फ्रैंडली डिवाइस उपलब्ध हो रहे हैं।

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खून के बिना ब्लड ग्लूकोज का पता करने वाली मशीनों के लाभ

खून के बिना ब्लड ग्लूकोज का पता करने वाली मशीनों के लाभ

बिना खून के ब्लड ग्लूकोज पता करने वाली मशीनों के लाभ शुगर के मरीजों के लिए स्पष्ट और आकर्षक हैं-

  • बिना दर्द का टेस्ट
  • सुविधा
  • वेस्ट मैटेरियल से छुटकारा
  • इंफेक्शन(संक्रमण) का कम खतरा
  • बेहतर गाइडेंस
  • प्राइवेसी का ध्यान
  • यूजर फ्रैंडली इंटरफ़ेस
  • रियल टाइम डेटा
  • हर उम्र के लोगों के लिए सही
  • लगातार बदलाव

1- बिना दर्द का टेस्ट

बिना खून के ग्लूकोज जांच मशीनों का सबसे बड़ा लाभ है दर्द न होना। पुरानी ग्लूकोज जांच के तरीकों में अक्सर ब्लड सैंपल के लिए त्वचा को पिन किया जाता है, जो शुगर के मरीजों के लिए चिंता और परेशानी का कारण हो सकता है।

वहीं बिना खून के जांच करने वाली मशीनें ब्लड शुगर लेवल की जांच करने के लिए बिना दर्द और स्ट्रेस फ्री तरीका प्रदान करती हैं। इस दर्द से शुगर मैनेजमेंट में काफी फायदा हो सकता है।

2- सुविधाजनक

बिना खून के ब्लड ग्लूकोज टेस्टिंग मशीनें यूजर्स की सुविधा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन की गई हैं। ये पोर्टेबल, कॉम्पैक्ट और उपयोग में आसान होते हैं, जिससे शुगर के मरीजों के लिए अपने ब्लड शुगर लेवल की जितनी बार जरूरी हो जांच कर सकते हैं किसी भी समय और किसी भी जगह। यह सुविधा निगरानी करने के लिए बहुत ही अच्छी है। यह प्रक्रिया तुरंत रिजल्ट देती है इसलिए यूजर के लिए इसे नियमित रूप से उपयोग करना काफी आसान हो जाता है।

3- वेस्ट मैटेरियल से छुटकारा

पुरानी ग्लूकोज मॉनिटरिंग तरीकों में अक्सर डिस्पोजेबल लैंसेट और टेस्ट स्ट्रिप्स का इस्तेमाल होता है जो जांच के बाद कचरे के रूप में बच जाता है। वहीं दूसरी तरफ बिना खून के ब्लड ग्लूकोज की जांच करने वाली मशीनों में इन सबका इस्तेमाल नहीं होता है। बिना स्ट्रिप्स के ब्लड शुगर की जांच करने वाली मशीन कचरे को कम करती है और शुगर मैनेजमेंट तकनीकी को ज्यादा इको-फ्रेंडली बनाती है।

4- इंफेक्शन(संक्रमण) का कम खतरा

उंगली में पिन चुभाने से इंफेक्शन का खतरा होता है, और अगर यह खतरा तब और बढ़ जाता है जब उचित साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता है। इसके ठीक विपरीत बिना खून के ब्लड ग्लूकोज जांच करने वाली मशीनों को त्वचा में छेद करने की जरूरत नहीं होती है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्हें लंबे समय तक नियमित रूप से ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग करने की जरूरत होती है।

5- बेहतर गाइडेंस

बिना खून के ब्लड ग्लूकोज टेस्ट मशीनों की बिना दर्द और बिना किसी परेशानी वाले तरीके से ब्लड शुगर निगरानी में आसानी होती है। जब जांच करना ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक होता है, तो शुगर के मरीजों द्वारा नियमित रूप से अपने ग्लूकोज लेवल की जांच करने की संभावना ज्यादा होती है, जिससे उन्हें अपने ट्रीटमेंट प्लान और लाइफस्टाइल में समय पर एडजस्टमेंट करने में मदद मिलती है।

