क्या डायबटीज़ के मरीज रमजान में रोजा रख सकते है, जानिए एक्सपर्ट्स की राय – Can Diabetics do Roja in Ramadan? Know the Expert opinion

रमजान मुस्लिम धर्म के पवित्र महीनों में से एक है जहां लोग रोज़ा रखते हैं। रोज़ा फास्टिंग या व्रत है जिसमें सुबह से शाम तक आप फास्टिंग के साथ पानी भी नहीं पी सकते। ऐसे में डायबिटीज़ के मरीज़ इस पशोपेश में रहते हैं कि वो रमजान के इस मुकद्दस महीने में रोज़ा रख सकते हैं या नहीं। 

डायबिटीज़ वो स्थिति है जिसमें आपको अपने ब्लड शुगर लेवल का ध्यान रखना पड़ता है। फास्टिंग या ज़्यादा लंबे समय तक खाना नहीं खाने और डीहाईड्रेट रहने से आपके शुगर लेवल गड़बड़ा सकते हैं। ऐसे में फास्टिंग डायबिटिक लोगों के लिए एक मुश्किल बन सकती है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है की आपका डायबिटिक होना आपको अपने मज़हबी मश्क़ से दूर कर दे। इसलिए आइए इस ब्लॉग में जानते हैं कि क्या डायबिटीज़ के मरीज़ रमजान में फास्टिंग कर सकते हैं और उन्हें रोज़ा रखते व्यक्त किन चीजों का ख्याल रखने की ज़रूरत है। 

रमजान का रोज़ा सुबह सूरज उगते से शुरू होता है जिसे सहरी या सुहूर कहा जाता हैं। इसमें आप पूरे दिन खाना, पानी और दवा का भी सेवन नहीं कर सकते। शाम को इफ़तार के वक़्त इस फास्ट या रोज़ा को खोला जाता है। इन पूरे घंटों आपको फास्टिंग करनी होती है।

डायबिटिक लोगों के लिए इतने लंबे समय तक भूखे रहना, डीहाईड्रेट रहना और दवाओं के बिना रहना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में रोज़ा रखने के पहले कुछ बातों का ख्याल रखने की ज़रूरत है। आप अपने डॉक्टर से इस बारे में परामर्श कर सकते हैं। आइए जाने आपको रोज़ा रखने से पहले किन बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत है। 

रमजान में रोज़ा रखने से पहले ध्यान देने वाली बातें – Things to know before doing Roja in Ramadan

  • अपने शुगर लेवल्स को मानिटर करें। इसे आप अन्य दिनों की अपेक्षा ज़्यादा बार जाँचें। फास्टिंग में शुगर लेवल कम होने की संभावना होती है इसलिए ध्यान रखें की आपके शुगर लेवल्स नॉर्मल हैं। 
  • अपनी दवाओं को रोज़े के समय के अनुसार एडजस्ट करें जिससे आपका रोज़ा न टूटे। 
  • लो शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया होने पर तुरंत रोज़ा तोड़ दें और कुछ खा लें। 
  • आपको क्या खाना है, क्या पीना है और कौनसा शारीरिक व्यायाम करना है इसके बारे में डॉक्टर से परामर्श कर लें। 
  • अपने हाई और लो ब्लड प्रेशर का ध्यान रखें। ऐसी स्थिति में तुरंत रोज़ा तोड़ दें। 
  • आपके इंसुलिन को मेनेज करें। रोज़ा शुरू करने से पहले आपको उतने इंसुलिन की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, इंसुलिन के प्रकार को आपके सामान्य प्रकार से बदलने की आवश्यकता हो सकती है। 

और पढ़े: क्या डायबिटीज के मरीज खजूर खा सकते हैं ?

किन लोगों को रमजान में रोज़ा नहीं करना चाहिए? – Which people should not do Roja in Ramadan?

