बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना क्या हो सकता है शुगर का कारण।

रात में अचानक प्यास लगने से नींद खुल जाना और रात में बार-बार पेशाब आना। कई बार तो दिन में बार-बार प्यास और पेशाब आना। ये ऐसी परेशानी है जो बहुत से लोगों को कभी न कभी ज़रूर हुई होगी। लेकिन कुछ लोगों के लिए ये सिर्फ कभी कभार होने वाली परेशानी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाली एक गंभीर समस्या होती है।बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना, भले ही छोटी परेशानियां लगें, पर अक्सर ये किसी बड़ी बीमारी का इशारा भी हो सकती हैं। ऐसी कई बीमारियां हैं जिनके कारण बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आता है, और उनमें से सबसे आम है डायबिटीज। आज हम आपको बताएंगे कि बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आने के क्या कारण हो सकते हैं, इसका क्या मतलब है? बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना डायबिटीज का संकेत कैसे हो सकता है?

बार-बार प्यास लगना और पेशाब जाने का क्या मतलब है? 

बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना (Polydipsia & Polyuria) आम बात है, लेकिन ये कई बीमारियों की तरफ भी इशारा कर सकते हैं। थोड़ी-थोड़ी प्यास और पेशाब तो ठीक है, लेकिन ज़्यादा बार पेशाब जाना या बार-बार प्यास लगना परेशानी है। आज हम आपको बताएंगे कि ऐसा क्यों होता है, इसके क्या लक्षण हैं, डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं और इसका इलाज कैसे होता है। साथ ही, ये भी जानेंगे कि आप अपनी सेहत का ख्याल कैसे रख सकते हैं।

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बार-बार प्यास लगना (Polydipsia):

बार-बार प्यास लगने को Polydipsia कहते हैं। इसमें आपको हमेशा तरल पदार्थ पीने का मन करता है। बार-बार प्यास लगने के कुछ कारणों की बात करें तो-

  • पानी की कमी (Dehydration)– ज़्यादा पसीना आना या कम पानी पीना शरीर में पानी की कमी कर देता है। शरीर इसे पूरा करने के लिए प्यास लगाता है।
  • डायबिटीज़– टाइप 1 और टाइप 2 दोनों तरह की डायबिटीज़ में खून में शुगर बढ़ने से प्यास ज्यादा लग सकती है।
  • डायबिटीज़ इन्सिपिडस– ये एक खास बीमारी है, जिसमें शरीर पानी को रोक नहीं पाता। इससे बहुत प्यास लगती है और पेशाब भी ज़्यादा आता है।
  • कुछ दवाइयां– कुछ दवाइयां, जैसे पेशाब लाने वाली दवाइयां या मुंह सुखाने वाली दवाइयां, प्यास बढ़ा सकती हैं।

बार-बार प्यास लगने के साथ मुंह सूखना, होठ फटना, थकान और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। डॉक्टर आपसे बात करके, आपका चेकअप करके और खून और पेशाब की जांच करके पता लगाते हैं कि परेशानी क्या है।

पेशाब बार-बार आना (Polyuria):

पेशाब बार-बार आने को Polyuria कहते हैं। इसमें आपको बहुत बार पेशाब करने की जरूरत पड़ती है, और हर बार पेशाब की मात्रा भी ज्यादा हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं-

  • डायबिटीज़– शुगर की बीमारी में खून में शुगर बढ़ जाता है। शरीर इस ज़्यादा शुगर को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे पेशाब ज़्यादा आता है।
  • डायबिटीज़ इन्सिपिडस– ये एक खास बीमारी है, जिसमें शरीर पानी को रोक नहीं पाता। इससे बहुत पेशाब आता है।
  • यूरिन इन्फेक्शन– पेशाब की जगहों में इंफेक्शन होने से भी बार-बार पेशाब आता है, साथ में जलन या दर्द भी हो सकता है।
  • कुछ दवाइयां– कुछ दवाइयां, जैसे पेशाब लाने वाली दवाइयां, पेशाब ज़्यादा करा सकती हैं।

प्यास या पेशाब बार-बार आना परेशान कर सकता है, लेकिन इनसे घबराएं नहीं। कई आसान तरीके अपनाकर आप इन्हें कंट्रोल में रख सकते हैं।

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बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना क्यों खतरनाक है?

बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना क्यों खतरनाक है?

अक्सर प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना, सुनने में तो मामूली लगता है, लेकिन ये शरीर में कुछ गड़बड़ का इशारा भी हो सकते हैं। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो आगे चलकर कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। आइए, आज समझते हैं कि बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना खतरनाक क्यों हो सकता है:

डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी)

बार-बार प्यास लगना अक्सर शरीर डिहाइड्रेशन का संकेत देता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो ठीक से काम नहीं कर पाता और चक्कर आना, थकान और मुंह सूखना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। अगर लापरवाही की जाए तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन, हीटस्ट्रोक (लू) और यहां तक कि अंगों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

हाइपरग्लाइसीमिया (खून में शुगर का बढ़ना)

अगर बार-बार पेशाब करना और साथ ही प्यास भी तेज लग रही है तो ये खून में शुगर का बढ़ना यानी हाइपरग्लाइसीमिया का संकेत हो सकता है। डायबिटीज जैसी बीमारियों में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता (टाइप 1 डायबिटीज) या फिर इंसुलिन के असर को मानने से इनकार कर देता है (टाइप 2 डायबिटीज), जिससे खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। अगर इसका इलाज न किया जाए तो हाइपरग्लाइसीमिया शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे नसों को खराब करना, किडनी की बीमारी और दिल से जुड़ी समस्याएं।

डायबिटीज के खतरे

अनियंत्रित डायबिटीज में हाइपरग्लाइसीमिया के अलावा भी कई खतरे होते हैं, जो आंखों को (डायबिटिक रेटिनोपैथी), किडनी को (डायबिटिक नेफ्रोपैथी), नसों को (डायबिटिक न्यूरोपैथी) और दिल और दिमाग को (हृदय रोग और स्ट्रोक) प्रभावित कर सकते हैं। बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना डायबिटीज या अनियंत्रित डायबिटीज के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे में इन जटिलताओं को रोकने के लिए जल्दी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

बार-बार पेशाब आना, खासकर अगर पेशाब करते समय जलन या दर्द हो तो ये यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI का संकेत हो सकता है। UTI तब होता है जब बैक्टीरिया मूत्र मार्ग में घुसकर वहां बढ़ने लगते हैं, जिससे बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होती है और पेशाब करते समय तकलीफ होती है। अगर UTI का इलाज न किया जाए तो ये किडनी में गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

अन्य गंभीर बीमारियां

बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना किडनी की बीमारी, हार्मोन असंतुलन (जैसे थायराइड की बीमारी) या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। इन समस्याओं का पता लगाकर उनका इलाज करना जरूरी है ताकि आगे चलकर कोई जटिलता न हो और आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहे।

कभी-कभी प्यास लगना और पेशाब करना तो शरीर की सामान्य क्रिया का हिस्सा है। लेकिन अगर ये बार-बार या बहुत ज्यादा हो रहे हैं तो ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं और ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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बार-बार प्यास लगने और ज्यादा पेशाब आने पर क्या करें? 

बार-बार प्यास लगने और ज्यादा पेशाब आने पर क्या करें? 

अगर आपको बार-बार प्यास लग रही है और आप बार-बार पेशाब कर रहे हैं, तो इन पर ध्यान देना ज़रूरी है। इन लक्षणों का कारण जानने और उन्हें दूर करने के लिए कुछ ज़रूरी कदम आप खुद उठा सकते हैं:

खूब पानी पिएं

बार-बार पेशाब जा रहे हैं तो डिहाइड्रेशन की आशंका ज़्यादा है। इसलिए खूब पानी पीना ज़रूरी है। दिन भर में नियमित अंतराल पर पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। लेकिन मीठे या कैफीन वाले पेय पदार्थों से परहेज़ करें। ये प्यास और बढ़ा सकते हैं और डिहाइड्रेशन कर सकते हैं।