6- प्राइवेसी का ध्यान

बिना ब्लड वाली टेस्ट मशीनें प्राइवेसी से किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करती हैं जो विशेष रूप से उन लोगों के लिए अच्छा हो सकता है जो अपने शुगर मैनेजमेंट को गुप्त रखना पसंद करते हैं। इन डिवाइस में किसी ब्लड सैंपल या किसी प्रकार के स्ट्रिप की जरूरत नहीं होती इसलिए इसे इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति अपने ग्लूकोज लेवल की जांच को पूरी तरह से गोपनीय रख सकता है।

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7- यूजर फ्रैंडली इंटरफेस

ये मशीनें यूजर फ्रेंडली इंटरफेस और स्पष्ट निर्देशों के साथ आती हैं, जिससे इन्हें इस्तेमाल करना काफी आसान हो जाता है। ये उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है जो टेक्निकल चीजों को इस्तेमाल करने में सहज नहीं रहते हैं। इन डिवाइस में रीडिंग पढ़ना आसान होता है और सीधा नेविगेशन होता है, जिससे इस्तेमाल करने वालों के लिए यह काफी आसान हो जाता है।

8- रियल टाइम डेटा

ये मशीनें ब्लड शुगर लेवल का रियल टाइम डेटा प्रदान करती हैं। जिससे शुगर के मरीजों को अपने डाइट, दवा, या इंसुलिन खुराक के संबंध में तत्काल निर्णय लेने में मदद मिलती है, जिससे उन्हें बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल करने और लो-ब्लड शुगर या हाई-ब्लड शुगर के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

9- हर उम्र के लोगों के लिए सही

ये मशीनें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के व्यक्तियों के लिए सही हैं। इनका यूजर फ्रैंडली डिज़ाइन और बिना दर्द वाली टेस्ट प्रक्रिया उन्हें बच्चों और विशेष रूप से बड़े वयस्क जिन्हें पुरानी उंगली में चुभने वाली जांच से डर लगता है के लिए काफी आसान और सुविधाजनक बनाती है।

10- लगातार बदलाव

प्रौद्योगिकी(टेक्नोलॉजी) और डिवाइस कैपेबिलिटी(उपकरण क्षमताओं) में लगातार हो रहे बदलावों से बिना ब्लड वाली जांच मशीनों का दायरा बढ़ रहा है। इस कारण इस्तेमाल करने वाले लोगों को भविष्य में और ज्यादा यूजर फ्रैंडली, एक्युरेट, और ज्यादा सुविधाओं से भरपूर डिवाइस मिल सकते हैं। जिससे बिना ब्लड वाली जांच मशीनों के लाभ को और बढ़ाएगा।

इस तरह बिना ब्लड वाली शुगर टेस्टिंग मशीनें शुगर के मरीजों के लिए कई तरह के लाभ देती हैं, जिसमें बिना किसी तरह के दर्द की जांच, सुविधाजनक, कम वेस्ट मैटेरियल, बढ़िया प्राइवेसी और आसान इस्तेमाल शामिल है। ये डिवाइस  न केवल ग्लूकोज मॉनिटरिंग को ज्यादा आरामदायक बनाते हैं बल्कि बेहतर शुगर मैनेजमेंट रिजल्ट में भी योगदान देते हैं, लेकिन किसी भी मॉडल को चुनने से पहले अपने डॉक्टर या हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह लेना जरूरी है।

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मधुमेह के लिए नॉन-इनवेसिव ग्लूकोमीटर

बिना ब्लड वाली टेस्ट मशीनें जिन्हें नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मीटर भी कहा जाता है ने अपनी सुविधाजनक और बिना दर्द वाली टेस्ट विधियों के लिए काफी लोकप्रियता हासिल की है। यहां ऐसे डिवाइस के कुछ उदाहरण दिए गए हैं साथ ही यह भी बताया गया है कि वे कैसे काम करते हैं-