यदि आप रमजान के दौरान उपवास करते हैं तो निम्न स्थितियों में से किसी भी एक या एक से अधिक होने पर जटिलताओं का उच्च जोखिम या हाई रिस्क हो सकता है:

  • टाइप 1 डायबिटीज़
  • उन टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लोगों को जिनका शुगर कंट्रोल खराब है।
  • जिन्हें हाल ही हाइपोगलासीमिया की स्थिति हुई हो। 
  • जिन्हें हाल ही डायबिटीज़ केटोएसिडोसिस हुआ हो। 
  • जिन लोगों में बार-बार लो ब्लड शुगर का इतिहास रहा हो। 
  • जिन्हें हाइपोगलासीमिया के बारे में पता ना हो। 
  • जिन्हें गंभीर किडनी की बीमारी हो। 
  • ब्लड वेसेल से जुड़ी कोंपलिकेशन हो। 
  • गर्भवती महिलाएं जो डायबिटिक हैं। 
  • इसके अलावा यदि आपको डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताऐं जैसे खराब नजर, नर्व डेमेज या हृदय संबंधित बीमारी हो। 
  • कुछ प्रकार की दवाएं लेने पर आप फास्टिंग नहीं कर सकते। 

इन सब रिस्क फेक्टर को जानने के बाद ही आप रोज़ा रखें और इसके लिए अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। 

और पढ़े: कितना शुगर लेवल खतरनाक हो सकता है?

आप किस स्थिति में रमजान में रोज़ा रख सकते हैं? – In Which situation you can keep Roja in Ramadan?

ऐसा बिल्कुल नहीं की डायबिटिक लोग रोज़ा नहीं रख सकते। कुछ ऐसी स्थितियाँ हैं जहां आप सुरक्षित तरीके अपना कर रोज़ा रख सकते हैं। ऐसी दो स्थितियाँ हैं:

  • यदि आपकी टाइप 2 डायबिटीज़ अच्छे से नियंत्रित है। 
  • यदि आप अच्छे से दवाओं व लाइफस्टाइल मोडीफिकेशन के साथ अपनी डायबिटीज मेनेज किये हुए हैं। 

और पढ़े: डायबिटीज में ककड़ी खा सकते है या नहीं?

डायबिटीज़ में रोज़ा रखने से जुड़े रिस्क या जोखिम – Risk of doing Roja in Ramadan for Diabetics

गर्मियों में फास्टिंग 20 घंटे तक भी लंबी हो सकती है जिसमें मौसम का बहुत असर होता है। ऐसे में गर्मी और उमस भरा मौसम और भी कोंपलिकेशन ला सकता है। डायबिटीज़ के मरीजों में रमजान के रोज़े से जुड़े कुछ मुख्य रिस्क है:

  • हाइपोग्लाइसिमिया ( <70 mg/dL)
  • हाइपरग्लाइसिमिया ( >300 मग/dL)
  • डाइबीटिक कीटोएसीडोसिस 
  • डिहाइड्रेशन और थरोंबोसिस

इन स्थितियों से बचने के लिए अपने स्वास्थ्य को अच्छे से जाने और अपने डॉक्टर से ज़रूर परामर्श करें। 

और पढ़े: मधुमेह में खरबूजा खाना कितना फायदेमंद?

रिस्क को कैसे जानें – How to Know the Risk?

ज़रूरी नहीं कि हर डायबिटीज़ व्यक्ति रोज़ा नहीं रख सकता या हर डायबिटिक व्यक्ति रोज़ा रख सकता है। इसके लिए आपके रिस्क को मापने की आवश्यकता होती है। यह रिस्क अलग-अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं जिसके कई कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के रिस्क को पता करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • डायबिटीज़ का प्रकार 
  • व्यक्ति द्वारा ली जाने वाली दवाओं का प्रकार 
  • व्यक्तिगत हाइपोग्लाइसिमिक रिस्क 
  • व्यक्ति में डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताओं या समस्या की श्रेणी 
  • व्यक्तिगत लाइफस्टाइल, सोशल लाइफ और वर्क लाइफ 
  • रमजान से जुड़ा पहले का अनुभव 

इन सब बातों को ध्यान में रख कर किसी व्यक्ति के लिए फास्टिंग निर्धारित की जा सकती है। 

और पढ़े: शुगर के मरीज लीची खा सकते है या नहीं?