शुगर लेवल चेक करें

अगर आपको डायबिटीज है या इसका खतरा है, तो घर पर ही ग्लूकोमीटर से नियमित रूप से अपना शुगर लेवल चेक करें। ऊँचा शुगर लेवल भी प्यास और पेशाब बढ़ा सकता है। अगर आपका शुगर ज़्यादा रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लें और अपना इलाज कराएं।

खान-पान का ध्यान रखें

अपने खाने-पीने का ध्यान रखें और हेल्दी चीज़ें खाएं। ऐसा करने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और डिहाइड्रेशन नहीं होता। फाइबर, साबुत अनाज, हल्का प्रोटीन, फल और सब्जियों से भरपूर डाइट लें। मीठी और प्रोसेस्ड चीज़ें कम खाएं। ये शुगर लेवल बढ़ा सकती हैं।

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दवाएं लें

अगर आपको डायबिटीज या कोई और बीमारी है, जिसके लिए डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे डॉक्टर के बताए अनुसार ही लें। दवाइयां ठीक से लेने से लक्षणों को कंट्रोल में रखा जा सकता है और परेशानियां नहीं बढ़ेंगी।

डॉक्टर से दिखाएं

अगर प्यास और पेशाब की समस्या लगातार बनी रहे या बहुत ज़्यादा हो जाए, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर टेस्ट करके बताएंगे कि दिक्कत क्या है और उसका इलाज कैसे करना है।

दूसरी बीमारियों का इलाज

अगर ये लक्षण डायबिटीज के अलावा किसी और बीमारी, जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या किडनी की समस्या, की वजह से हो रहे हैं, तो डॉक्टर उसका इलाज करेंगे और आपके लक्षण कम हो जाएंगे।

डॉक्टर की सलाह मानें

डॉक्टर आपको बताएंगे कि आपको कितनी बार चेकअप के लिए आना है। उनकी सलाह मानें। इससे आपकी स्थिति पर नज़र रखी जा सकेगी और इलाज सही से हो पाएगा। अगर आपके लक्षणों में कोई बदलाव होता है या आपको कोई नई परेशानी महसूस होती है, तो डॉक्टर को ज़रूर बताएं।

याद रखें, बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना कई बार छोटी-मोटी परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन अगर ये ज़्यादा हो जाएं या लंबे समय तक रहें, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें। अपनी सेहत का ख्याल रखें और डॉक्टर की सलाह मानें।

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बार-बार प्यास लगने और ज्यादा पेशाब आने पर डायबिटीज निकले तो क्या करें? 

अगर बार-बार प्यास लगने और ज्यादा पेशाब आने की वजह से डॉक्टर ने डायबिटीज बता दी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ चीजें करके आप इसे मैनेज कर सकते हैं और परेशानियों से बच सकते हैं:

  1. डॉक्टर से सलाह लें: सबसे पहले डॉक्टर के पास जाएं, चाहे वो आपका सामान्य डॉक्टर हो या डायबिटीज के विशेषज्ञ (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट)। वो आपका अच्छे से चेकअप करेंगे और टेस्ट करेंगे, जैसे ब्लड की जांच (खाली पेट ब्लड शुगर, OGTT टेस्ट या HbA1c) और पेशाब की जांच। इन टेस्ट से पता चलेगा कि आपको डायबिटीज है और कितनी गंभीर है।
  2. सलाह मानें: डॉक्टर आपके लिए एक खास इलाज का प्लान बनाएंगे, जो आपकी जरूरतों के हिसाब से होगा। इसमें आपकी डाइट बदलना, रोज एक्सरसाइज करना, वजन कंट्रोल करना और दवाइयां लेना (जैसे इंसुलिन या खाने वाली दवाइयां) शामिल हो सकते हैं। ये सब आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और लक्षणों को कम करने में मदद करेंगे।
  3. ब्लड शुगर चेक करें: डॉक्टर बताएं तो घर पर ही ब्लड शुगर चेक करने वाली मशीन (ग्लूकोमीटर) से अपने ब्लड शुगर को नियमित रूप से चेक करें। इससे आपको पता चलेगा कि आपका ब्लड शुगर कितना है और आप अपना इलाज उसी हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं। कोशिश करें कि आपका ब्लड शुगर डॉक्टर के बताए टारगेट रेंज में रहे, ताकि डायबिटीज से होने वाली परेशानियों से बचा जा सके।
  4. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: डायबिटीज को मैनेज करने और अपनी सेहत सुधारने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। इसमें रेशे, साबुत अनाज, कम फैट वाली प्रोटीन, फल और सब्जियों से भरपूर खाने का ध्यान रखना, मीठे और प्रोसेस्ड फूड कम खाना, पानी पीना, रोज एक्सरसाइज करना, स्ट्रेस कम करना, अच्छी नींद लेना और तंबाकू और ज्यादा शराब न पीना शामिल है।
  5. डायबिटीज क्लासेस लें: आप चाहें तो डायबिटीज के बारे में जानने के लिए क्लासेस ले सकते हैं या किसी डायबिटीज एजुकेटर से बात कर सकते हैं। इससे आपको डायबिटीज को मैनेज करना, ब्लड शुगर चेक करना, दवाइयां लेना (जैसे इंसुलिन लगाना), परेशानियों से बचना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना सीखने में मदद मिलेगी। ये क्लासेस आपको डायबिटीज को सही से मैनेज करने और अच्छी जिंदगी जीने में मदद करेंगी।
  6. डॉक्टर से मिलते रहें: डायबिटीज को मैनेज करने के लिए, आपका प्रोग्रेस देखने के लिए और इलाज में जरूरत पड़ने पर बदलाव करने के लिए डॉक्टर से नियमित रूप से मिलते रहें। अपने लक्षणों में किसी भी तरह के बदलाव या परेशानी के बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं, ताकि वो आपका सही इलाज कर सकें।
  7. मदद लें: अगर आपको डायबिटीज को मैनेज करना मुश्किल लग रहा है या आपको तनाव हो रहा है तो अपने परिवार, दोस्तों, सपोर्ट ग्रुप्स या मनोवैज्ञानिक से मदद लेने में संकोच न करें। दूसरे डायबिटीज के मरीजों से मिलने-जुलने से आपको हिम्मत मिलेगी, समझ आएगी और अच्छी जिंदगी जीने के टिप्स मिलेंगे।

डायबिटीज मैनेजमेंट में खुद पर ध्यान देना और डॉक्टर की बात मानना बहुत ज़रूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल, ब्लड शुगर चेक, क्लासेस और सपोर्ट लेकर आप डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं, परेशानियों से बच सकते हैं और खुशहाल ज़िंदगी जी सकते हैं।

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निष्कर्ष

बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना कई बीमारियों का संकेत हो सकता है, जैसे डायबिटीज या यूरिन इन्फेक्शन। थकान, वजन कम होना, मुंह का सूखना, बुखार, पेशाब में जलन या दर्द जैसे लक्षण हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें ताकि वो जांच करके पता लगा सकें कि आपको कौन सी बीमारी है और उसका इलाज कर सकें। डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या कोई और टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं। डॉक्टर आपके लिए दवाइयां, डाइट में बदलाव या कोई और इलाज बताएंगे। इन लक्षणों के कारण, लक्षण, जांच और इलाज के बारे में जानकारी रखना बहुत ज़रूरी है ताकि आप स्वस्थ रह सकें। इसके अलावा पानी खूब पिएं, हेल्दी खाना खाएं। मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं। नियमित एक्सरसाइज, धूम्रपान और ज्यादा शराब से दूरी जैसी हेल्दी आदतें अपनाकर, सही समय पर डॉक्टर से सलाह और बीमारियों का इलाज करके आप इन लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं। जल्दी जांच और सही इलाज से आप स्वस्थ रह सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

क्या घर पर बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आने को कम किया जा सकता है?

कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इन लक्षणों को कम कर सकते हैं, लेकिन ये जरूरी है कि बीमारी का असली कारण पता हो और उसका इलाज हो। इनमें शामिल हैं: खूब पानी पीना, हेल्दी खाना (जिसमें कम शुगर और प्रोसेस्ड फूड हो), नियमित एक्सरसाइज करना। अगर आपको डायबिटीज है तो अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें। लेकिन ये जरूरी है कि आप डॉक्टर से सलाह लेकर अपने लिए सही प्लान बनाएं। साथ ही ध्यान रखें कि बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना कोई छोटी परेशानी नहीं है। अगर ये परेशानी बनी रहती है तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है।

कैसे पता करें कि ये सामान्य प्यास है या ज्यादा प्यास?