ग्लूकोट्रैक डीएफ-एफ नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस

विवरण– ग्लूकोट्रैक डीएफ-एफ इंटीग्रिटी एप्लिकेशन द्वारा बनाया गया एक नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस है। यह पुरानी ब्लड सैंपल वाली जांच का एक आसान और बिना दर्द वाला विकल्प है। यह डिवाइस इयरलोब के माध्यम से ग्लूकोज लेवल को मापने के लिए अल्ट्रासोनिक, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और थर्मल टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। यह मशीन घरेलू उपयोग के लिए डिज़ाइन की गई है और तुरंत ग्लूकोज रीडिंग प्रदान करती है।

विशेषताएँ-

  • नॉन-इनवेसिव और बिना दर्द का टेस्ट।
  • रियल टाइम में ग्लूकोज की निगरानी।
  • डिजिटल डिस्प्ले के साथ यूजर फ्रैंडली इंटरफेस।
  • टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के लिए सही।
  • डेटा मैनेजमेंट और स्टोरेज क्षमता।
  • पोर्टेबल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन।

शुगरबीट नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटर

विवरण- शुगरबीट नेमौरा मेडिकल द्वारा बनाई गई एक नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटर है। यह पहनने लायक डिवाइस त्वचा की सतह के माध्यम से ग्लूकोज लेवल को मापने के लिए एक डिस्पोजेबल स्किन-पैच सेंसर का उपयोग करता है। यह बिना खून(ब्लड) के शुगर जांचने की एक अच्छी मशीन है। सेंसर को ऊपरी बांह पर लगाया जाता है और प्रतिदिन बदला जाता है। ग्लूकोज रीडिंग के लिए यूजर स्मार्टफोन ऐप से सेंसर को स्कैन कर सकते हैं।

विशेषताएँ-

  • नॉन-इनवेसिव बिना दर्द का टेस्ट।
  • सेंसर हर रोज बदला जा सकता है।
  • स्मार्टफोन ऐप से वायरलेस कनेक्टिविटी।
  • रियल टाइम ग्लूकोज डेटा और ट्रेंड।
  • हाई और लो ग्लूकोज लेवल के लिए अलर्ट।
  • कॉम्पैक्ट डिज़ाइन।

एवरसेंस कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम

विवरण- सेंसोनिक्स द्वारा बनाया गया एवरसेंस कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम ग्लूकोज की निगरानी के लिए एक बढ़िया तरीका प्रदान करता है। बिना स्ट्रिप्स के इस टेस्ट मशीन में एक चमड़े का सेंसर होता है जिसे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर द्वारा त्वचा के नीचे लगाया जाता है। सेंसर एक पहनने लायक ट्रांसमीटर के साथ होता है, जो स्मार्टफोन ऐप को ग्लूकोज डेटा प्रदान करता है।

विशेषताएँ-

  • लगातार निगरानी के लिए त्वचा के नीचे का सेंसर।
  • लंबा सेंसर लाइफ (90 दिन तक)।
  • स्मार्टफोन में वायरलेस डेटा ट्रांसमिशन।
  • रियल टाइम ग्लूकोज ट्रेंड और अलर्ट।
  • डेटा एनालिसिस के लिए यूजर फ्रैंडली ऐप।
  • टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के लिए सही।

नैनोटेक्नोलॉजी-बेस्ड ग्लूकोमीटर

भारत नैनोटेक्नोलॉजी-बेस्ड ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस में और आगे की तरफ देख रहा है। ये डिवाइस त्वचा की सतह के माध्यम से ग्लूकोज लेवल का पता लगाने के लिए नैनोसेंसर का उपयोग करते हैं, जो रियल टाइम डेटा प्रदान करते हैं।