रमजान में क्या और कैसे खाएं – What to eat & What to not eat in Ramadan?

यदि आपका डॉक्टर आपको रोज़ा रखने के लिए कहता है तो आपको इसके लिए कुछ तैयारी करने की ज़रूरत है। डायबिटिक व्यक्ति को भूखा नहीं रहना चाहिए लेकिन रोज़ा रखते समय भूखे रहने के घंटे लंबे हो सकते हैं। इसलिए रोज़ा शुरू करने से पहले और रोज़ा खोलते समय एक अच्छी डाइट की ज़रूरत होती है।

ध्यान रखें अपने सहरी और इफ्तारी के भोजन को अच्छे से चुनें। यह एस भोजन होना चाहिए जो आके शुगर लेवल्स को घंटों के फास्ट के बाद अचानक से ना बढ़ा दे। आइए जानते हैं रोज़े के खाने का स्ट्रक्चर क्या होना चाहिए:

  • सहरी और इफ़तार के बीच कैलोरी को सही से विभाजित करें। 
  • भोजन संतुलित होना चाहिए जिसमें 45-50% कार्बोहाइड्रेट, 20-30% प्रोटीन और <35% वसा होनी चाहिए। 
  • “रमजान थाली” पद्धति के अनुसार ही खाने को निर्धारित करें।
  • ज्यादा चीनी वाली मिठाइयों से परहेज़ करें। 
  • लो-जीआई और हाई फाइबर कार्बोहाइड्रेट को अपने खाने में शामिल करें।
  • हाइड्रेशन बनाए रखें। भोजन के बीच पानी और चीनीरहित पेय पिएं। 
  • सहरी जितना देरी से हो सके तब करें। 
  • सहरी के दौरान हाई प्रोटीन और हाई फैट खाना खाएं जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहे। 
  • इफ़तार की शुरुआत पानी से करें जिससे आप रिहाईड्रेट हो सके। उसके बाद ब्लड ग्लूकोस बढ़ाने के लिए 1-2 खजूर खाएं। 
  • इफ्तारी से सहरी के बीच में कम कैलोरी वाले स्नैक्स जैसे फल, मेवे, या सब्जियों का सेवन किया जा सकता है। 

आइए जानते हैं वो कौन कौन सा खाना हैं जो एक हेल्दी रमजान डाइट का हिस्सा बन सकता है: 

और पढ़े: क्या मधुमेह के रोगी बेल का जूस पी सकते हैं?

सहरी या सुबह से पहले – In Sehri

डायबिटीज़ में फास्ट रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि आप सहरी का भोजन को न छोड़ें। इसमें कुछ ऐसे खाने को अपनी रमजान डाइट में शामिल करें जो आपको पूरे दिन के लिए एक्टिव रखे और आपके शुगर लेवल्स को नियंत्रित रखे। 

  • उच्च फाइबर स्टार्च वाले भोजन जिनका ग्लासिमिक इंडेक्स कम होता है, ऐसे खाने को अपनी डाइट में शामिल करें। आप हाई फाइबर अनाज या जई (ओट्स), बकव्हीट, बुलगुर गेहूं या ब्राउन ओर वाइल्ड राइस या चावल खा सकते हैं क्योंकि यह धीरे धीरे अवशोषित होते है और आपके शुगर लेवल्स को मेन्टेन रखते हैं। साथ ही लंबे समय तक आपकी भूख शांत रखते हैं। 
  • अपने कार्ब काउन्ट और पोर्शन का ध्यान रखें जिससे आपके ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहें।
  • मसूर (ढल) छोले और बीन्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और फाइबर में भी उच्च हैं। फलों और सब्जियों के साथ इनका सेवन करें क्योंकि यह कब्ज को रोकने और आपके दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
  • दिन का उपवास शुरू करने से पहले, आपको दिन के दौरान पानी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त शुगर-फ्री और डिकैफ़िनेटेड तरल पदार्थ पीने चाहिए।