सामान्य प्यास शरीर को पानी की जरूरत बताने का तरीका है। ये कई चीजों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे एक्सरसाइज, गर्मी, नमकीन या मसालेदार खाना। लेकिन ज्यादा प्यास हमेशा बनी रहती है और बाहरी चीजों से कोई संबंध नहीं होता। इसके साथ और भी लक्षण हो सकते हैं, जैसे बार-बार पेशाब आना, थकान, या वजन बिना वजह कम होना। अगर आपको शक है कि आपकी प्यास ज्यादा है तो डॉक्टर से जांच कराएं। अगर आपको बार-बार ये लक्षण हो रहे हैं और ठीक नहीं हो रहे हैं, या और ज्यादा बिगड़ रहे हैं तो डॉक्टर से जरूर मिलें। ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। साथ ही, अगर आपको दूसरी परेशानियां भी हैं, जैसे बेवजह वजन कम होना, कमज़ोरी या धुंधला दिखना, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

क्या खाने-पीने और लाइफस्टाइल में बदलाव से बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आने में कम हो सकती है?

शुगर और कैफीन वाले पेय पदार्थ कम करके बैलेंस्ड डाइट लेने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और प्यास कम लगती है। साथ ही, ध्यान, गहरी सांस लेने जैसी रिलेक्सेशन तकनीकों से तनाव कम करके भी प्यास और पेशाब की परेशानी कम हो सकती है। नियमित एक्सरसाइज से भी इंसुलिन का असर बेहतर होता है और सेहत भी अच्छी रहती है। हालांकि आप इसके लिए दवा भी ले सकते हैं। ये परेशानी किस वजह से हो रही है, इस पर निर्भर करता है कि डॉक्टर कौन सी दवा दे सकते हैं। जैसे कि, डायबिटीज वालों को ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां दी जा सकती हैं और यूरिन इन्फेक्शन के लिए एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं। दवाइयां खाने का तरीका और खुराक डॉक्टर के बताए अनुसार ही लेना चाहिए।

पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आने से क्या संबंध है?

जब शरीर से पानी ज्यादा निकलता है और कम जाता है तो उसे डिहाइड्रेशन कहते हैं। इससे शरीर के नमक और मिनरल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। डिहाइड्रेशन होने पर शरीर प्यास से बताता है कि उसे पानी चाहिए। ज्यादा पेशाब आने से डिहाइड्रेशन और बढ़ सकता है, क्योंकि शरीर पेशाब के रास्ते जरूरत से ज्यादा पानी निकाल देता है। इसलिए जल्द से जल्द पानी पीकर और जरूरी हो तो डॉक्टर से मिलकर डिहाइड्रेशन का इलाज करना चाहिए।

क्या तनाव या चिंता से बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब की समस्या हो सकती है?

कभी-कभी तनाव और चिंता की वजह से थोड़ी देर के लिए प्यास और पेशाब ज्यादा आ सकता है। तनाव शरीर को लड़ने-भागने वाली हरकतों के लिए तैयार करता है, जिससे हार्मोन का स्तर बदल सकता है और पेशाब ज्यादा बनने लगता है। लेकिन अगर ये परेशानी बनी रहती है या बढ़ जाती है तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है, क्योंकि ये डायबिटीज या यूरिन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।

बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना किस वजह से होता है?

बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना वैसे तो कई कारणों से हो सकता है, पर सबसे आम है डायबिटीज। डायबिटीज में शरीर या तो कम इंसुलिन बनाता है या वो इंसुलिन ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इससे ब्लड में शुगर बढ़ जाती है। शरीर इस ज्यादा शुगर को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे ज्यादा पेशाब आता है और प्यास भी लगती है। हालांकि डायबिटीज के अलावा भी और कई बीमारियों में ये लक्षण दिख सकते हैं, जैसे किडनी की बीमारी, यूरिन इन्फेक्शन, ब्लड में कैल्शियम का बढ़ जाना, और कुछ खास दवाइयां।

Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

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