विशेषताएँ-

  • हाई क्वालिटी और रियल टाइम की मॉनिटरिंग।
  • छोटा और पोर्टेबल।
  • लगातार ग्लूकोज मॉनिटरिंग क्षमता।
  • कई तरह के डिज़ाइन।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये उदाहरण नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मीटर में उपयोग की जाने वाली टेक्नोलॉजी को प्रदर्शित करते हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता और रेगुलेटरी अप्रूवल स्टेटस अलग हो सकती है। भारत में किसी भी नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस पर विचार करते समय, यह तय करना जरूरी है कि यह जरूरी मानकों को पूरा करता है और देश में उपयोग के लिए मान्य है।

इसके अलावा भारत में हेल्थ केयर एक्सपर्ट और शुगर एक्सपर्ट आपकी जरूरतों के आधार पर सबसे सही नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस का चयन करने के लिए गाइडेंस दे सकते हैं। नई शुगर जांच टेक्निक को अपनाने से पहले हमेशा अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह कर लें।

महत्वपूर्ण बात

ये बिना ब्लड वाली जांच मशीनें शुगर मैनेजमेंट में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती हैं और ब्लड शुगर लेवल की मॉनिटरिंग के लिए बिना दर्द वाली, सुविधाजनक और नॉन-इनवेसिव तरीके प्रदान करती हैं। ये उपकरण बहुत ही अच्छे और सुविधाजनक हैं, लेकिन किसी भी मॉडल का चयन करने से पहले एक बेहतर गाइडेंस के लिए अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से बात जरूर करें।

और पढ़े : कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (सीजीएम)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ऐसे कुछ डाइट या त्वचा से जुड़े हुए फैक्टर हैं जो बिना खून के शुगर की जाँच की एक्यूरेसी को प्रभावित कर सकते हैं?

त्वचा का तापमान, हाइड्रेशन लेवल और त्वचा पर कुछ पदार्थों की उपस्थिति बिना खून के ब्लड शुगर जाँच की एक्यूरेसी को प्रभावित कर सकते हैं। मशीन को बनाने वाली कंपनी द्वारा बताये गए गाइडलाइन का पालन करें और अपनी त्वचा को साफ़ सुथरा रखें।

क्या बिना खून वाली शुगर टेस्टिंग मशीनें सभी प्रकार के शुगर के मरीजों के लिए अच्छी हैं?

बिना ब्लड के शुगर टेस्टिंग मशीनें हर प्रकार के शुगर के मरीजों के लिए उपयुक्त हो सकती हैं, लेकिन उनके काम करने का प्रभाव अलग हो सकता है। यह जानने के लिए अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह लें।

क्या मैं तुरंत अपनी पुरानी जाँच तकनीकी को बिना खून वाली शुगर की जाँच तकनीकी से पूरी तरह बदल सकता हूँ?

बिना ब्लड वाली शुगर टेस्टिंग मशीनें सुविधा प्रदान करती हैं, पुरानी तकनीकी के साथ इसे एक कॉम्प्लीमेंट्री डिवाइस के रूप में उपयोग करना चाहिए। अपने शुगर मैनेजमेंट के बेहतर गाइडेंस के लिए अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह जरूर लें।

क्या बिना ब्लड वाली शुगर टेस्ट मशीनों का बीमा किया जाता है?

बीमा कवरेज अलग-अलग हो सकता है इसलिए यह सलाह दी जाती है कि आप अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर से बात करके यह कन्फर्म कर लें कि आपकी बिना खून वाली शुगर टेस्टिंग मशीन का बीमा कवरेज किया गया है या नही।

बिना खून के शुगर जांचने वाली मशीनें कितनी एक्युरेट हैं?

अलग मॉडलों और ब्रांडों के बीच एक्युरेसी अलग हो सकती है। एक बढ़िया और अपनी जरूरतों के हिसाब से डिवाइस  चुनने के लिए अपने हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर से सलाह लें।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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