इफ़तार या शाम के समय – In Iftar

  • परंपरागत रूप से उपवास खजूर से तोड़ा जा सकता है, ये फाइबर में उच्च होते हैं लेकिन कार्बोहाइड्रेट के समृद्ध स्रोत होते हैं। दो बड़े खजूर (बिना स्टोन के 30 ग्राम) लगभग 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट प्रदान कर सकते हैं, जो ब्रेड के एक मध्यम स्लाइस के समान है। इसलिए रोज़ा खोलने के लिए एक ग्लास पानी के साथ सिर्फ 1 खजूर खाएं।  
  • शुगर फ्री तरल पदार्थों से रिहाइड्रेट करने की कोशिश करें। इसमें पानी सबसे अच्छा विकल्प है। शक्करयुक्त फ़िज़ी पेय या फलों के रस से बचें क्योंकि ये आपके शुगर लेवल को बढ़ा देंगे और आपको प्यास लग सकती है।
  • लस्सी या लबान जैसे दूध पेय प्रोटीन और कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत हैं, लेकिन यह बिना चीनी के होने चाहिए।
  •  मिठाई खाने से बचें क्योंकि इसकी थोड़ी सी मात्रा भी आपके शुगर लेवल बढ़ा सकती है। 
  • तले हुए पदार्थ सीमित मात्रा में लें। इससे रमजान में आपका वज़न बढ़ सकता है। साथ ही यह आपके ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं। 

और पढ़े: क्या शुगर के मरीज खीरा खा सकते हैं?

रमजान और डायबिटीज़ शिक्षा – Ramadan & Diabetes Education

रमजान में सभी लोग इसका लुत्फ़ उठा सके इसलिए डायबिटीज़ के लोगों पर भी विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। डायबिटीज़ मरीज रमजान में फास्ट कर सकते हैं इसके लिए रमजान से पहले डायबिटीज़ शिक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह शिक्षा 6 भागों में बांटी जा सकती है:

  • रिस्क क्वानटिफिकेशन 
  • ब्लड ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग या निगरानी 
  • डाइट और पेय पदार्थों के बारे में सुझाव 
  • व्यायाम का सुझाव 
  • दवाओं का समय व मात्रा 
  • कब फास्ट तोड़ें

और पढ़े: क्या डायबिटीज के मरीज़ चाय पी सकते है?

निष्कर्ष – Conclusion

डायबिटिक लोग भी रमजान में फास्ट कर सकते हैं अगर वो कुछ बातों का ध्यान रखें और अपने स्वास्थ्य को अच्छे से जानें। यदि वह अपने रिस्क को समझते हैं, अपनी डायबिटीज़ को मेनेज करते हैं और अपने डॉक्टर की सिफारिशों का सावधानीपूर्वक पालन करते हैं, तो आप रमजान के दौरान सुरक्षित रूप से उपवास कर सकते हैं।

इसके लिए खाने के समय, खाने के प्रकार, अपनी डायबिटिक हिस्ट्री और शुगर लेवल कंट्रोल को अच्छे से समझें और इस मुकद्दस महीने को मनाएं। 

और पढ़े: क्या डायबिटीज़ में ग्रेपफ्रूट या चकोतरा खाना सुरक्षित है?

सामान्यतया पूछे जाने वाले प्रश्न – Frequently Asked Questions

रमजान में क्या खा सकते हैं?

रमजान में सहरी व इफ़तार के समय खाने पर ध्यान दें। सहरी के समय हाई फाइबर स्टार्च खाना खाएं जो आपको पूरे दिन के लिए तैयार करे और लंबे समय तक पेट भरा रखे। जैसे ब्राउन राइस, हाई फाइबर अनाज, ओट्स आदि। हाई प्रोटीन डाइट जैसे बीन्स, छोले आदि को अपने खाने में शामिल करें। साथ ही हाइड्रेशन के लिए पानी और चीनी रहित पेय पदार्थ लें। इसी प्रकार इफ्तारी के लिए आप खजूर के बाद कुछ हल्का खाएं। ज्यादा तला हुआ और हाई कार्ब खाना न खाएं। अपने आपको हाईड्रेटेड रखें। बिना चीनी का दूध और लस्सी भी पी सकते हैं। 

डायबिटिक लोगों को कैसे रोज़ा तोड़ना चाहिए?

डायबिटीज़ में पूरे दिन फास्टिंग व पानी नहीं पीने से शुगर लेवल प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में रोज़ा खोलते समय अचानक से हाई शुगर खाना ना खाएं। सबसे पहले खुद को रिहाईड्रेट करने के लिए एक गिलास पानी पिएं और उसके बाद एक खजूर खाएं। यह आपके शुगर लेवल को धीरे धीरे सामान्य करेगा। इसके बाद आप एक हेल्दी डाइट खाएं। 

किन लोगों को रमजान में रोज़ा नहीं रखना चाहिए?

कुछ स्थितियों में आपको रोज़ा या फास्टिंग से बचना चाहिए। यह स्थितियाँ हो सकती है: टाइप 1 डायबिटीज़, खराब शुगर कंट्रोल वाले टाइप 2 डायबिटीज़ मरीज, हाइपोगलाइसिमिक, जिनका डायबिटीज़ केटोएसिडोसिस का इतिहास रहा हो, गंभीर किडनी की बीमारी में, ब्लड वेसेल से जुड़ी कोंपलिकेशन वाले मरीज, डायबिटिक गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताऐं जैसे खराब नजर, नर्व डेमेज या हृदय संबंधित बीमारी व कुछ दवाएं।

क्या मैं डायबिटीज़ में रमजान के फास्ट कर सकता हूँ? 

डायबिटिक लोगों के लिए फास्टिंग रखना उनके शुगर लेवल को अनियंत्रित कर सकता है। ऐसे में आप यदि फास्टिंग करना चाहते हैं तो आपको कई बातों का ध्यान देने की ज़रूरत है। यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज़ है और आपकी डायबिटीज़ नियंत्रित है और शुगर लेवल कन्ट्रोल्ड हैं तो आप फास्ट कर सकते हैं। इसके अलावा आप अगर एक हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं जो आपके शुगर लेवल को लंबे समय से नियंत्रित रखे हुए है तो आप रोज़ा रख सकते हैं। लेकिन हर स्थिति में अपने डॉक्टर से ज़रूर परामर्श लें और अपने शुगर लेवल्स को नियमित बार बार जाँचें। यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि आपको कोई रिस्क या कोंपलिकेशन हैं तो फास्टिंग से बचें। 

संदर्भ – References

https://www.diabetes.org.uk/guide-to-diabetes/managing-your-diabetes/

https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/diabetes/expert-answers/diabetes-fasting/faq-20455907Last Updated on by Dr. Damanjit Duggal 

Disclaimer

This site provides educational content; however, it is not a substitute for professional medical guidance. Readers should consult their healthcare professional for personalised guidance. We work hard to provide accurate and helpful information. Your well-being is important to us, and we value your feedback. To learn more, visit our editorial policy page for details on our content guidelines and the content creation process.

Leave a Reply

loading..

फ्री डायबिटीज डाइट प्लान डाउनलोड करें

डाइट प्लान डाउनलोड करें